पशुपालन विभाग में गहराया विवाद : वरि.सहायक की पत्नी ने उनके सहकर्मी पर अभद्रता,जातिसूचक टिप्पणी और मानसिक उत्पीड़न के लगाए गंभीर आरोप

 


हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा। पशुपालन विभाग,आगरा मंडल में कार्यरत एक वरिष्ठ सहायक से जुड़े मामले ने तूल पकड़ लिया है। वरिष्ठ सहायक सुमित गोयल की पत्नी अलका गोयल ने अपर निदेशक (ग्रेड-2), पशुपालन विभाग, आगरा मंडल को विस्तृत शिकायती प्रार्थना पत्र सौंपकर विभाग के वरिष्ठ सहायक शिवेंद्र प्रताप सिंह पर अभद्र भाषा, जातिसूचक टिप्पणी,चरित्रहनन, मानसिक उत्पीड़न तथा धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के साथ ऑडियो रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध कराने का दावा किया गया है और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर कठोर कार्रवाई की मांग की गई है।

शिकायत के अनुसार,10 जुलाई 2026 को सुमित गोयल पशुपालन विभाग मिनिस्ट्रियल एम्प्लाइज एसोसिएशन के चुनाव में भाग लेने के लिए अन्य कर्मचारियों के साथ लखनऊ गए थे। आरोप है कि उसी रात करीब 11:21 बजे शिवेंद्र प्रताप सिंह ने सुमित गोयल को फोन किया। फोन पर हुई बातचीत के बाद सुमित गोयल मानसिक रूप से परेशान हो गए। अगले दिन मोबाइल कॉल डिटेल देखने पर अलका गोयल को बातचीत की रिकॉर्डिंग मिली, जिसे सुनने के बाद उन्हें कथित तौर पर पूरी घटना की जानकारी हुई।

प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि फोन वार्ता के दौरान एक महिला कर्मचारी का नाम लेकर सुमित गोयल के चरित्र पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। साथ ही अश्लील एवं अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि बातचीत के दौरान अपर निदेशक के संबंध में भी अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया।

अलका गोयल का कहना है कि उनके पति अनुसूचित जाति से हैं और उन्हें आशंका है कि जातीय भावना से प्रेरित होकर उन्हें बदनाम करने तथा किसी विवाद में फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। उनका आरोप है कि इस घटना के बाद उनके पति लगातार मानसिक तनाव में हैं और इसका असर उनके पारिवारिक जीवन पर भी पड़ा है।

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि जिस महिला कर्मचारी का नाम लेकर आरोप लगाए गए हैं, उनका भी बयान दर्ज किया जाए। साथ ही शिवेंद्र प्रताप सिंह से आरोपों के समर्थन में साक्ष्य मांगे जाएं। यदि वह आरोप सिद्ध नहीं कर पाते हैं तो उनके विरुद्ध मानहानि, मानसिक उत्पीड़न और विभागीय अनुशासनहीनता के आधार पर कठोर कार्रवाई की जाए।

प्रार्थना पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि विभाग स्तर पर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती है तो शिकायतकर्ता न्यायालय की शरण लेने को बाध्य होंगी। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि इस प्रकरण के कारण उनके वैवाहिक जीवन में किसी प्रकार का विघटन होता है तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित कर्मचारी की होगी।

इस शिकायत की प्रतिलिपि आयुक्त, जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, निदेशक (प्रशासन एवं विकास) पशुपालन विभाग, उत्तर प्रदेश तथा मुख्य पशु चिकित्साधिकारी,आगरा को भी भेजी गई है।