पूर्णिमा पर संध्या की देवी सांझी के आह्वान के साथ 16 दिन तक सजेगी मंदिर के आंगन में रंगों व फूलों की सांझी
हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा। राधा रानी संग ब्रज की समस्त गोपियों ने संध्या की देवी सांझी का पूजन किया था। पित्रपक्ष में 16 दिन तक चंद्रवंशी श्रीकृष्ण की 16 कलाओं को प्रदर्शित करने वाली सांझी उत्सव को कमला नगर स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर में भक्ति भाव के साथ मनाया जा रहा है। पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी के स्वरूप को रंगों व फूलों से सजाकर संद्या की देवी सांझी का आह्वान करने के साथ ही प्रतिदिन मंदिर के आंगन में सांझी सजाई जाएगी। प्रथम दिन श्रीकृष्ण के स्वरूप की सांझी सजाई गई। प्रतिदिन सांझी की आरती संध्या काल में की जाएगी और कान्हा की लालीओं पर आधारित आकर्षक आकृतियों से सांझी सजाई जाएगी।
मंदिर के अध्यक्ष अरविन्द प्रभु ने बताया कि रंगों, फूलों, और गोबर से सजाई जाने वाली सांझी को पानी पर भी बनाया जाता है। आखिरी दिन सांझी बहुत महत्वपूर्ण होती है, जिसे 16 कोट की सांझी कहा जाता है। 16वें दिन की सांझी को 16 कलाओं की सांझी की मान्यता दी जाती है। जिसमें युगल मिलन को प्रदर्शित करते हुए महारास का वर्णन होता है। मंदिर में प्रतिदिन शाम 5 से रात 8.30 बजे तक सांझी का दर्शन होगा।
पहले घर-घर में अविवाहित युवतियां अच्छे वर की प्राप्ति के लिए सांझी बनाती थीं। राधा जी ने भी श्रीकृष्ण की प्राप्ति के लिए संध्या की देवी सांझी की उपासना की थी। इस्कॉन का प्रयास है लुप्त हो चुकी सनातन की संस्कृति व परम्परा को जीवित रखने का। इस अवसर पर मुख्य रूप से संजीव मित्तल, नितेश अग्रवाल, शैलेन्द्र अग्रवाल, सुशील अग्रवाल, सुनील मनचंदा, राजेश गर्ग, संजीव बंसल, कमता प्रसाद अग्रवाल, आशु मित्तल, शैलेश बंसल, राजेश उपाध्याय, ओमप्रकाश अग्रवाल, संजय कुकरेजा, राजीव मल्होत्रा, अदिति गौरांगी, विपिन अग्रवाल, देव केशव आदि उपस्थित थे।


