समाज के गौरवशाली इतिहास का पुनर्लेखन जरूरी,शिक्षा और सशक्तीकरण पर दिया जोर
हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा, 13 सितंबर। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि खटीक समाज का इतिहास त्याग, पराक्रम, सेवा और राष्ट्रभक्ति से भरा हुआ है, लेकिन इतिहास में समाज के योगदान को वह स्थान नहीं मिला, जिसका वह हकदार है। अब आवश्यकता है कि खटीक समाज के गौरवशाली इतिहास का पुनर्लेखन हो और उसके योगदान को सही रूप में सामने लाया जाए। उन्होंने कहा कि खटीक समाज ने कभी धर्म नहीं छोड़ा और जब भी देश तथा सनातन संस्कृति पर संकट आया, समाज के लोग सबसे आगे खड़े रहे।
रक्षा मंत्री रविवार को राव कृष्णपाल सिंह ऑडिटोरियम, आरबीएस कॉलेज, खंदारी में अखिल भारतीय खटीक समाज के तत्वावधान में आयोजित खटीक गर्जना सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इससे पूर्व खेरिया एयरपोर्ट पहुंचने पर जनपद के जनप्रतिनिधियों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया। सम्मेलन में खटीक समाज के गणमान्य लोगों ने रक्षा मंत्री का चांदी का मुकुट, तलवार और स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया। रक्षा मंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
राजनाथ सिंह ने कहा कि संत दुर्बल नाथ जी केवल खटीक समाज के संत नहीं, बल्कि पूरे भारतीय समाज के संत थे। उनके विचार और संदेश सभी के लिए प्रेरणादायी हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल से लेकर 1857 के स्वतंत्रता संग्राम और आजादी की लड़ाई तक खटीक समाज के लोगों ने साहस और वीरता का परिचय दिया। मुगल काल में धर्म की रक्षा के लिए संघर्ष हो या अंग्रेजों के विरुद्ध स्वतंत्रता आंदोलन, समाज के लोगों ने अपनी भूमिका निभाई। राम मंदिर आंदोलन में भी समाज के लोगों की सक्रिय भागीदारी रही।
उन्होंने कहा कि खटीक समाज की पहचान केवल किसी एक पेशे से नहीं, बल्कि वीरता, सेवा, समर्पण और परिश्रम से है। विभाजन के दौरान पाकिस्तान से आए शरणार्थियों की सहायता में भी समाज के लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने संत कन्नप्पा नयनार सहित विभिन्न ऐतिहासिक एवं धार्मिक उदाहरणों का उल्लेख करते हुए समाज की भक्ति और समर्पण की परंपरा को रेखांकित किया।
रक्षा मंत्री ने समाज से शिक्षा और सशक्तीकरण को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने, महिलाओं और बेटियों को सशक्त बनाने तथा युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करने पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के मंत्र “शिक्षित बनो, संघर्ष करो और संगठित हो” को अपनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार गरीब और पिछड़े वर्गों के बच्चों की शिक्षा, छात्रवृत्ति, उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और रोजगार के अवसरों के लिए लगातार काम कर रही है। आर्थिक अभाव के कारण किसी बच्चे की पढ़ाई न रुके और अवसरों की कमी से कोई युवा पीछे न छूटे, सरकार का यही प्रयास है।
उत्तर प्रदेश के विकास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में तेजी से विकास हो रहा है। औद्योगिक कॉरिडोर, मेट्रो और आधुनिक बुनियादी ढांचे का विस्तार हो रहा है। ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट’ जैसी योजनाओं से स्थानीय उत्पादों को देश-दुनिया में पहचान मिल रही है।
जाति और धर्म के नाम पर विभाजन की राजनीति से बचने का आह्वान करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि किसी के भड़कावे में आकर समाज को नहीं बंटने देना है। प्रेम, सहयोग और भाईचारे की भावना मजबूत करनी होगी। उन्होंने कहा, “टूटने से बिखरेंगे और जुड़ने से निखरेंगे।” सामाजिक समरसता से शांति, शांति से समृद्धि और समृद्धि से विकास की गति तेज होगी।
कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने उनके सम्मान में भेंट किया गया चांदी का मुकुट समाज को वापस सौंपते हुए कहा कि इसे समाज की किसी गरीब बेटी के विवाह में उसकी पायल के लिए दान कर दिया जाए। उन्होंने कारगिल शहीद की वीर नारी को भी सम्मानित किया।
इस अवसर पर अखिल भारतीय खटीक समाज के पदाधिकारी, समाज के गणमान्य नागरिक, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे।
रिपोर्ट : असलम सलीमी

