हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
कानपुर। पैरों में लगातार सूजन, दर्द, भारीपन,थकान या नसों का उभरना केवल सामान्य थकान नहीं, बल्कि क्रोनिक वेनस डिजीज (सीवीडी) का संकेत हो सकता है। इस बीमारी में पैरों की नसों के वाल्व ठीक से काम नहीं कर पाते, जिससे रक्त का प्रवाह प्रभावित होता है और पैरों में रक्त जमा होने लगता है। समय पर पहचान और उपचार नहीं होने पर समस्या बढ़ सकती है।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज,कानपुर में कुछ समय पहले हुई एक क्रॉस-सेक्शनल स्टडी में 140 मरीजों को शामिल किया गया था। इनमें 70 मरीज क्रोनिक वेनस डिजीज से पीड़ित पाए गए। इस बीमारी को लेकर अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, कानपुर ने लोगों के लिए स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी की है।
अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल के कंसल्टेंट वैस्कुलर सर्जरी डॉ.अचिंत्य शर्मा के अनुसार,पैरों में बार-बार सूजन आना, खासकर दिन ढलने के साथ सूजन और भारीपन बढ़ना,दर्द,थकान, रात में पैरों में ऐंठन तथा नसों का उभरना इसके प्रमुख लक्षण हो सकते हैं। कुछ मरीजों में खुजली और त्वचा के रंग में बदलाव भी देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक लंबे समय तक खड़े रहने या लगातार बैठे रहने वाले लोगों में इसका जोखिम बढ़ सकता है। अधिक वजन और गर्भावस्था भी इसके जोखिम से जुड़े कारक हो सकते हैं। ऐसे में पैरों में लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन, दर्द या नसों में बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
चलते-फिरते रहें,वजन नियंत्रित रखें :
लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने या खड़े रहने से बचना चाहिए। काम के दौरान बीच-बीच में पैरों को चलाना और नियमित पैदल चलना उपयोगी हो सकता है। वजन नियंत्रित रखने और रोजमर्रा की शारीरिक गतिविधि बढ़ाने से भी मदद मिल सकती है। डॉक्टर की सलाह पर कंप्रेशन स्टॉकिंग्स का इस्तेमाल किया जा सकता है।
डॉप्लर जांच से होती है नसों की पड़ताल :
यदि पैरों में लगातार सूजन, दर्द, भारीपन या नसों के उभरने की शिकायत है तो विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है। डॉप्लर अल्ट्रासाउंड के जरिए नसों में रक्त के प्रवाह और वाल्व की स्थिति का आकलन किया जा सकता है। शुरुआती चरण में जीवनशैली में बदलाव और चिकित्सकीय सलाह से लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। गंभीर मामलों में विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार मिनिमली इनवेसिव प्रक्रियाओं की जरूरत पड़ सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पैरों में लंबे समय से सूजन, दर्द, भारीपन, त्वचा के रंग में बदलाव या नसों के अधिक उभरने जैसी समस्या होने पर इसे सामान्य थकान मानकर टालने के बजाय समय पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

