मिथिला में गूंजी अतिथि-सत्कार की परंपरा,बढ़हार की दावत में उमड़ा आगरा

 


राजा जनक अशोक कुमार गोयल ने प्रभु श्रीराम के सम्मान में सजाई भव्य ज्यौनार, चांदी की थाल में परोसे व्यंजन; रॉयल सिम्फनी बैंड की भजनमयी प्रस्तुतियों से भावना एस्टेट रोड बनी त्रेता युग की मिथिला नगरी

हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा। श्री रामलीला महोत्सव-2026 के अंतर्गत जनकपुरी महोत्सव में गुरुवार को भावना एस्टेट रोड पर मिथिला नगरी का सजीव स्वरूप देखने को मिला। राजा जनक अशोक कुमार गोयल और रानी सुनैना लता गोयल की ओर से प्रभु श्रीराम के सम्मान में पारंपरिक ‘बढ़हार की दावत’ का आयोजन किया गया। मिथिला की परंपरा में वर के सम्मान में आयोजित होने वाली इस विशेष ज्यौनार में ऐसा प्रतीत हुआ, मानो राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता के वर रघुनंदन श्रीराम के स्वागत-सत्कार के लिए पूरे मिथिला के द्वार खोल दिए हों।

आयोजन स्थल पर भक्ति, प्रेम, उल्लास और आत्मीयता का वातावरण रहा। राजा जनक अशोक कुमार गोयल और रानी सुनैना लता गोयल ने सर्वप्रथम राजा दशरथ के स्वरूप संजय सिंघल एवं रानी कौशल्या के स्वरूप नीता सिंघल का आत्मीय स्वागत-अभिनंदन किया। इसके बाद प्रभु श्रीराम, माता सीता सहित सभी स्वरूपों की विधि-विधान से आरती उतारी गई।

मिथिला में आए राम तो सज गई ज्यौनार :

प्रभु श्रीराम के सम्मान में मिथिला परिवार की ओर से भांति-भांति के व्यंजनों से ज्यौनार सजाई गई। बढ़हार की दावत में परंपरा, प्रेम और आतिथ्य का संगम देखने को मिला। राजा जनक परिवार की ओर से प्रभु श्रीराम सहित सभी स्वरूपों को चांदी की थाल में भोजन परोसा गया। प्रभु श्रीराम को आराध्य मानकर जिस श्रद्धा और प्रेम से भोजन कराया गया, उसने आयोजन को भावुक बना दिया।

35 सदस्यीय रॉयल सिम्फनी बैंड ने बांधा भक्ति का समां :

दावत के दौरान इंडिया गॉट टैलेंट फेम छत्तीसगढ़ के रॉयल सिम्फनी बैंड के 35 सदस्यीय दल ने पूर्वी और पश्चिमी संगीत का अनूठा समावेश करते हुए रामधुनों और भजनों की प्रस्तुतियां दीं। भजनों की मधुर स्वर लहरियों, रामनाम संकीर्तन और मिथिला की साज-सज्जा ने भावना एस्टेट रोड को त्रेता युग की मिथिला नगरी का रूप दे दिया।

भजनों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए और प्रभु श्रीराम के जयकारों से परिसर गूंजता रहा। संगीत, भोजन और भक्ति के संगम ने बढ़हार की दावत को महज भोज का आयोजन न रखकर मिथिला की अतिथि-सत्कार परंपरा और राम-सीता के पावन संबंधों का उत्सव बना दिया।

वर के सम्मान में सजी जनकपुरी की भव्य ज्यौनार :

बढ़हार की दावत में शहर के वरिष्ठ समाजसेवी, व्यापारी, जनप्रतिनिधि और राजनेता भी शामिल हुए। इनमें केंद्रीय राज्य मंत्री प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल, कैबिनेट मंत्री कपिल देव अग्रवाल, राज्यसभा सांसद नवीन जैन, एमएलसी विजय शिवहरे, पूर्व सांसद राज बब्बर और जितेंद्र चौहान सहित बड़ी संख्या में गणमान्यजन उपस्थित रहे।

राजा जनक के परिवार की ओर से शोभिक गोयल, स्मृति गोयल, मोहित गोयल, रिनी गोयल, अनुप्रिया, खुश, अवंतिका, वेदा आदि उपस्थित रहे। राजा दशरथ के परिवार की ओर से रजत सिंघल, निमिषा सिंघल, आयुषी गर्ग और कृष्ण गर्ग मौजूद रहे।

रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों की सहभागिता :

श्री रामलीला कमेटी की ओर से अध्यक्ष एवं विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, महामंत्री राजीव अग्रवाल, विजय प्रकाश गोयल, रामकिशन अग्रवाल, भगवान दास बंसल, विष्णु दयाल बंसल, टीएन अग्रवाल, मुकेश जौहरी, प्रवीण गर्ग, विनोद जौहरी, संजय तिवारी, प्रवीण स्वरूप, अंजुल बंसल, राहुल गौतम, अशोक राठी, मनोज पाली, विजय कुमार गोयल, गिरधर शर्मा, रमांशु, प्रकाश अग्रवाल, राहुल शर्मा, विजय रामाशीष, संजय अग्रवाल, ऋषि गोयल, लखन गर्ग, नितिन अग्रवाल, विकास अग्रवाल, शैलेंद्र, तपिश, निक्की गोयल, राम अभिषेक शर्मा आदि उपस्थित रहे।

जनकपुरी महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष राजू यादव के साथ संतोष कटारा, मनोज बंसल, संजय गोयल, अरविंद शर्मा, अजय गर्ग अवागढ़, नरेंद्र सिंह, अशोक गुप्ता, धर्मेश जैन, मनोज जादौन, हितेश लवानिया, आकाश ग्वाला, पार्षद वेद प्रकाश गोस्वामी, सतीश ठाकुर, रोहन गुप्ता, अनुज भारद्वाज, पंकज पाठक, हेमंत जादौन, भोले चौहान, धीरज शर्मा, धीरज मंगल, रामबली यादव और राणा सुशील सिंह मौजूद रहे।

महिला समिति की ओर से अमृता पोरवाल, शिखा, रुचि, सूची, सीमा, शालिनी और शीतल ने सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन दीपक जैन ने किया।

बढ़हार की दावत में दिखी राम-सीता के संबंधों की आत्मीयता :

बढ़हार की दावत ने जनकपुरी महोत्सव की उस परंपरा को जीवंत किया, जिसमें बेटी सीता के विवाह के बाद उसके वर को केवल दामाद नहीं, बल्कि भगवान के रूप में सम्मान देने की भावना निहित है। राजा जनक की ओर से सजाई गई ज्यौनार इसी भाव की अभिव्यक्ति रही।

प्रभु श्रीराम के सम्मान में सजी बढ़हार में व्यंजनों की विविधता के साथ श्रद्धा और प्रेम का भाव प्रमुख रहा। जनकपुरी में पहुंचे लोगों ने स्वयं को मिथिला का अतिथि महसूस किया और आयोजन ने राम-सीता विवाह से जुड़ी मिथिला की पारंपरिक आतिथ्य भावना को जीवंत कर दिया।