मेघनाद और लक्ष्मण के बीच हुआ भीषण युद्ध, संजीवनी लेकर लौटे हनुमान तो गूंजे जय श्रीराम के जयघोष
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हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा ,17 अक्टूबर। रणभूमि में शस्त्रों की टंकार, तीरों की बौछार, अधर्म के विरुद्ध धर्म की हुंकार और अनुज लक्ष्मण के प्रति प्रभु श्रीराम का असीम प्रेम। बिजलीघर स्थित रामलीला मैदान में श्री रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित उत्तर भारत की प्रमुख श्रीरामलीला में शनिवार को लक्ष्मण शक्ति की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। मेघनाद और लक्ष्मण के बीच भीषण युद्ध, शक्ति बाण लगने से लक्ष्मण के मूर्च्छित होने और उनके वियोग में प्रभु श्रीराम के करुण विलाप ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। वहीं, हनुमान जी के संजीवनी बूटी लेकर लौटने और लक्ष्मण की मूर्छा दूर होने पर पूरा रामलीला मैदान जय श्रीराम के जयघोषों से गूंज उठा।
लीला का शुभारंभ प्रभु श्रीराम द्वारा सुग्रीव और जामवंत के साथ युद्ध की रणनीति पर मंत्रणा करने से हुआ। इसके बाद उन्होंने वानर सेना को लंका पर चढ़ाई करने का आदेश दिया। वानर सेना के लंका द्वार पर पहुंचने की सूचना मिलते ही रावण ने अपने पुत्र मेघनाद को सेना सहित युद्ध के लिए भेजा। देखते ही देखते रणभूमि में राक्षसों और रीछ-वानरों के बीच घमासान छिड़ गया।
आमने-सामने आए लक्ष्मण और मेघनाद :
श्रीराम की आज्ञा पाकर लक्ष्मण रथ पर सवार होकर मेघनाद से युद्ध करने पहुंचे। दोनों महारथियों के रथ रणभूमि में तेजी से घूमते रहे और एक-दूसरे पर तीरों की बौछार करते रहे। युद्ध के रोमांचक दृश्यों के बीच गूंजते युद्धगीतों ने वातावरण में वीर रस का संचार किया। मंच से 'पापियों के नाश को, अधर्म के विनाश को, राम जी की सेना चली, राम जी की सेना चली' के स्वर गूंजे तो दर्शकों ने जयकारों के साथ उत्साह बढ़ाया। युद्ध के दौरान तीरों को लूटने के लिए दर्शक भी दौड़ते दिखाई दिए।
शक्ति बाण लगते ही व्याकुल हुए श्रीराम :
युद्ध में जब मेघनाद के अस्त्र-शस्त्र निष्फल होने लगे तो उसने लक्ष्मण पर अमोघ शक्ति बाण चला दिया। शक्ति बाण लगते ही लक्ष्मण मूर्च्छित होकर रणभूमि में गिर पड़े। उन्हें अचेत देखकर हनुमान जी तत्काल उन्हें लेकर रामदल में पहुंचे। अनुज को मूर्च्छित अवस्था में देखकर प्रभु श्रीराम व्याकुल हो उठे। लक्ष्मण के प्रति उनके अगाध स्नेह और वियोग की पीड़ा से भरे विलाप ने माहौल को करुणामय बना दिया। श्रीराम की इस मार्मिक लीला को देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गईं।
विभीषण ने श्रीराम को बताया कि लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा के लिए लंका के वैद्य सुषैन ही उपचार बता सकते हैं। इसके बाद हनुमान जी सुषैन वैद्य को लेकर आए। वैद्य ने लक्ष्मण के उपचार के लिए संजीवनी बूटी लाने की सलाह दी। इसके बाद हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने द्रोण पर्वत की ओर रवाना हो गए।
संजीवनी से लौटी लक्ष्मण की चेतना,रामदल में छाया उल्लास :
हनुमान जी संजीवनी बूटी लेकर लौटे तो लक्ष्मण के उपचार का मार्ग प्रशस्त हुआ। संजीवनी के प्रभाव से उनकी मूर्छा दूर हुई। अनुज को स्वस्थ देखकर प्रभु श्रीराम के चेहरे पर प्रसन्नता लौट आई। रामदल में उल्लास छा गया और पूरा मैदान जय श्रीराम के जयघोषों से गूंज उठा। हनुमान जी की सेवा, समर्पण और प्रभु के प्रति अनन्य भक्ति के इस प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
सुषैन वैद्य की भूमिका प्रकाशचंद तथा उनके सहयोगी की भूमिका वंश अग्रवाल ने निभाई। आरती संत शिरोमणि रविदास चैरिटेबल ट्रस्ट, भारत विकास परिषद संपर्क और अन्नपूर्णा सेवा समिति के सदस्यों द्वारा की गई।
युद्ध का संचालन :
रामलीला मैदान में युद्ध का संचालन मुकेश जौहरी, प्रवीण स्वरूप, आनंद मंगल, अंजुल बंसल, मनोज हौजरी, मोहित गोयल और राहुल गौतम आदि ने किया।
लक्ष्मण शक्ति प्रसंग पर हुआ संगीतमय सुंदरकांड :
लक्ष्मण जी को शक्ति बाण लगने के प्रसंग के उपलक्ष्य में रामलीला मैदान स्थित राम-हनुमान मंदिर पर शिब्बीमल अग्रवाल ने संगीतमय सुंदरकांड का पाठ किया। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से सुंदरकांड का श्रवण किया।
इस अवसर पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष एवं विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, महामंत्री राजीव अग्रवाल, ताराचंद, मुकेश जौहरी, भगवान दास बंसल, अंजुल बंसल, विष्णु दयाल बंसल, संजय तिवारी, राहुल गौतम, आनंद मंगल, महेश चंद्र, प्रकाश चन्द्र, रामांशु शर्मा, विकास, रामाशीष, राम, राहुल और आयुष सहित अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।


