भारत ने यूएन में आतंकवाद और बहुपक्षवाद पर रुख स्पष्ट किया

 

हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र के दौरान वैश्विक मंच पर भारत की कूटनीति का दबदबा देखने को मिला। एक ओर जहां भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने महासभा में देश का राष्ट्रीय वक्तव्य देकर आतंकवाद और वैश्विक संघर्षों पर दुनिया को कड़ा संदेश दिया, वहीं दूसरी ओर विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने 'जी77' के विदेश मंत्रियों की 50वीं वार्षिक बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व कर विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को मजबूती से रेखांकित किया।

विदेश मंत्रालय के अनुसार महासभा को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना उसे 'आतंकवाद का आदतन अभ्यासी' करार देते हुए सख्त चेतावनी दी। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि दोस्ती और आतंकवाद कभी साथ नहीं चल सकते और भारत अपनी आत्मरक्षा के संप्रभु अधिकार का पूरी मुस्तैदी से इस्तेमाल करेगा। इसके अलावा उन्होंने यूक्रेन, खाड़ी और पश्चिम एशिया के हिंसक संघर्षों पर चिंता जताते हुए कहा कि युद्ध के इस दौर में अब 'अंतहीन युद्ध' के बजाय 'युद्ध के अंत' की ओर बढ़ने का समय आ गया है। उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों को उद्धृत करते हुए अपनी बात समाप्त की कि "शांति का कोई रास्ता नहीं है, शांति ही एकमात्र रास्ता है।"

इसी दौरान कूटनीतिक मोर्चे को आगे बढ़ाते हुए विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने "ग्लोबल साउथ और मल्टीलेटरलिज़्म (बहुपक्षवाद) का भविष्य" विषय पर आयोजित जी77 की ऐतिहासिक 50वीं बैठक में भारत का राष्ट्रीय बयान प्रस्तुत किया। उन्होंने मानव-केंद्रित और विकास-उन्मुख बहुपक्षवाद को बढ़ावा देने में जी77 की प्रासंगिकता पर जोर दिया। विदेश सचिव ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में तत्काल सुधारों की वकालत करते हुए कहा कि विकासशील देशों को वैश्विक निर्णयों में बड़ी भूमिका मिलनी चाहिए, ताकि ग्लोबल साउथ के देश महज 'नियमों को मानने वाले' न रहकर 'नियम तय करने वाले' बन सकें।

इस उच्च स्तरीय सप्ताह के दौरान भारतीय विदेश मंत्री और राजनयिकों ने दुनिया भर के कई समकक्षों के साथ बेहद महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। इन बैठकों में व्यापार, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी और आपसी हितों से जुड़े द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने पर विस्तार से चर्चा हुई। इन आयोजनों के माध्यम से भारत ने स्पष्ट कर दिया कि वह वैश्विक शांति और विकास के प्रयासों में ग्लोबल साउथ के एक जिम्मेदार और मजबूत नेतृत्वकर्ता के रूप में अपनी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)