वात्सल्य में बंधे वंशीधर : उखल बंधन लीला ने भिगोया भक्तों का हृदय



तृतीय दिवस पर बाल कृष्ण की अलौकिक छवि से ब्रजमय हुआ नवीन गल्ला मंडी परिसर

हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा। 12 फरवरी, श्री श्यामा श्याम भागवत आयोजन समिति द्वारा आयोजित श्री कृष्ण लीला रासोत्सव के तृतीय दिवस गुरुवार सायंकाल भक्तिरस अपनी चरम सीमा पर दिखाई दिया। नवीन गल्ला मंडी परिसर में सजी दिव्य झांकियों, मधुर भजनों और भावपूर्ण अभिनय ने ऐसा वातावरण निर्मित किया मानो स्वयं नंदलाल बाल रूप में ब्रजवासियों के बीच क्रीड़ा कर रहे हों। बाल लीलाओं एवं उखल बंधन प्रसंग ने श्रद्धालुओं को वात्सल्य और भक्ति के सागर में डुबो दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ ठाकुर जी एवं स्वरूपों की विधिवत आरती के साथ हुआ। इस अवसर पर अध्यक्ष हरी चंद्र गर्ग,वरिष्ठ उपाध्यक्ष दिनेश चंद्र गोयल, राजीव गुप्ता, देवेश शाह, मंच व्यवस्थापक अनीश अग्रवाल, विक्रांत गोयल, गगन गोयल एवं अमन गोयल ने स्वरूपों की आरती उतारकर आशीर्वाद प्राप्त किया।

नित्य रासलीला कलाकारों द्वारा प्रस्तुत बाल लीलाओं में बाल कृष्ण की चंचलता, सखाओं संग क्रीड़ा और मैया यशोदा के वात्सल्य भाव का अत्यंत सजीव चित्रण किया गया। बाल गोपाल की निष्कलुष मुस्कान और मोहक अदाओं ने उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरा पंडाल “जय कन्हैया लाल की” के उद्घोष से गूंजता रहा।

इसके उपरांत उखल बंधन लीला का हृदयस्पर्शी मंचन हुआ। लीला में दर्शाया गया कि मैया यशोदा जब नटखट कन्हैया को उखल से बांधने का प्रयास करती हैं, तो रस्सी बार-बार दो अंगुल छोटी रह जाती है। अंततः मातृ प्रेम के आगे स्वयं भगवान भी बंध जाते हैं। यह प्रसंग दर्शाता है कि प्रभु को केवल सच्चे प्रेम और समर्पण से ही बांधा जा सकता है। उखल से बंधे श्री कृष्ण द्वारा यमलार्जुन वृक्षों का उद्धार करने की झांकी ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

स्वामी लक्ष्मण जी महाराज एवं स्वामी प्रदीप कृष्ण ठाकुर ने अपने आशीर्वचनों में कहा कि बाल लीलाएं हमें सिखाती हैं कि ईश्वर सर्वशक्तिमान होते हुए भी भक्तों के प्रेम के अधीन हो जाते हैं। निष्कपट भक्ति ही प्रभु प्राप्ति का सरल मार्ग है।

मंच व्यवस्थापक अनीश अग्रवाल ने बताया कि शुक्रवार सायंकाल श्री कृष्ण लीला रासोत्सव के अंतर्गत भव्य दशावतार लीला प्रसंग का मंचन किया जाएगा।