आत्महत्या के बढ़ते मामलों का चैम्बर ने लिया संज्ञान।विश्व आत्महत्या निवारण दिवस की पूर्व संध्या पर ,किया कार्यशाला का आयोजन।



कोरोना वायरस के कारण आए मानसिक तनाव को दूर करने के लिए चैंबर करेगा कार्यशालाएं ।

कार्यशाला में डॉ नवीन गुप्ता (बिहेवियरल साइंटिस्ट एंड मैनेजमेंट कंसलटेंट - एसजीआई) ने बताये आत्महत्या के कारण एवं रोकने के टिप्स।

समाज की सजगता से रुकेंगीं आत्महत्याएं।

मानसिक तनाव ना बढ़ाये - लाएं सकारात्मक भाव।

मन के भाव साझा करने से कम होता है मानसिक तनाव, आती है सकारात्मकता।

प्रियजन के व्यवहार में परिवर्तन को न करें अनदेखा।

मन में विचार प्रभावित करता है पूरे शरीर रसायन को ,

परिवार व दोस्त हैं आत्महत्या के जिम्मेदार।

हिन्दुस्तान वार्ता।आगरा

दिनांक 9 सितंबर ,सांय 4:00 बजे, चैम्बर अध्यक्ष मनीष अग्रवाल की अध्यक्षता में विश्व आत्महत्या निवारण दिवस के अवसर पर एक वर्चुअल कार्यशाला का आयोजन किया गया , कार्यशाला का संचालन पूर्व अध्यक्ष राजीव अग्रवाल द्वारा किया गया।  आत्महत्या के मुख्य कारणों एवं उन्हें रोकने के टिप्स हिंदुस्तान इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एंड कंप्यूटर स्टडीज के निदेशक डॉ नवीन गुप्ता( बिहेवियरल साइंटिस्ट एंड मैनेजमेंट कंसल्टेंट) दिए गए। 

इस अवसर पर अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान में कोरोना महामारी के कारण आत्महत्याओं के मामले काफी बढ़ रहे हैं। यह बहुत ही गंभीर एवं चिंता का विषय है। इसलिए इन कारणों को जानने एवं आत्महत्याओं से बचने  के तरीकों को जानना बहुत ही आवश्यक है।  इस कार्यशाला  में विषय विशेषज्ञ डॉक्टर नवीन गुप्ता जानकारी प्रदान करेंगे।  हमारा मानना है  कि  यह जानकारी घर परिवार एवं समाज तथा उद्यमियों व व्यापारियों के लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध होगी ऐसी हमारी अपेक्षा है और हमें विश्वास भी  है। 

