घर-घर से कूड़ा उठना होगा सस्ता,मिलेगी राहत.नगर निगम कार्यकारिणी में पार्षद रवि बिहारी माथुर ने रखा प्रस्ताव


                                पार्षद रवि बिहारी माथुर

हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा : महानगर की सबसे महत्वपूर्ण जरूरत सफाई है,स्थानीय निकाय के रूप में नगर निगम की यह प्राथमिक जिम्मेदारी भी है,लेकिन इसके बावजूद गंदगी से अपेक्षित निजात नहीं मिल सकी है। सौ वार्डों के पार्षदों का प्रतिनिधित्व करने वाली नगर निगम कार्यकारिणी की 1जुलाई 2025 को हुई बैठक में महानगर की सफाई व्यवस्था पर चर्चा मख्य मुद्दा मेयर श्रीमती हेमलता दिवाकर की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कार्यकारिणी के अध्यक्ष पार्षद रवि बिहारी माथुर ने डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन की मौजूदा स्थिति और कूड़ा निस्तारण के लिये  वसूले जा रहे यूजर चार्ज को आम शहरवासियों के लिये अधिक बताते हुए,मौजूदा दरों में संशोधन के लिये प्रस्ताव प्रस्तुत किया।कमोवेश कार्यकारिणी के सभी सदस्यों (पार्षद)ने मौजूदा दरों को  अधिक बताते हुये संशोधन को सामायिक बताया।

कार्यकारिणी ने सर्वसम्मति से कूड़ा निस्तारण के लिये दरों को संशोधन पर लाये गये श्री माथुर के प्रस्ताव को पारित करके नगर निगम सदन में प्रस्तुत करने की संस्तुति की।

अब कार्यकारिणी में पारित किया गया प्रस्ताव नगर निगम सदन की बैठक में प्रस्तुत किया जायेगा ,जिससे अब  कि सदन में सभी 100 पार्षदों के साथ चर्चा के बाद यूजर चार्ज में संशोधन किया जाएगा। सदन ही नई दरें तय की जाएंगी।

जब तक पार्षद नगर निगम सदन में यूजर चार्ज पर कोई फैसला लें ,तब तक यूजर चार्ज की वसूली रोक दी जाए। कार्यकारिणी ने गृहकर के अस्सिमेंट से छूटे बहुमंजिला भवनों,आवासीय कॉलोनियों से की गई वसूली संबधी रखे गये प्रस्तावों पर चर्चा कर उन्हें पारित कर दिया । 

सम्मान की जरूरत नहीं : 

नगर निगम कार्यकारिणी के अध्यक्ष रवि विहारी माथर की मौजूदा कार्यकाल की अंतिम बैठक थी।कार्यकारिणी के सदस्यों ने उन्हें जब माला पहनाकर  सम्मानित किया तो प्रत्युत्तर में श्री माथुर ने कहा कि जो संभव था किया  किंतु वह स्वयं मानते हैं कि जितना कार्य होना चाहिये था ,नहीं कर पाये। श्री माथुर ने कहा कि सदन और कार्यकारिणी नगर निगम अधिनियम के तहत गठित होते है अत:वह मानते हैं कि ऐसे में सम्मान की क्या जरूरत है। उन्होंने कहा कि उनके प्रयासों और पार्षदों के सहयोग के बावजूद कार्यकारिणी की 24 की जगह केवल 4बैठकें ही हो सकीं। यह भी सत्य है कि सभी पारित प्रस्तावों पर जमीनी स्तर पर कार्यशुरू नहीं हो सका। 

उन्होंने कहा कि अगर कार्यकारिणी की सभी बैठकें होतीं और उनमें पारित प्रस्तावों पर कार्य होता तो निश्चित रूप से आगरा के लोगों को निगम की कही अधिक प्रभावी सेवा दिया जाना संभव होता। उन्होंने कहा कि सदन और कार्यकारिणी में जब भी बैठके हो पार्षद  अनियमितताओं के विरुद्ध आवाज  उठाएं । पार्षद बद्री प्रसाद माहौर ने भी सदन और कार्यकारिणी की बैठके न होने नाराजगी जतायी।

