साहित्यकारों बीच मुखर कला-संस्कृति,दो दिवसीय साहित्य उत्सव में पहले दिन कई सत्रों में हुई चर्चा

 


भक्ति युग में ब्रज भाषा शिखर पर रही, अष्टछाप के कवियों का इसमें बड़ा योगदान रहा

साहित्य की चर्चाओं संग हमजोली हुई ब्रज की बोली-बानी

हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा। 10 फरवरी,भक्तिकाल ब्रज भाषा का स्वर्ण काल था। भक्तिकाल के कवि सूरदास में गहराई थी, तुलसीदास में विस्तार! यह विचार वरिष्ठ कवि शीलेंद्र वशिष्ठ ने व्यक्त किए। वह अटल उद्यान (आई लव आगरा सेल्फी प्वाइंट) में ब्रज धरा साहित्य उत्सव के प्रथम सत्र 'ब्रज भाषा के विविध आयाम' में विचार व्यक्त कर रहे थे। 

संयोजक राज बहादुर राज ने कहा कि भक्ति युग में ब्रज भाषा शिखर पर रही थी। अष्टछाप के कवियों का इस दौर में बड़ा योगदान रहा था। राज बहादुर राज ने कहा कुंभनदास जी को जब अकबर ने बुलावा भेजा तो उन्होंने इंकार करते कहा-"संतन सो कहां सीकरी सो काम, आवत जात पनाहैया टूटें, बिसर जाए हरिनाम!" ब्रज भाषा को लोक नाट्य और लोक नृत्य-संगीत का बड़ा योगदान रहा। ब्रज भाषा का पुनः प्रसार-प्रचार हो रहा है। 

ब्रज भाषा के कवि ब्रज बिहारी लाल बिरजू ने ब्रजभाषा में कविता सुनाई-"सुठी सौंधी धरा ब्रज भाव भरी, मन मोहिनी भावन सी ब्रजभाषा, रसराज के तोतरे बोल पगी, मधु मंजु सुहावनी सी ब्रजभाषा...!" डॉ. शशि तिवारी ने कहा ब्रज भक्ति, ज्ञान, वैराग्य का समुच्चय है। ब्रज भाषा ब्रज की पहचान है। ब्रज कृष्ण की लीला स्थली है, भक्त कवियों की साधना स्थली है, यह संतों की तप स्थली है। ब्रज के लिए भगवान ने कहा है, "बंदे ब्रज वसुंधरा!" अध्यक्षता करते हुए प्रो. कमलेश नागर ने कहा ब्रज भाषा पर बात करना वैसे ही, जैसे हरिकथा की बात करना, जिसके लिए कहा गया है-"हरि नाम अनंत, हरि कथा अनंता!" 

धरा चेतना फाउंडेशन द्वारा डॉ.विजय किशोर बंसल के सहयोग से मंगलवार को दो दिवसीय भव्य ब्रज धरा साहित्य उत्सव का अटल उद्यान में रंगारंग आगाज़ हुआ। उद्घाटन सेंट एंड्रयूज पब्लिक स्कूल ग्रुप के एमडी डॉ.गिरधर शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। विशिष्ट अतिथियों में गौरव दीक्षित, हिंदुस्तान कॉलेज के निदेशक डॉ.नवीन गुप्ता, राज बहादुर राज, डॉ.पंकज नगाइच, प्रो.सरोज भार्गव, प्रो.आभा चतुर्वेदी, प्रो. सुषमा सिंह, प्रो. साधना सिंह, नंद नंदन गर्ग शामिल थे। 

संस्था अध्यक्ष दीपाली सिंह, सचिव अक्षय प्रताप सिंह, कोषाध्यक्ष बरखा सिंह, समन्वयक डॉ. महेश धाकड़, कुमार ललित, कार्यक्रम प्रभारी गति सिंह, पूनम सिंह, सहयोगी कृतिका कोरंगा, अमीर अहमद एड.,पंकज सक्सेना, पार्थों सेन, नरेश तन्हा, संजय गोयल, अमित सूरी आदि भी मौजूद रहे।  

अपने उद्घाटन भाषण में डॉ. गिरधर शर्मा ने कहा ब्रजधरा साहित्योत्सव अपने आप में साहसिक व अनूठी पहल है। साहित्य,संस्कृति,संवेदना एवं विभिन्न विधाओं तथा ललित कलाओं के समन्वयन व प्रश्रय हेतु समग्र प्रयास है । विभिन्न सत्रों के माध्यम से विद्वत्ता तथा अनुभवों की साझेदारी निश्चित रूप से समाज को दिशा देने वाली होगी तथा साहित्य की दशा सुधारने वाली होगी। धरा चेतना फाउंडेशन की अध्यक्ष दीपाली सिंह ने स्वागत भाषण देते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। ब्रजधरा साहित्य उत्सव को विस्तार देने का संकल्प जताया। संचालन कुमार ललित ने किया।

द्वितीय सत्र में 'ब्रज की पत्रकारिता का साहित्य में योगदान' था। संयोजक डॉ. महेश धाकड़ थे। इसमें दिनेश संन्यासी, आदर्श नंदन गुप्त बतौर वक्ता शामिल हुए। वक्ताजों ने कहा कि उम्मीद कायम है दैनिक अखबार साहित्य को स्थान देकर पत्रिकाओं की कमी पूरी कर रहे हैं। 

