जनकपुर में गूंजे वैदिक मंत्र,तुलसी-शालिग्राम विवाह में साकार हुई दिव्य मंगल बेला


पुष्पों से सजे मार्गों पर उमड़ा मिथिलावासियों का उल्लास, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुआ विवाह एवं कन्यादान; बेटी की विदाई पर भावुक हुए राजा जनक

हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा। श्री मनःकामेश्वर रामलीला महोत्सव के अंतर्गत शुक्रवार को शमशाबाद में जनकपुर के रूप में सजाई गई शिव वाटिका स्थित जनक महल में श्री तुलसी-शालिग्राम विवाह समारोह श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार, मंगल गीतों की मधुर ध्वनि और पुष्पों से सजे मार्गों ने पूरे वातावरण को दिव्य विवाहोत्सव में परिवर्तित कर दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो मिथिलानगरी में स्वयं माता सीता और प्रभु श्रीराम के विवाह की मंगल बेला साकार हो उठी हो। मिथिलावासियों ने विवाह की विभिन्न रस्मों में उत्साहपूर्वक भाग लेकर आयोजन को भव्यता प्रदान की।

शुक्रवार सुबह श्री मनःकामेश्वर मठ के श्री महंत योगेश पुरी एवं मठ प्रशासक हरिहर पुरी स्वरूपों के साथ जनक महल स्थित शिव वाटिका पहुंचे। यहां विवाह के लिए भव्य सजावट की गई थी। पुष्पों से सजे मार्गों और आकर्षक ढंग से सुसज्जित परिसर में श्रद्धालुओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विवाहोत्सव में सहभागिता की। पूरे आयोजन में मिथिलावासियों का उत्साह और भक्ति देखते ही बन रही थी।

वैदिक मंत्रों के बीच संपन्न हुआ विवाह एवं कन्यादान :

श्री महंत योगेश पुरी के संरक्षण में आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से श्री तुलसी-शालिग्राम विवाह संपन्न कराया। विवाह की विभिन्न रस्मों के साथ कन्यादान की परंपरा भी निभाई गई। मंगल गीतों और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच श्रद्धालुओं ने सनातन संस्कृति की परंपराओं का दर्शन किया। विवाह का प्रत्येक विधान भारतीय परिवार व्यवस्था, धार्मिक आस्था और संस्कारों की महत्ता को दर्शा रहा था।

बेटी की विदाई पर भावुक हुए राजा जनक :

विवाहोत्सव के दौरान बेटी की विदाई का प्रसंग भावुक कर देने वाला रहा। राजा जनक और रानी सुनयना की भूमिका में ऋषि एवं रेखा वर्मा ने माता-पिता के वात्सल्य, दायित्व और पुत्री के प्रति असीम स्नेह को जीवंत कर दिया। बेटी को विदा करने के भाव से व्याकुल राजा जनक का मार्मिक अभिनय देखकर उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। इस प्रसंग ने माता-पिता और संतान के बीच प्रेम एवं भावनात्मक संबंधों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

रामलीला मंच पर हुआ विवाह प्रसंग का मंचन :

सायंकाल रामलीला मंचन स्थल पर विवाह प्रसंग का भावपूर्ण मंचन किया गया। सीता की विदाई और बारात की अयोध्या वापसी के दृश्यों ने दर्शकों को रामकथा से भावनात्मक रूप से जोड़े रखा। कथा क्रम को आगे बढ़ाते हुए महाराज दशरथ और कैकेयी के बीच संवाद तथा कोप भवन लीला की पृष्ठभूमि तैयार की गई। आगामी घटनाक्रम की ओर बढ़ती रामकथा ने श्रद्धालुओं में उत्सुकता बनाए रखी।

प्रमुख अतिथियों ने की सहभागिता :

समारोह में केंद्रीय मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, भाजपा महानगर अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता, गौसेवा आयोग के सदस्य रमाकांत उपाध्याय, डॉ. राजेन्द्र सिंह, दिनेश राठौर और लक्ष्मी राठौर सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने धार्मिक आयोजन में सहभागिता कर रामलीला महोत्सव की परंपरा और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया। रामलीला महोत्सव के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के आदर्शों,पारिवारिक संस्कारों, त्याग, प्रेम और भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।