श्री कृष्ण लीला रासोत्सव के अष्टम दिवस पर रास,संगीत और साधना से सजी दिव्य प्रस्तुति
हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा। श्री श्यामा श्याम भागवत आयोजन समिति द्वारा आयोजित श्री कृष्ण लीला रासोत्सव के अष्टम दिवस सोमवार सायंकाल स्वामी हरिदास जी लीला का अत्यंत भावपूर्ण एवं आध्यात्मिक मंचन किया गया। नवीन गल्ला मंडी परिसर में सजे भव्य पंडाल में प्रस्तुत इस लीला ने श्रद्धालुओं को ब्रज की मधुर भक्ति धारा से जोड़ दिया। रस, संगीत और साधना के संगम ने वातावरण को अलौकिक बना दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ ठाकुर जी एवं स्वरूपों की विधिवत आरती के साथ हुआ।
इस अवसर पर अध्यक्ष हरी चंद्र गर्ग, वरिष्ठ उपाध्यक्ष दिनेश चंद्र गोयल, राजीव गुप्ता, देवेश शाह, मंच व्यवस्थापक अनीश अग्रवाल, जय प्रकाश अग्रवाल, शंभू नाथ, राज कुमार, सत्य प्रकाश, विक्रांत गोयल, गोपाल गोयल, मीरा रानी, राधा रानी, रेणु गर्ग, स्वीटो शाह, राकेश अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।
स्वामी हरिदास जी लीला में उनकी तपस्या,संगीत साधना और श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम का अत्यंत सजीव चित्रण किया गया। लीला में दर्शाया गया कि स्वामी हरिदास जी वृंदावन के निकुंजों में रहकर निरंतर श्रीकृष्ण भजन और राग-रागिनी के माध्यम से प्रभु की आराधना करते थे। उनकी भक्ति इतनी निष्कपट और मधुर थी कि स्वयं श्री राधा-कृष्ण उनके समक्ष प्रकट हुए।
लीला के चरम प्रसंग में स्वामी हरिदास जी की करुण पुकार और मधुर संगीत से प्रसन्न होकर श्री राधा-कृष्ण एक दिव्य संयुक्त स्वरूप में प्रकट होते हैं, जो आगे चलकर श्री बांके बिहारी जी के रूप में विख्यात हुए। इस प्राकट्य दृश्य का मंचन अत्यंत प्रभावशाली रहा। जैसे ही बिहारी जी का स्वरूप प्रकट हुआ, पूरा पंडाल “राधे-राधे” और “बांके बिहारी लाल की जय” के जयघोष से गूंज उठा। भव्य फूलबंगला में विराजे बिहारी जी की अलौकिक छवि देख श्रद्धालु भावविभोर होकर खड़े हो गए और पुष्पवर्षा के साथ उस दिव्य क्षण का स्वागत किया।
कलाकारों के सजीव अभिनय, मधुर भजनों और शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति ने वातावरण को वृंदावन धाम की अनुभूति से भर दिया। मंच सज्जा और प्रकाश व्यवस्था ने निकुंज वन की दिव्य छटा को साकार कर दिया।
स्वामी लक्ष्मण जी महाराज एवं स्वामी प्रदीप कृष्ण ठाकुर ने अपने आशीर्वचनों में कहा कि स्वामी हरिदास जी की भक्ति हमें यह सिखाती है कि जब साधना में प्रेम और समर्पण की पराकाष्ठा होती है, तब प्रभु स्वयं भक्त के समक्ष प्रकट होते हैं। बांके बिहारी जी का प्राकट्य भक्ति और संगीत साधना की सर्वोच्च उपलब्धि का प्रतीक है।
अध्यक्ष हरी चंद्र अग्रवाल और मंच व्यवस्थापक अनीश अग्रवाल ने बताया कि बुधवार को भक्त काले खां मदनल मोहन जी लीला का मंचन किया जाएगा।

