रैन वाटर हार्वेस्टिंग है भूजल स्तर को बढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका

महाराजा छत्रसाल बुंदेलखण्ड विश्वविद्यालय के भूगर्भशास्त्र अध्ययन शाला में ‘जल साक्षरता एवं जल संवर्धन' का आयोजन

हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

छतरपुर। महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में भूगर्भशास्त्र विभाग के अन्तर्गत 16 अप्रैल को विभागाध्यक्ष प्रो. पी के जैन के निर्देशन में म.प्र.शासन के निर्देशानुसार ‘जल साक्षरता एवं जल संवर्धन' का आयोजन मिशन लाइफ के अंतर्गत किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पानी के स्रोत, उपयोग, संरक्षण और प्रबंधन की समझ तथा छात्रों को पानी की कीमत और जिम्मेदार उपयोग के बारे में जागरूक करना है।

 विभाग के अतिथि विद्वान आशी जैन और मुमताज मंसूरी के द्वारा छात्रों को रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट, परकोलेशन टैंक, तालाब ग्राउंडवाटर बढ़ाने के तरीकों के बारे में बताया गया। रेन वाटर हार्वेस्टिंग भूजल स्तर को बढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका है। जो छतों या जमीन पर गिरने वाले वर्षा जल को फिल्टर करके जमीन के नीचे एक्वीफर तक पहुंचाना है। पहाड़ी क्षेत्रों में चेक डैम बनाकर पानी के बहाव को धीमा किया जाता है,जिससे पानी जमीन में रिसने के लिए अधिक समय मिल सके। यह भूजल स्तर को सुधारने में मदद करता है। भूजल पुनर्भरण सूखे कुओं, ट्यूबवेलों या विशेष रूप से बनाए गए रिचार्ज गड्ढों का उपयोग करके भूजल को कृत्रिम रूप से रिचार्ज किया जा सकता है। 

पहाड़ी क्षेत्रों में चेक डैम बनाकर पानी के बहाव को धीमा किया जाता है,जिससे पानी जमीन में रिसने के लिए अधिक समय मिल सके। यह भूजल स्तर को सुधारने में मदद करता है। पानी को बचाने के तरीकों में बदलाव जैसे नहाने के लिए शॉवर की जगह बाल्टी और मग का उपयोग करें। इससे प्रति स्नान लगभग 90 लीटर पानी बचता है। दाढ़ी बनाते या ब्रश करते समय नल बंद रखें, केवल ज़रूरत के समय ही खोलें। सब्जियाँ या फल धोते समय या बर्तन धोते समय पानी को बहने न दें, टब या बाल्टी का उपयोग करें। वाशिंग मशीन का उपयोग तभी करें जब कपड़े पूरे लोड में हों। 

इस अवसर पर विभाग के अतिथि विद्वान आशी जैन मुमताज मंसूरी, गुट्टी लाल कुशवाहा सहित एमएससी द्वितीय सेमेस्टर तथा एमएससी चतुर्थ सेमेस्टर के विद्यार्थी उपस्थित रहे।