गीता के ज्ञान से जीवन को मिलेगी नई दिशा,श्रीकृष्ण के उपदेशों को आत्मसात करने का आह्वान




गीता परिचय अभियान,जयपुर की आगरा शाखा के दो दिवसीय सेमिनार का समापन, नवम से अठारहवें अध्याय तक हुआ पाठ एवं व्याख्यान

हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा। श्रीमद्भगवद्गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला दिव्य ज्ञान है। भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र की रणभूमि में अर्जुन को जो उपदेश दिए, उनमें मनुष्य के प्रत्येक जीवन-संघर्ष का समाधान छिपा है। कर्म करते हुए फल की चिंता न करना, अपने कर्तव्य के प्रति समर्पित रहना, मन को संयमित रखना और परमात्मा के प्रति श्रद्धा रखना ही गीता का मूल संदेश है। इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से गीता परिचय अभियान, जयपुर की आगरा शाखा द्वारा महाराजा अग्रसेन भवन, लोहामंडी में आयोजित दो दिवसीय गीता सेमिनार के द्वितीय दिवस का शुभारंभ श्रीकृष्ण भगवान के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।

द्वितीय दिवस में श्रीमद्भगवद्गीता के नवम से अठारहवें अध्याय तक विभिन्न सत्रों में आचार्यों द्वारा पाठ एवं व्याख्यान दिए गए। देश के विभिन्न स्थानों से आए साधकों ने गीता के ज्ञान को सुना और उसके संदेश को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया।

मुख्य वक्ता सुधीर यादव, जयपुर ने नवम अध्याय का वाचन करते हुए गीता के प्रभाव एवं महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि परमात्मा समग्र हैं और प्रत्येक व्यक्ति अपने भाव एवं श्रद्धा के अनुसार ईश्वर की पूजा करता है। ईश्वर की प्राप्ति के लिए श्रद्धा के साथ साधना और निरंतर अभ्यास आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि गीता में अभ्यास से श्रेष्ठ ज्ञान, ज्ञान से श्रेष्ठ ध्यान और कर्मों के फल का त्याग करने को विशेष महत्व दिया गया है। जब मनुष्य अपने कर्म को ईश्वर को समर्पित करके फल की आसक्ति से मुक्त हो जाता है, तब उसके भीतर शांति और स्थिरता का जन्म होता है।

सुधीर यादव ने कहा कि गीता का ज्ञान जीवन के संघर्षों से भागने का नहीं, बल्कि उनका सामना करते हुए सही कर्म करने का संदेश देता है। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भी युद्ध से विमुख होने के बजाय अपने कर्तव्य का पालन करने की प्रेरणा दी थी। यही संदेश आज के प्रत्येक व्यक्ति के लिए भी उतना ही प्रासंगिक है।

उन्होंने गीता के प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर कहा कि भगवान श्रीकृष्ण स्वयं गीता के ज्ञान को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की प्रेरणा देते हैं। जितने अधिक लोगों को ईश्वर का प्रिय संदेश प्राप्त होगा, उतना ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन आएगा। गीता के ज्ञान का प्रसार केवल धार्मिक कार्य नहीं, बल्कि मानव जीवन को श्रेष्ठ बनाने का अभियान है।

उन्होंने कहा कि आज तनाव, असंतोष और भागदौड़ से भरे जीवन में गीता के उपदेश मनुष्य को मानसिक शांति, आत्मविश्वास और सही निर्णय लेने की शक्ति प्रदान कर सकते हैं।

सेमिनार के विभिन्न सत्रों में आचार्य एड जानकी शर्मा ने दसवें एवं ग्यारहवें अध्याय का पाठ करते हुए भगवान की विभूतियों एवं विराट स्वरूप का वर्णन किया। मिथिलेश चौधरी ने बारहवें अध्याय का वाचन करते हुए भक्ति योग के महत्व को समझाया।

अनूप श्रीवास्तव ने सोलहवें अध्याय का पाठ किया, जिसमें दैवी एवं आसुरी संपदाओं के माध्यम से मनुष्य के आचरण एवं चरित्र की चर्चा की गई। वहीं बीएस नखलक ने सत्रहवें एवं अठारहवें अध्याय का वाचन करते हुए श्रद्धा, कर्म, त्याग, संन्यास एवं मोक्ष के मार्ग पर प्रकाश डाला।

वक्ताओं ने कहा कि श्रीकृष्ण का गीता संदेश किसी एक युग या परिस्थिति तक सीमित नहीं है। यह प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में आने वाली कठिन परिस्थितियों में धैर्य, विवेक और कर्तव्य का मार्ग दिखाता है।

सेमिनार के दौरान गीता के श्लोकों का सामूहिक पाठ भी हुआ। सैकड़ों साधकों द्वारा एक स्वर में श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का उच्चारण किए जाने से पूरा सभागार आध्यात्मिक ऊर्जा से गूंज उठा। श्लोक पाठ और संकीर्तन के बीच वातावरण भक्तिमय हो गया। प्रतिभागियों ने गीता के श्लोकों का उच्चारण करते हुए उनके संदेश को जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया।

स्वामी रामसुखदास जी की प्रेरणा से गीता प्रचार अभियान :

आयोजकों ने बताया कि स्वामी रामसुखदास जी द्वारा बताए गए गीता के प्रचार-प्रसार के महत्व को ध्यान में रखते हुए गीता परिचय अभियान, जयपुर की आगरा शाखा द्वारा निरंतर गीता प्रचार-प्रसार का कार्य किया जा रहा है। 

दो दिवसीय सेमिनार में श्रीमद्भगवद्गीता के सभी अठारह अध्यायों के माध्यम से कर्मयोग, ज्ञानयोग, भक्तियोग, ध्यान, आत्मसंयम, त्याग और मोक्ष जैसे विषयों को सरल एवं व्यावहारिक रूप में समझाया गया।सेमिनार का संचालन सेवानिवृत्त इनकम टैक्स कमिश्नर उमेश चंद्र दुबे ने किया।

इस अवसर पर आरएस गुप्ता, अंकित बंसल, पुष्पेंद्र सिंह, बीके सक्सेना, साक्षी गोपाल, श्रवण कुमार मिश्रा, पीके अग्रवाल, संजय यादव, आकाश, संजय वार्ष्णेय आदि उपस्थित रहे।