सूर्यवंश के तिलक श्रीराम के आगमन से मिथिला में उदित हुआ ऐसा सूर्य, जिसका कभी अस्त नहीं होता
केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो.एसपी सिंह बघेल बोले ! आगरा की रामबारात पूरे भारत की सबसे भव्य रामबारात
हिन्दुस्तान वार्ता। धर्मेन्द्र कुमार चौधरी
आगरा। भावना एस्टेट में आयोजित जनकपुरी महोत्सव में बुधवार की शाम भक्ति, आस्था और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। जनक मंच पर प्रभु श्रीराम माता सीता और चारों भाइयों के साथ विराजे तो पूरा परिसर राममय हो उठा। सूर्य तिलक से सुसज्जित श्रीराम का दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा। चारों ओर गूंजते जय श्रीराम के उद्घोष और भक्ति संगीत से ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो सूर्यवंश के तिलक प्रभु श्रीराम के मिथिला आगमन के साथ ही जनकपुरी में ऐसा सूर्य उदित हो गया हो, जिसका कभी अस्त नहीं होता।
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवयित्री डॉ. रुचि चतुर्वेदी की भावपूर्ण पंक्तियां “देखो अपने रामलला मिथिला आए हैं, हमारे राम आ गए हैं…” जनक मंच से गूंजीं तो श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। पूरा परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गूंजने लगा। जनक मंच पर प्रभु श्रीराम अपने अनुज लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के साथ विराजमान थे। माता सीता का स्वरूप भी मंच पर उपस्थित रहा।
राजा जनक के आंगन में हुआ राम का स्वागत :
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो.एसपी सिंह बघेल, प्रांत प्रचारक धर्मेंद्र जी, मधु बघेल, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बृज बहादुर, पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार, जनकपुरी महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष राजू यादव और स्वागत अध्यक्ष अरविंद शर्मा ने प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न एवं माता सीता के स्वरूपों का मंच पर स्वागत एवं अभिनंदन किया।
इसके बाद राजा जनक के स्वरूप अशोक कुमार गोयल और रानी सुनैना के स्वरूप लता गोयल के साथ आयोजन समिति के अध्यक्ष राजू यादव और अनीता यादव ने प्रभु श्रीराम सहित सभी स्वरूपों की विधिवत आरती उतारी। आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर प्रभु के दर्शन किए। पूरा जनक मंच जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा।
149 वर्ष पहले जली रामलीला की ज्योति आज भी आलोकित : बघेल
केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने कहा कि 149 वर्ष पहले आगरा में श्रीरामलीला महोत्सव का शुभारंभ हुआ था। तब से चली आ रही यह परंपरा आज भी निरंतर अपनी भव्यता के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने इस ऐतिहासिक परंपरा को आगे बढ़ाने वाले रामलीला कमेटी और आयोजन से जुड़े सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने सेठ कोकामल का स्मरण करते हुए कहा कि उनकी परंपरा और योगदान ने आगरा की रामलीला को विशिष्ट पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रो. बघेल ने कहा कि आगरा की ऐतिहासिक रामबारात को केवल उत्तर भारत की सबसे बड़ी रामबारात कहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह पूरे भारत की सबसे भव्य रामबारात के रूप में अपनी पहचान रखती है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन आज भी उतना ही प्रासंगिक है। श्रीराम हमें मर्यादा, कर्तव्य, त्याग, सत्य तथा परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देते हैं। वर्तमान समय में श्रीराम के आदर्शों को जीवन में उतारना और भी आवश्यक है।