डॉक्टर नवीन गुप्ता जी ने अपने उद्बोधन में बताया कि दुनिया हर सेकंड एक मौत होती है।  कोरोना काल में लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है।  उद्योग व व्यापार में काफी नुकसान उठाये हैं। इन वेदनाओं के कारन अब धीरे धीरे मानसिक प्रभाव दिखने लगेंगे।  इनके भयंकर परिणाम आने वाले हैं।  आत्मा हत्या का मूल कारण मानसिक मुद्दे है। हाथों में जलन होना, पैरों में लड़खड़ाहट होना, किसी विशेष घटना के घटित होने की असंका या भय होना, दिल की धड़कन बढ़ना, गले में कुछ खरास अनुभव करना, साँस लेने में कठिनाई होना, मरने का भय लगना  आदि सिम्टमों में से 5 - 6 दिखने लेंगे तो  वह गंभीर समस्या का शिकार हो सकता है ऐसे में अवश्य ही किसी विशेषज्ञ से परामर्श लें। इस समस्या का निवारण या तो दवाइओं या फिर विचार परिवेर्तन से संभव है।  न्यूरोसिस का मुख्या कारण चिंता है इसका अनुबनसिकता से कोई सम्बन्ध नहीं है। दूसरा मानसिक रोगी होता है।  जिसमें रोगी अजीव /असामन्य गतिविधि करता है जैसे बार बार उसी बात को कहना, मुझे कोई समस्या नहीं है मेर घरवालों को है, तरह तरह के ख्वाव देखना, तरह तरह की आवाज सुनना, लोग पीछे पड़े हुए हैं ऐसा अनुभव करना आदि जिनका वास्तविकता से कोई सरोकार न हो।  ऐसे मरीज को मनोवैज्ञानिक के परमर्श की आवश्यकता होती है।  न्यूरोटिक को ठीक तरह से हैंडल नहीं किया जा सकता।  यह मानसिक तनाव के कारन होता है।  यह एक रबर की तरह होता है।  ऐसे मरीजों में भावनातमक रेसिस्टेन्स बढ़ाने की जरूरत होती है।  उनको चार प्रकार के विचार आते हैं - 1. जिन्हें किसी से साझा नहीं कर सकते २. तर्कहीन विचार 3. चॉपिंग स्टेटमेंट एवं 4. केमिकल लोचा।  इनसे हार्मोन्स प्रभावित होते हैं।  ऐसे मरीजों को डोपामाइन ऑफ़ हार्मोन्स ऑफ़ एक्टिवनेस की जरुरत है।   इसका उपचार सकारात्मक मनोवृत्ति लाना है।  केला, हरी सब्जियां भी इसमें लाभकारी हैं।  प्यार, प्रोत्साहन, प्रसंसा, भय दूर करना, मसाज, धूप एवं 50 से ऊपर के लोगों व्यायाम कराकर जीवित जिंदगी का अनुभव करना आदि लाभकारी है। 

कार्यशाला का सञ्चालन कर रहे राजीव गुप्ता ने बताया कि परिवार व दोस्त हैं आत्महत्या के जिम्मेदार है।  कोविड 19  के प्रकोप से आज दुनिया बहुत बड़ी त्रासदी का सामना कर रही हैं। आये दिन लोगों की जान ले रहा है।  वही दुनियाभर में एक ओर जहां विभिन्न तरह की बीमारियों से हर साल लाखों लोगों की जान जा रही हैं। वहीं, ऐसे लाखों लोग भी हैं जो किन्हीं वजहों से अपने खुद के जीवन के दुश्मन बन जाते हैं और आत्महत्या जैसा कदम उठते हैं। आत्महत्या सुनने भर से ही दिलों दिमाग में अजीब सी बैचेनी होने लगती है। जब सुबह अखबार उठाते हैं तो आत्महत्या की खबरों से दो चार होना ही पड़ता है। पुरी दुनिया में 8  लाख लोग आत्महत्या जैसा कदम उठाकर समाज की संरचना और सोच  पर नए सिरे से बहस को जन्म देते हैं। भारत देश में भी आत्महत्या के मामले बढ़ते जा रहे हैं। आत्महत्या के पीछे वे आत्मघाती व्यवहार के लिए कई व्यक्तिगत और सामाजिक कारकों जैसे तलाक, दहेज, प्रेम सम्बंध, वैवाहिक अड़चन, अनुचित गर्भधारण, विवाहेतर सम्बंध, घरेलू कलह, कर्ज, गरीबी, बेरोजगारी, गंभीर बीमारी ,आर्थिक कमजोरी , सरकारी विभागो की निष्कियता और शैक्षिक समस्या आदि प्रमुख कारण होते हैं।

हर साल 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया जाता है। इसे मनाने का मकसद आत्महत्या के विरुद्ध जागरुकता फैलाना है। यह दिवस संदेश देता है कि आत्महत्या की प्रवृत्ति को रोका जा सकता है। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस साल 2003 से मनाया जा रहा है। इस दिवस की शुरुआत आईएएसपी (इंटरनेशनल असोसिएशन ऑफ सुसाइड प्रिवेंशन) ने की थी। इस दिवस को विश्व स्वास्थ्य संगठन और मानसिक स्वास्थ्य फेडरेशन को-स्पॉन्सर करते हैं।यह डाटा बताता है कि दुनियाभर में 79 फीसदी आत्महत्या निम्न और मध्यवर्ग इनकम वाले देशों के लोग करते हैं। 

