हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा। पालीवाल पार्क में आयोजित नेचर वॉक उस समय एक यादगार अनुभव बन गई, जब अर्जुन, पीली गुलमोहर, गुलमोहर, तमाल और नींव जैसे वृक्षों पर खिले रंग-बिरंगे फूलों ने प्रकृति प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पर्यावरण प्रेमी एवं वरिष्ठ अधिवक्ता के.सी. जैन के नेतृत्व में आयोजित इस वॉक में प्रतिभागियों ने वृक्षों की पहचान के साथ उनके औषधीय, वानस्पतिक और पर्यावरणीय महत्व की भी जानकारी प्राप्त की।
नेचर वॉक के दौरान अर्जुन के वृक्ष विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। के.सी. जैन ने बताया कि अर्जुन की छाल हृदय रोगों के उपचार में अत्यंत उपयोगी मानी जाती है तथा यह वृक्ष कम पानी और जलभराव दोनों परिस्थितियों में जीवित रह सकता है। वहीं पीली गुलमोहर और लाल-नारंगी फूलों से सजे गुलमोहर के वृक्षों ने पार्क को उत्सवी स्वरूप प्रदान किया।
कंजी, पीलू (मिश्फाक), केंथ तथा तमाल जैसे वृक्षों के बारे में भी रोचक जानकारियां साझा की गईं। जैन ने बताया कि तमाल भगवान श्रीकृष्ण और राधाजी से जुड़ा अत्यंत प्रिय वृक्ष माना जाता है तथा इसके फल पकने में लगभग 10 माह का समय लगता है।
वॉक के दौरान नींव और बकेन के वृक्षों के अंतर को समझाया गया। साथ ही सुबबूल और विलायती बबूल जैसी आक्रामक प्रजातियों के पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों पर भी चर्चा हुई।
नेचर वॉक का सबसे प्रेरणादायक क्षण पार्क में विकसित हो रही कदम्बखंडी का अवलोकन रहा। वरिष्ठ एड. के.सी.जैन ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय कदम्ब वृक्षों का यह उपवन आने वाले वर्षों में प्रदेश की सबसे बड़ी कदम्बखंडी बन सकता है।
कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने आगामी वर्षा ऋतु में जारूल, कुसुम, सीबा स्पेसियोसा और टुबोबिया ओरिया जैसी उपयोगी प्रजातियों के वृक्ष लगाने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर एड.किशोर चंद जैन, डॉ.संजीव गोयल, हरप्रीत नंदा सहित अनेक प्रकृति प्रेमी उपस्थित रहे। प्रतिभागियों ने नेचर वॉक को ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताते हुए ऐसे आयोजनों को नियमित रूप से आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
रिपोर्ट : असलम सलीमी