जनकपुरी में जीवंत हुई जनकपुर की स्मृतियां :
भावना एस्टेट स्थित जनकपुरी महोत्सव का पूरा परिसर नेपाल के जनकपुर की स्मृतियों को जीवंत करता नजर आया। भव्य जनक मंच को महलनुमा स्वरूप दिया गया था। विशाल शंकर द्वार से प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं का स्वागत राममय वातावरण में हुआ। विद्युत सज्जा से पूरा परिसर जगमगा रहा था।
सड़कों के किनारे श्रीरामचरितमानस की चौपाइयां लिखी गई थीं। विभिन्न झांकियों में रामायण के प्रसंगों को जीवंत रूप दिया गया। चौपाइयों, झांकियों, भजनों और प्रकाश सज्जा ने पूरे परिसर को रामकथा के जीवंत मंच में बदल दिया।
सांस्कृतिक मंच पर बिखरी भारतीय कला की छटा :
जनक मंच पर जहां प्रभु श्रीराम, माता सीता और चारों भाइयों के दिव्य स्वरूपों के दर्शन हो रहे थे, वहीं सांस्कृतिक मंच पर भारतीय कला और संस्कृति की मनोहारी प्रस्तुतियां हुईं। ‘इंडिया गॉट टैलेंट’ की विशेष प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। विशेष गणेश वंदना की प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भक्तिरस से भर दिया। कलाकारों की प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने तालियों से उत्साहवर्धन किया।
दशरथ-कौशल्या के साथ मंच पर विराजे राम के चारों भाई :
जनक मंच पर प्रभु श्रीराम अपने अनुज लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के साथ विराजमान हुए। उनके साथ माता सीता का स्वरूप भी उपस्थित रहा। राजा दशरथ के स्वरूप संजय सिंघल और रानी कौशल्या के स्वरूप नीता सिंघल भी मंच पर विराजमान थीं।
प्रभु श्रीराम के मस्तक पर सुसज्जित सूर्य तिलक और दिव्य मुकुट विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। श्रीराम का स्वरूप देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो सूर्यवंश के तिलक स्वयं राम के रूप में मिथिला की धरती पर आकर जनकपुरी को अपने तेज से प्रकाशित कर रहे हों।
रुचि चतुर्वेदी की काव्य प्रस्तुति ने बांधा समां :
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवयित्री डॉ. रुचि चतुर्वेदी ने अपनी भावपूर्ण काव्य प्रस्तुति से राम के मिथिला आगमन की अनुभूति को शब्द दिए। उनकी पंक्तियों में भक्ति, वात्सल्य और राम-सीता मिलन की प्रतीक्षा का भाव दिखाई दिया। “देखो अपने रामलला मिथिला आए हैं, हमारे राम आ गए हैं…” की गूंज से श्रद्धालु भावविभोर हो गए। मंच संचालन डॉ. रुचि चतुर्वेदी और दीपक जैन ने किया।
श्रद्धालुओं की भीड़ से राममय हुआ परिसर :
जनकपुरी की सड़कों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, रोशनी से नहाया परिसर, रामचरितमानस की चौपाइयां, रामायण प्रसंगों की झांकियां और मंच पर विराजमान प्रभु श्रीराम का दिव्य स्वरूप हर किसी को आकर्षित कर रहा था। ऐसा लग रहा था मानो देवताओं ने आकाश से पुष्पों की वर्षा कर दी हो और जनकपुरी के कण-कण में केवल एक ही स्वर गूंज रहा हो-राम आ गए हैं।
ये रहे प्रमुख रूप से उपस्थित :
कार्यक्रम में जनकपुरी महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष राजू यादव के साथ अजय अवागढ़, नरेंद्र सिंह सेंगर, अशोक गुप्ता, संजय गोयल, मनोज बंसल, संतोष कटारा, धर्मेश जैन, मनोज जादौन, हितेश लवानियां, मीडिया प्रभारी राणा सुशील सिंह, अरविंद शर्मा, आकाश ग्वाला, पार्षद वेद प्रकाश गोस्वामी, सतीश ठाकुर, रोहन गुप्ता, अनुज भारद्वाज, पंकज पाठक, हेमंत जादौन, भोले चौहान, धीरज शर्मा, धीरज मंगल और रामवली यादव सहित आयोजन समिति के पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।








