7 सितंबर को ग्रांड होटल में होगा शुभारंभ,देश के नामचीन कथाकार देंगे कहानी लेखन का प्रशिक्षण
हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा,4 सितंबर। कभी हिंदी और उर्दू के नामचीन कहानीकारों का प्रमुख केंद्र रहा आगरा अब एक बार फिर कहानी साहित्य के क्षेत्र में अपनी पहचान स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इसी उद्देश्य से 7, 8 और 9 सितंबर को स्थानीय ग्रांड होटल में तीन दिवसीय कहानी लेखन कार्यशाला आयोजित की जाएगी, जिसमें देश के छह प्रमुख कहानीकार और ख्यातिप्राप्त साहित्य समीक्षक युवा एवं नए रचनाकारों को पेशेवर कहानी लेखन का प्रशिक्षण देंगे।
यह जानकारी दिल्ली से प्रकाशित चर्चित हिंदी कहानी पत्रिका ‘कथादेश’ के संपादक हरिनारायण ने कार्यशाला के पोस्टर विमोचन कार्यक्रम में दी। उन्होंने कहा कि उन्नीसवीं और बीसवीं सदी के पूर्वार्द्ध में आगरा हिंदी और उर्दू के नामचीन कहानीकारों का केंद्र रहा है, लेकिन बाद के वर्षों में शहर में साहित्यिक गतिविधियां अपेक्षाकृत कम होती चली गईं। अब इक्कीसवीं सदी में आगरा को एक बार फिर कहानी का प्रमुख केंद्र बनाने के प्रयास शुरू किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि कार्यशाला में जितेंद्र भाटिया (जयपुर), महेश कटारे (ग्वालियर), विभांशु दिव्याल (गाजियाबाद), सत्यनारायण (जोधपुर), योगेंद्र आहूजा (नई दिल्ली) और शक्ति प्रकाश (आगरा) जैसे नामचीन कहानीकार प्रशिक्षण देंगे। वहीं हिंदी कहानी के ख्यातिप्राप्त आलोचक जयप्रकाश (राजनांदगांव) एवं प्रियम अंकित (आगरा) भी विभिन्न सत्रों में प्रशिक्षुओं का मार्गदर्शन करेंगे।
तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हिंदी की चर्चित कहानी पत्रिका ‘कथादेश’ (नई दिल्ली) और आगरा की प्रमुख सांस्कृतिक संस्था ‘रंगलीला’ के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। आयोजन में एसिड हमलों की शिकार महिलाओं के सामाजिक संगठन ‘शीरोज़’ की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
हरिनारायण ने कहा कि एक अच्छा और पेशेवर कहानीकार बनने के लिए कहानी की रूपरेखा, संरचना और पात्रों के निर्माण का व्यावहारिक अभ्यास आवश्यक है। कार्यशाला में प्रशिक्षार्थियों को इन्हीं विषयों पर सघन प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे कहानी की मजबूत नींव तैयार करने में मदद मिलेगी।
पोस्टर विमोचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरिष्ठ संस्कृतिकर्मी अनिल शुक्ल ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य आगरा में जन्मे उन्नीसवीं और बीसवीं सदी के हिंदी-उर्दू के महान कहानीकारों की किस्सा-कहानी की समृद्ध परंपरा को पुनर्जीवित करना है। उन्होंने कहा कि शहर में प्रतिभाशाली युवा कहानीकार मौजूद हैं, लेकिन उन्हें समकालीन हिंदी कहानी की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उचित मंच और प्रशिक्षण की आवश्यकता है।
कथाकार एवं लेखक अरुण डंग ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के पास सुनाने के लिए अनेक कहानियां होती हैं, लेकिन अक्सर उन्हें साहित्यिक रूप में गढ़ने का कौशल नहीं होता। यह कार्यशाला प्रतिभागियों को अपने अनुभवों का रचनात्मक अन्वेषण करने और उन्हें कहानी के रूप में विकसित करने का अवसर प्रदान करेगी।
साहित्य समीक्षक प्रो. रामवीर सिंह ने कहा कि कहानी कहने और सुनने की परंपरा अत्यंत पुरानी है। वर्तमान समय में इस परंपरा को नए रूप में आगे बढ़ाने की जरूरत है और कार्यशाला में विशेष रूप से युवाओं पर फोकस किया जाएगा।
उर्दू कथाकार नसरीन बेगम ने बताया कि कार्यशाला में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को अगले चार महीनों के दौरान दो मिनी वर्कशॉपों में भी आमंत्रित किया जाएगा। इन कार्यशालाओं में प्रतिभागियों द्वारा इस अवधि में लिखी गई कहानियों की समीक्षा की जाएगी और उन्हें अपने लेखन को और अधिक प्रभावी बनाने का अवसर मिलेगा।
डॉ. मुनीश्वर गुप्ता ने कहा कि दादी-नानी की कहानियों का पारंपरिक दौर कम होने से नई पीढ़ी कहानी की दुनिया से कुछ दूर हुई है, लेकिन आज स्टोरी टेलिंग और पॉडकास्ट जैसे नए माध्यमों के जरिए कहानी एक नए रूप में आगे बढ़ रही है।
पोस्टर विमोचन कार्यक्रम में युवा कहानीकार अर्जुन सवेदिया, मीडिया प्रभारी डॉ. महेश धाकड़, प्रवक्ता अजय तोमर, रामभरत उपाध्याय, रंगकर्मी अर्निका माहेश्वरी, मनोज सिंह, कमल सहित अन्य साहित्य एवं संस्कृति प्रेमी मौजूद रहे।
निःशुल्क होगी कार्यशाला :
तीन दिवसीय कहानी लेखन कार्यशाला का शुभारंभ 7 सितंबर को अपराह्न 4 बजे ग्रांड होटल में होगा। उद्घाटन वरिष्ठ कथाकार जितेंद्र भाटिया (जयपुर) करेंगे।
कार्यशाला में भाग लेना पूर्णतः निःशुल्क रहेगा और प्रतिभागियों को उपलब्ध कराई जाने वाली अध्ययन सामग्री के लिए भी कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। हालांकि, दो दिन के लंच और दो हाई-टी के लिए रियायती रूप में 1000 रुपये मात्र का भुगतान करना होगा।
आगरा में जन्मे नामचीन कहानीकार :
आगरा में जन्म लेने वाले प्रमुख और ख्यातिप्राप्त कहानीकारों में लल्लूलाल जी, सुदर्शन, अमृतलाल नागर, इस्मत चुगताई, रांगेय राघव, श्रीराम शर्मा, राजेंद्र यादव, रावी और विभांशु दिव्याल के नाम शामिल हैं।
मीडिया समन्वयक :
डॉ. महेश धाकड़, रामभरत उपाध्याय एवं अजय तोमर