छै नये कार्यकारिणी में होंगे शामिल :

कार्यकारिणी के मौजूदा 12 सदस्यों में से सर्वश्री रवि बिहारी माथुर सुश्री हेमलता चौहान, बद्री प्रसाद माहौर, बनवारी लाल गजेंद्र पिप्पल, हरिओम गोयल,आदि 6 पार्षद अपना दो साल का कार्यकाल पूरा करके रिटायर्ड हो गये। इनमें श्री रवि बिहारी माथुर,अध्यक्ष सुश्री हेमलता चौहान उपसभापति के पदो पर थे। 

नगर निगम कार्यकारिणी में हर दूसरे साल छै नये पार्षदों का चुनावी प्रक्रिया से चुनाव होता है,पहली बार 12 निर्वाचितों में से छै लाटरी पद्यति से निकाले जाते हैं, जबकि दो साल पूरे कर चुके पार्षदों में छ नगर निगम पार्षद व पदेन सदस्य निर्वाचित करके भेजते हैं।सामान्यत: पांच साल के लिये चुने हुए पार्षदों को एक बार कार्यकारिणी के सभी 12 सदस्यों को निर्वाचित करने का अवसर मिलता है,जबकि दो बार कार्यकारिणी से कार्यकाल पूर कर चुके सदस्यों के स्थान पर नये सदस्यों को चुनन का अवसर मिलता है। 

सफाई सर्वेक्षण,हकीकत और नागरिकों में बढती असहजता :

प्रदेश के अधिकांश स्थानीय निकायों की स्थिति संतोष जनक नहीं है।यह हकीकत उन नगर निकायों,खास कर नगर निगमों की भी है,जो भारत सरकार के स्वच्छता अभियान के तहत कागजी कसौटी पर खरे हैं। कमोवेश आगरा के स्थानीय निकाय की भी यही स्थिति है।अधिकांश नगर निकायों की कूडा निस्तारण व्यवस्था छिन्न भिन्न है।कई के तो लैंड फिल साइट तक है ही नहीं या अप्रबंधित है।

नगर निगम आगरा के क्षेत्र की सफाई व्यवस्था को लेकर जो पार्षद सक्रिय रहते हैं,उनमें भाजपा पार्षद रवि विहारी मथुर भी है।लगातार कई बार निर्वाचित होकर निगम पार्षद बनते रहे श्री माथुर मौजूदा दौर के संभवत:सबसे अधिक जानकारी रखने वालों में हैं।

वेतन घोटाला :

श्री माथुर ने सफाई की स्थिति में गुणात्मक सुधार के लिये पार्षद के रूप में मिले अधिकारों का उपयोग कर सफाई कर्मचारियों के गैंग की संख्या निगम प्रशासन से तलब की। जिसके कारण निगम प्रशासन की सुस्त अवस्था में खलल पडा़ और निगम के वरिष्ठ अधिकारी असहज हो गये जबकि निगम के स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा कहा गया कि इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।

औपचारिक जानकारी के अनुसार नगर निगम के रिकार्ड के अनुसार 4500 से ज्यादा सफाई कर्मचारी हैं,लेकिन सड़कों पर इनकी संख्या आधे से भी कम रहती है। हालांकि इनके वेतन और कचरा व्यवस्था पर आगरा नगर निगम हर साल 261.50 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है, लेकिन हर बार निरीक्षण में सफाई कर्मचारियों की असल संख्या के मुकाबले आधे भी काम करते नहीं मिले।

वैसे नगर निगम कार्यकारिणी में पार्षदों ने सफाई कर्मचारियों की संख्या का ब्योरा मांगा तो नगर स्वास्थ्य अधिकारी बता नहीं सके कि कितने सफाई गैंग और कर्मचारी नगर निगम के काम कर रहे हैं।