आत्महत्या वह एक सेकंड है जब विचार उत्पन्न होता है और आदमी इतना घातक कदम उठा लेता है जिस पुरुष को हम लौह पुरुष कहते हैं देखा जाए वही अंदर से कितना कमजोर होता है यह डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों से पता चलता है की महिलाओं के मुकाबले में पुरुषों की संख्या अधिक है आप इसे इस तरह से भी कह सकती हैं कि ईश्वर ने और प्रकृति ने नारी को वह क्षमता दी है जो बड़े से बड़े कष्ट को बड़े धैर्य से सामना करती है आज अगर नारी पुरुष को संबल दे तो मुझे लगता है कि पुरुष इस तरह के घातक कदम नही उठाएंगे |

चैम्बर अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने कहा कि कोरोनावायरस के कारण आए मानसिक तनाव को दूर करने के लिए चेंबर  कार्यशालाएं  करेगा।   आज करोना महामारी में अनेक लोग नौकरी जाने के, व्यापार खत्म होने के, कर्जा देने से, स्वास्थ्यसे काफी चीजों से सामान्य दिनचर्या से अलग परेशानियों का सामना किया परंतु कई चिकित्सकों मनोचिकित्सक व सामाजिक संस्थाओं द्वारा वेब पर व व्हाट्सएप पर फेसबुक पर आदमी के परेशानी में एक संभल व धैर्य दिया और यह बताया कि अगर वह अपने परिवार के साथ हंसता है बोलता है अपने दोस्तों के साथ अपनी बातें शेयर करता है और अपने शौक को को जिंदा रखता है तो वह आदमी आत्महत्या की तरफ सोच भी नहीं सकता है|  ऐसे में अगर आप बहुत गौर से देखें दुनिया के हर ग्रंथ यह लिख रहे हैं कि आपका एक अजीज दोस्त होना चाहिए वह आपकी पत्नी भी हो सकती है |आपकी बहन हो सकती है| भाई हो सकता है| आपका दोस्त हो सकता है उनके साथ अगर आप अपनी परेशानियों को शेयर करते हैं तो आत्महत्या जैसे नपुंसक कार्य करने के लिए आप कभी भी प्रेरित नहीं होंगे मैं इन्हीं शब्दों के साथ सभी मनो चिकित्सकों का और सामाजिक संगठनों का जो कि समय-समय पर इस तरीके के मनोवैज्ञानिक कार्यक्रम करती हैं ताकि आदमी स्वस्थ रहें और आत्महत्या जैसा कदम ना उठाएं आपको एक बात और बता दूं कि जो लोग शाकाहारी शुद्ध भोजन पौष्टिक भोजन करते हैं उनके मन में इस तरीके की नकारात्मक विचार नहीं आते हैं इन्हीं शब्दों के साथ मैं समस्त विश्व के नागरिकों से अपील करना चाहता हूं कि समस्या का समाधान करें और दुनिया में लाखों लोग हैं जो परेशानियों का सामना कर रहे हैं|

धन्यवाद ज्ञापन चैम्बर कोषाध्यक्ष गोपाल खण्डेवाल द्वारा किया गया। 

कार्यशाला में चैम्बर अध्यक्ष मनीष अग्रवाल उपाध्यक्ष अनिल अग्रवाल कोषाध्यक्ष गोपाल खंडेलवाल कार्यशाला के संचालक पूर्व अध्यक्ष राजीव अग्रवाल सीताराम अग्रवाल अनिल वर्मा तथा सदस्यों में संजीव गुप्ता सतीश अग्रवाल मयंक मित्तल अखिलेश चंद्र वीरेंद्र गुप्ता रवीना चोकर विश्व ट्रस्ट आज में मुख्य रूप से प्रतिभाग किया।