दो दिवसीय 'ब्रजधरा साहित्य उत्सव' में में हुआ बौद्धिक मंथन,रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ समापन



भारतीय विरासत भुलाए बैठे हैं,पश्चिम विरासत पर इतरा रहा

पद्मश्री बलवंत ठाकुर ने सांस्कृतिक चेतना जागृत करने का आह्वान किया,आगरा में मंचित करना चाहते हैं अपना नाटक

हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा। 12 फारवर्ड,हम अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करना सीखें। हम सांस्कृतिक वैभव को दुनिया के सामने प्रभावशाली ढंग से नहीं रख पाए। हमने अपनी सांस्कृतिक विरासत को पहचाना ही नहीं,पश्चिम के पीछे पागल रहे हैं। मैं कभी कल्पना नहीं कर सकता कि यहां सेल्फी प्वाइंट के इस चौराहे पर खड़े होकर भी इतनी गंभीर बात हो रही हो, विदेशों में तो मैंने ऐसा होते देखा। यह कहना था पद्मश्री बलवंत ठाकुर का,जो ब्रज धरा साहित्य उत्सव के भव्य समापन समारोह में अध्यक्षीय संबोधन दे रहे थे।

उन्होंने कहा मेरे एक दोस्त ने लंदन में बुलाया, वो मुझे नाटक मैकबेथ दिखाने के लिए ले गए, उनका लिटरेचर के प्रति जो लगाव था, वो मुझे महसूस हुआ, वो बहुत रोमांचित थे कि एक भारतीय नाटककार को शेक्सपियर का मैकबेथ दिखा दिया। यह जज्बा अपने साहित्यकारों और कलाकारों के प्रति मुझे छू गया। मैने उनको जब नाट्यशास्त्र और कालिदास के विषय में बताया और मोहन राकेश तक के नाटकों का जिक्र किया तो भ्रम टूटा। 

चिंता जताते हुए पदमश्री बलवंत ठाकुर ने कहा बच्चों के नाटक का ढिंढोरा तो पीटते हैं लेकिन वास्तव में बच्चों के नाटक कभी नहीं लिखते हैं। एक नई नाट्य भाषा पर काम करना शुरू किया था। इसी क्रम में मेरे लिखे हुए दो नाटक बहुत ज्यादा लोकप्रिय हुए। वो हैं-"मेरे हिस्से की धूप कहां हैं", "आप हमारे हैं कौन" हैं। ब्रजधरा साहित्योत्सव का अटल उद्यान में रंगारग़ समापन हो गया। इस मौके पर कवियों ने अपनी रचनाओं को सुनाकर सबका दिल जीत लिया। अशोक रावत ने कहा साहित्य किसी भाषा का हो, उसने सदैव ही मानवीय मूल्यों को संरक्षित रखने का काम किया है। उन्होंने अपनी इस रचना से सभी की तालियां बटोरीं-"कभी वो राह में बिखरे हुए पत्थर नहीं गिनते, सफर का शौक है वो किलोमीटर नहीं गिनते, उन्हें भी दर्द देती हैं सफर की मुश्किलें, जो मंजिल तक पहुंचते हैं, वो ठोकरें नहीं गिनते।" कवि रामेंद्र मोहन त्रिपाठी ने सुनाया-"पहाड़ फाड़कर बनती हैं नदियां, नदियां समंदर को प्यार करती हैं। जो किसी का इंतज़ार नहीं करते, सदियां उन्हीं का इंतज़ार करती हैं।" डॉ. त्रिमोहन तरल ने सुनाया, "घास के तिनके जो थे बेकार, कूड़े में शुमार, चंद चिड़ियों के हुनर से आशियां हो गए। अगली रचना सुनाई-"चूल्हे की लकड़ी सांसों से सुलगानी पड़ती है, एक आग बुझाने की खातिर एक आग जलानी पड़ती है, जिनको हथकड़ियां पहनाने से चूक गए हद हो जाती है जब उनको माला पहनानी पड़ती हैं।"

द्वितीय दिवस की शुरुआत चतुर्थ सत्र के आयोजन के साथ हुई। 'नारी लेखन-अनुभव से अभिव्यक्ति तक' नामक इस सत्र की संयोजक डॉ. मधु भारद्वाज थीं। डॉ. सुषमा सिंह, राशि गर्ग, डॉ. शशि गुप्ता थीं। डॉ. मधु भारद्वाज ने एक कविता के माध्यम से कहा-"संवेदनाओं और संघर्षों का, जब पुस्तक से मिलन हुआ, अनुभव की अभिव्यक्ति से ही, नारी लेखन का सृजन हुआ!" प्रो. सुषमा सिंह ने कहा तेलगु कवयित्री चल्ला पल्लित स्वरूपा रानी की रचना है-“मैं कँटीली झाड़ियों में फंस कर तड़पने वाली गौरैया हूँ/किसी भी तरफ़ हिलूँ/काँटे चुभेंगे ही।” मीना गजभिए, दया पवार, जोगमाया चकमा और शान्ति यादव, कुसुम मेघवाल, रजनी तिलक, पूनम तुषामाड, ज्योति लांजेवार, छाया गोरेगाँवकर, ललिता नायक, रतनम्मा, बालाजीपल्ली विजय लक्ष्मी, सुशीला टाकभौरे आदि दलित लेखिकाओं में निराशा के स्वर नहीं हैं, अपमान एवं तिरस्कार से लड़ने के लिए इन्होंने कविता को हथियार बनाया है। ये जातिवादी भेदभाव,स्त्री-पुरुष असमानता, पूंजीवादी जकड़-बंदी और अभिजात वर्गीय वर्चस्व के विरुद्ध समाज के समक्ष खड़ी होकर अपने और अपने समाज की मुक्त का आव्हान करती हैं। यही है उनकी अनुभूति से अभिव्यक्ति तक की यात्रा! 