श्री माथुर को कार्यकारिणी में लगाये गये प्रस्ताव में जानकारी दी गई कि नगर निगम के 261 करोड़ रुपये सफाई पर हर साल खर्च हो रहे हैं। एक अन्य जानकारी में कार्यकारिणी को बताया गया कि शहर में 364 से ज्यादा सफाई कर्मचारी केवल सफाई गैंग में ही काम कर रहे हैं जो रात्रि कालीन सफाई व्यवस्था में 21 बाजारों में काम कर रहे हैं। जबकि 760 से ज्यादा के लिये वेतन जारी हो रहा है। 

श्री माथुर ने कहा है कि दो साल से हर वार्ड में काम कर रहे कर्मचारियों की सूची मांगी जा रही है,लेकिन आधिकारिक तौर पर अब तक पार्षदों को उपलब्ध नहीं करवायी जा सकी है।

261.50 करोड़ खर्च हो रहे हैं सफाई व्यवस्था पर :

100 करोड़ रुपये स्वास्थ्य विभाग के सफाई मित्रों पर खर्च, 35 करोड़ रुपये डोर टू डोर पर हुआ खर्च ,70 करोड़ रुपये इस बार का बजट डोर टू डोर कचरा उठाने को दिया जा चुका है।

नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने शहर की सफाई व्यवस्था का सच जानने के लिए अपर नगर आयुक्त शिशिर कुमार को क्षेत्र में भेजा तो सभी वार्डो में कर्मचारियों के मुकाबले आधे से कम ही डयूटी पर नजर आए। ऐसा एक दो नहीं, बल्कि पूरे 15 दिन के निरीक्षण में सभी वार्डो में नजर आया। 

वस्तु स्थिति यह है कि कागजों पर सफाई कर्मचारियों की संख्या ज्यादा है,जबकि सड़क पर सफाई करने वालों का सत्यापन करने पर इनकी संख्या आधे से भी कम रह रही है। नगर निगम इनके वेतन पर भारी भरकम रकम खर्च कर रहा है। सफाई मित्रों पर ही इस बार 80 करोड़ रुपये का बजट पास किया गया है। कुल मिलाकर साल भर में 261.50 करोड़ रुपये सफाई के नाम पर खर्च किए जा रहे हैं।

श्री माथुर का कहना है कि गैंग में 364 कर्मचारी ही काम कर रहे हैं,जबकि कागजों पर इन्हें 760 से ज्यादा दिखाकर 400 कर्मचारियों के वेतन का घोटाला किया जा रहा है।

10-10 कर्मचारी पार्षदों को नहीं दिये जा सके :

नगर निगम के अधिवेशन में पार्षद रवि माथुर ने शहर के सभी 100 वाड़ों में 10-10 सफाई कर्मचारी पार्षदों को देने के लिए प्रस्ताव रखा था,जो मंजूर कर लिया गया। सफाई कर्मचारियों की भर्ती के लिए 15 दिनों में पारदर्शी प्रक्रिया के लिए कमेटी का गठन किया जाना था, लेकिन यह भी नहीं हो सका। पार्षद रवि माथुर के मुताबिक अगर 10-10 कर्मचारी हर पार्षद को दे दिए जाते तो जलभराव और कचरे की समस्या न झेलनी पड़ती। हर बार निरीक्षण में हर वार्ड में 10 से 20 कर्मचारी अनुपस्थित मिलते हैं। यह केवल कागजों पर ही काम कर रहे है। पार्षद बंटी माहौर ने आरोप लगाया कि सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति में धांधली चल रही है। राहुल, मेयर को रिशोदार बताने वाला ऑडियो वायरल हुआ था.इसकी जांच ही नहीं कराई गई। इसकी सत्यता की पुष्टि होनी चाहिए। सफाई कर्मचारियों के नाम पर धांधली चल रही है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी के खिलाफ जाच की जाए।

रिपोर्ट - राजीव सक्सेना