तृतीय सत्र 'दस्तक' था,जिसमें युवा पीढ़ी के रचनाकारों ने साहित्य पर चर्चा की। संयोजक कुमार ललित थे। युवा वक्ता समायरा विजय गुप्ता ने कहा साहित्य को सीमाओं में कैद कर दिया है। इसे मुक्त कीजिए। ज्ञान वर्धन के लिए अखबारों को नियमित पढ़ती हूं। वक्ता श्वेता सागर ने कहा साहित्य भागम भाग से स्लो जीवन की ओर ले जाकर आनंद दिलाता है, मेडिसिन का काम करता है।

समारोह में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ कला-संस्कृति के भी मोहक और सुर्ख रंग बिखरे। उद्घाटन बाद भारतीय संगीत शिक्षालय के विद्यार्थियों ने शारदा वंदना प्रस्तुत की। विद्यार्थियों ने समवेत स्वरों में गाया-हम करें राष्ट्र आराधन...तेरे तन में राम मन में राम...मधुर धुन सुन सुन के मन डोले...! प्रस्तुति देने वाले विद्यार्थियों में समृद्धि सिंह, दिव्यांशी भारद्वाज, कृष्णा चतुर्वेदी, अंकुश रावत, खेमचंद धौर्या, निखिल कुलश्रेष्ठ, अरमां कुमारी, करीना गोयल, सविना खान, अयान खां शामिल थे। निर्देशन ललित कला संस्थान के संगीत विभागाध्यक्ष डॉ. देवाशीष गांगुली संगीतेश ने किया। हर्षित पाठक व साथियों ने मशहूर जनकवि नज़ीर अकबराबादी की ये सुंदर रचना सुनाई-क्या क्या मैं कहूँ कृष्ण कन्हैया का बालपन...! साथी कलाकारों में अक्षय प्रताप सिंह, गति सिंह, तनिष्का गुप्ता, दिया शर्मा, तबले पर रहें अभिषेक शुल्क। इस रचना को सुधीर नारायण ने स्वरबद्ध किया। कशिश नैनानी ने कैलीग्राफी कार्यशाला आयोजित की। डॉ.मनोज कुमार, डॉ. आभा और डॉ. एकता श्रीवास्तव द्वारा दृश्य कला कार्यशाला का आयोजन किया गया। प्रताप पब्लिक स्कूल, प्रील्युड पब्लिक स्कूल के बच्चों की प्रतिभागिता खास रही। अटल उद्यान में साहित्य-कला से संबंधित प्रदर्शनी भी साहित्य, कला और संस्कृति प्रेमियों को आकर्षित करती दिखी। 

उत्सव में आज रंगकर्मी पद्मश्री बलवंत ठाकुर होंगे विशिष्ट वक्ता, साहित्य-रंगमंच और सिनेमा पर देंगे अपना व्याख्यान :

धरा चेतना फाउंडेशन के सचिव अक्षय प्रताप सिंह, कार्यक्रम प्रभारी गति सिंह के अनुसार 11 फरवरी को चतुर्थ सत्र सुबह 11 बजे 'साहित्य संस्कृति में शैक्षिक संस्थानों का योगदान' विषय पर होगा। संयोजक डॉ. शांतनु साहू होंगे। प्रो. जय सिंह नीरद, डॉ. गिरधर शर्मा, डॉ. सुशील गुप्ता वक्ता होंगे।

पंचम सत्र 12 बजे 'नारी लेखन : अनुभव से अभिव्यक्ति तक' होगा। संयोजक डॉ. मधु भारद्वाज होंगी। डॉ. सुषमा गुप्ता, राशि गर्ग, डॉ. शशि गुप्ता वक्ता होंगी। 

षष्ठम सत्र :  'साहित्य रंगमंच और सिनेमा : शब्द से मंच और पर्दे तक' होगा। संयोजक डॉ. महेश धाकड़ होंगे। सत्र के विशिष्ट वक्ता मशहूर रंगकर्मी पद्मश्री बलवंत ठाकुर होंगे। सुरेन्द्र साथी, अनिल शुक्ल, दिलीप रघुवंशी, ऋतुराज त्रिपाठी वक्ता होंगे। 

सप्तम सत्र : 'साहित्य और स्वास्थ्य का अंतर्संबंध' होगा। संयोजक डॉ. पंकज नगायच होंगे। डॉ. नवीन गुप्ता, डॉ. अशोक विज, डॉ. मुनीश्वर गुप्ता वक्ता होंगे। सम्मान समारोह में गीतकार सोम ठाकुर को देंगे लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड, साथ में 11 विभूतियों का भी होगा सम्मान :

समन्वयक डॉ.महेश धाकड़ और कुमार ललित के अनुसार ब्रज धरा साहित्य उत्सव के समापन समारोह में गीतकार सोम ठाकुर को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किया जाएगा। 'गीत गौरव सम्मान' रामेंद्र मोहन त्रिपाठी, 'ग़ज़ल गरिमा सम्मान' अशोक रावत, डॉ. त्रिमोहन तरल, सुधीर नारायण, 'साहित्य साधक सम्मान' शीलेंद्र कुमार वशिष्ठ, 'साहित्य गौरव सम्मान' प्रो. जय सिंह नीरद, योगेश चंद्र शर्मा योगी, 'साहित्य गरिमा सम्मान' डॉ. कुसुम चतुर्वेदी, डॉ. ज्योत्सना शर्मा, 'साहित्य सेवा सम्मान' आचार्य नीरज शास्त्री और रेनु अंशुल को प्रदान करेंगे।