हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
हनोई। भारतीय नौसेना का महासागरीय अनुसंधान पोत आईएनएस सागरध्वनि वियतनाम के कैम रान्ह बे बंदरगाह पहुंचा। यह दौरा भारत और वियतनाम के बीच समुद्री सुरक्षा, वैज्ञानिक सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह यात्रा भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' और ‘सागर’ (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) के विजन को आगे बढ़ाती है।
भारतीय नौसेना के पोत की यह यात्रा "सागर मैत्री" (एसएम-5) पहल के अंतर्गत की गई है, जो रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय नौसेना का एक संयुक्त कार्यक्रम है। यह पहल हिंद महासागर रिम (आईओआर) देशों के साथ दीर्घकालिक वैज्ञानिक सहयोग और क्षमता निर्माण पर केंद्रित है।
वियतनाम स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर भारतीय पोत की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा समुद्री और महासागरीय सहयोग सुदृढ़ हो रहा है। भारतीय नौसेना का महासागरीय अनुसंधान पोत आईएनएस सागरध्वनि 5 मई, 2026 को कैम रान्ह बंदरगाह पर पहुंचा, जिसने समुद्री सुरक्षा और वैज्ञानिक सहयोग के क्षेत्रों में वियतनाम-भारत संबंधों को सुदृढ़ बनाने में योगदान दिया। यह साझा सागर दृष्टिकोण क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास को बढ़ावा देता है।
दूतावास ने कहा इस पोत यात्रा का प्रतीकात्मक महत्व है, क्योंकि यह ठीक उसी समय हो रही है, जब वियतनाम की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के महासचिव और वियतनाम समाजवादी गणराज्य के राष्ट्रपति टो लाम भारत की राजकीय यात्रा पर हैं।
दोनों देशों के इस समुद्री सहयोग के दौरान समुद्री ध्वनिक डेटा एकत्र करना और समुद्र विज्ञान के क्षेत्र में वियतनाम के साथ संयुक्त अनुसंधान करना शामिल है। सागरध्वनि का उद्देश्य महासागरीय (ओशनोग्राफिक) और ध्वनिक (अकूस्टिक) डेटा के माध्यम से अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस (यूडीए) को मजबूत करना है।
बता दें कि 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' और 'सागर' विजन भारत की आधुनिक कूटनीति के दो प्रमुख स्तंभ हैं, जो इसे एक सक्रिय वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करते हैं। ये नीतियां न केवल आर्थिक विकास बल्कि रणनीतिक सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी केंद्रित हैं। ये नीतियां एक मुक्त, खुले और समावेशी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की वकालत करती हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये दोनों नीतियां मिलकर भारत को एक 'इंडो-पैसिफिक पावर' के रूप में भी पेश करती हैं। पिछले कुछ वर्षों के दौरान इन नीतियों के तहत भारत ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आने वाले देशों के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को काफी मजबूत किया है।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)


