आगरा : 'फतेहपुर सीकरी लोकसभा' क्षेत्र की जनता परिसीमन के पक्ष में


हिन्दुस्तान वार्ता। ✍️ आमोद सोलंकी 'सी.एस.'

आगरा : फतेहपुर सीकरी लोकसभा क्षेत्र उत्तर प्रदेश का एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक संसदीय क्षेत्र है,जो आगरा जिले के साथ-साथ आसपास की कई तहसीलों को कवर करता है। मुगलकालीन धरोहर से जुड़ा यह इलाका विकास की दृष्टि से काफी पिछड़ा हुआ है। जनसंख्या वृद्धि, असमान संसाधन वितरण और राजनीतिक उपेक्षा ने यहां की समस्याओं को और जटिल बना दिया है। ऐसे में क्षेत्र के परिसीमन का प्रस्ताव न केवल समय की मांग है, बल्कि क्षेत्रवासियों के हित में एक आवश्यक कदम भी है।

परिसीमन से सीमाएं जनसंख्या के अनुपात में तय होंगी,प्रतिनिधित्व बेहतर होगा और विकास की मुख्यधारा में पिछड़े इलाकों को शामिल किया जा सकेगा। सबसे पहले जनसांख्यिकी का मुद्दा महत्वपूर्ण है। 2011 की जनगणना के बाद क्षेत्र की आबादी में तेजी से वृद्धि हुई है। कई गांव अब शहरी रूप ले चुके हैं,लेकिन संसदीय सीमाएं पुरानी हैं। इससे एक सांसद पर इतने विशाल क्षेत्र की जिम्मेदारी आ जाती है,जिसे प्रभावी ढंग से संभालना चुनौती पूर्ण हो जाता है। परिसीमन से सीटें छोटी और प्रबंधनीय होंगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं तेजी से पहुंच सकेंगी। छोटे क्षेत्र में सांसद ज्यादा सक्रिय रहेंगे और स्थानीय मुद्दों पर फोकस कर पाएंगे।

दूसरी बड़ी वजह वर्तमान सांसद की क्षेत्र से दूरी है। राजकुमार चाहर पिछले 5 साल से बाह तहसील में एक बार भी नहीं गए। न कोई जनसंपर्क कार्यक्रम, न समस्या सुनवाई, न विकास कार्यों का निरीक्षण। लोग तहसील मुख्यालय पर रोज शिकायतें लेकर पहुंचते हैं,लेकिन कोई प्रतिनिधि नहीं मिलता। स्कूलों में शिक्षकों की कमी, अस्पतालों में दवाओं का अभाव,किसानों को सिंचाई का पानी न मिलना,ये सभी समस्याएं बनी हुई हैं। 5 साल में बाह तहसील का दौरा न करना यह साफ दर्शाता है कि क्षेत्र किसी के प्राथमिकता में नहीं है। 

चुनाव के समय वादे तो बहुत किए जाते हैं, लेकिन जीत के बाद सांसद गायब हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में परिसीमन ही एक मात्र रास्ता है, जो नई सीमाओं के साथ नई उम्मीद और नया प्रतिनिधित्व लाएगा। परिसीमन लोकतंत्र को मजबूत करने का वैज्ञानिक तरीका है। जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्गठन होने से हर वोट का मूल्य बढ़ेगा। फतेहपुर सीकरी जैसे पिछड़े क्षेत्र को अगर नए रूप में सीमांकित किया जाए, तो छोटे क्षेत्र में सांसद ज्यादा जवाबदेह रहेंगे। 

महिलाओं, युवाओं, किसानों और पिछड़े वर्गों के मुद्दे प्रभावी ढंग से उठाए जा सकेंगे। UNESCO विश्व धरोहर स्थल फतेहपुर सीकरी को पर्यटन केंद्र बनाने के लिए भी परिसीमन जरूरी है। नई सीमाओं में पर्यटन से जुड़े गांव शामिल होंगे,जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। सांसद की बाह तहसील में 5 साल की अनुपस्थिति ने साबित कर दिया है कि मौजूदा व्यवस्था संतोष जनक नहीं है।