पंचम सत्र में 'साहित्य,रंगमंच और सिनेमा शब्द से मंच और पर्दे तक' विषय पर चर्चा हुई। जिसका संयोजन डॉ. महेश धाकड़ ने किया। इस सत्र में अनिल शुक्ल, सुरेंद्र साथी, दिलीप रघुवंशी, ऋतुराज त्रिपाठी शामिल थे। 

षष्ठम सत्र में 'साहित्य और स्वास्थ्य का अंतर्संबंध' रहा। संयोजक कुमार ललित थे। डॉ. नवीन गुप्ता, डॉ. अशोक विज, डॉ. मुनीश्वर गुप्ता बतौर वक्ता शामिल रहे। 

सप्तम सत्र 'साहित्य संस्कृति में शैक्षिक संस्थानों का योगदान' विषय पर हुआ। संयोजक डॉ. शांतनु साहू थे। प्रो. जय सिंह नीरद, डॉ. गिरधर शर्मा बतौर वक्ता शामिल हुए। प्रो. जय सिंह नीरद ने कहा पहले मशीन ने मनुष्य को मशीन बनाया, संवेदनाएं पथरा गईं, अब मशीन मनुष्य को पदस्थ करने की कोशिश कर रही हैं। डॉ. गिरधर शर्मा ने कहा, माध्यमिक शिक्षा को प्रभावी बनाने वाले तीन बिंदु हैं, स्कूली शिक्षा रुचिकर हो, छात्रों की खूबियों को तलाशा और तराशा जाये, अनुशासन व देशभक्ति के भाव समाविष्ट किए जायें।

समारोह में गति सिंह और अक्षय प्रताप सिंह और साथियों धैर्य अग्रवाल, अभिषेक शर्मा ने अपनी संगीतमय प्रस्तुति में हनुमान चालीसा की रॉक बैंड पर प्रस्तुति दी। धरा चेतना फाउंडेशन की अध्यक्ष दीपाली सिंह, सचिव अक्षय प्रताप सिंह, कोषाध्यक्ष बरखा सिंह, समन्वयक डॉ. महेश धाकड़, कुमार ललित, कार्यक्रम प्रभारी गति सिंह, पूनम सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। समारोह में गौरव दीक्षित, कृतिका कोरंगा, अमीर अहमद, वत्सला प्रभाकर, नंद नंदन गर्ग, डॉ. अभिलाषा, अनिल शर्मा, पार्थों सेन, नरेश तन्हा, भूमिका तिवारी, संजय गोयल, अमित सूरी, कपिल सिंघल और इस्लाम कादरी आदि मौजूद थे।

ब्रज धरा साहित्य उत्सव में विभूतियों का किया गया सम्मान :

'ब्रज धरा साहित्य उत्सव' में सम्मान समारोह में साहित्य, संस्कृति और समाज के लिए उल्लेखनीय योगदान देने वाली शख्शियतों का सम्मान किया गया। शख्सियतों को मशहूर रंगकर्मी पद्मश्री बलवंत ठाकुर द्वारा शॉल, पटका पहनाकर और सम्मान पत्र प्रदान करके सम्मानित किया गया। मशहूर गीतकार सोम ठाकुर को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड घोषित किया गया, जिसको संस्था के पदाधिकारी उनके स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के कारण इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाने के कारण, उनके निवास पर जाकर प्रदान करेंगे। बाकी 11 अन्य सभी साहित्य सेवियों को मंच पर सम्मानित किया गया। 'गीत गौरव सम्मान' रामेंद्र मोहन त्रिपाठी, 'ग़ज़ल गरिमा सम्मान' अशोक रावत, डॉ. त्रिमोहन तरल, सुधीर नारायण, 'साहित्य साधक सम्मान' शीलेंद्र कुमार वशिष्ठ, 'साहित्य गौरव सम्मान' प्रो. जय सिंह नीरद, योगेश चंद्र शर्मा योगी, 'साहित्य गरिमा सम्मान' डॉ. कुसुम चतुर्वेदी, डॉ. ज्योत्सना शर्मा, 'साहित्य सेवा सम्मान' आचार्य नीरज शास्त्री, रेनु अंशुल को प्रदान किया गया। वहीं गायक सुधीर नारायण के अपने देश से बाहर होने के कारण, उनका सम्मान उनकी धर्मपत्नी पिंकी नारायण ने ग्रहण किया। संचालन कुमार ललित ने किया,धन्यवाद अक्षय प्रताप ने दिया।

ब्रज विषय पर लाइव पेंटिंग से बिखेरे रंग,लगाई चित्र प्रदर्शनी :

 इस मौके पर चित्रकला कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसकी संयोजक डॉ. आभा सिंह गुप्ता, डॉ. मनोज कुमार और डॉ. एकता श्रीवास्तव थीं। कार्यशाला में प्रो. बिंदु अवस्थी, डॉक्टर सविता प्रसाद, प्रो. नीलम कांत, डॉ. रश्मि सक्सेना, रश्मि सिंह, अरविंद, डॉ. शीतल, डॉ. दिनेश मौर्य, सुनील शामिल थे। कलाकारों द्वारा ब्रज विषय पर बनाए गए आकर्षक चित्रों की एक भव्य प्रदर्शनी लगाई गई थी। जिसे कला प्रेमियों ने सराहा।