सरकार द्वारा श्रम नियमावली को किया गया है 04 कोड में वर्गीकृत।
सरकार द्वारा 4 कोड प्रथम मजदूरी संहिता-2019, दूसरा औद्योगिक संबंध संहिता-2020,तीसरा सामाजिक सुरक्षा सहिता-2020,चतुर्थ उपजीविका सुरक्षा,स्वास्थ्य और कार्य दशा संहिता-2020
उ0प्र0 भवन एवं अन्य सन्ननिर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को अनेकों हितकारी योजनाएं हैं लागू
हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा : चैम्बर सभागार में चैम्बर अध्यक्ष संजय गोयल की अध्यक्षता में पूर्व अध्यक्ष एवं श्रम कल्यान प्रकोष्ठ के चेयरमैन श्रीकिशन गोयल के नेतृत्व में उपश्रमायुक्त आगरा मंडल सियाराम, सहायक श्रम आयुक्त शगुन ओमर, श्रम प्रर्वतन अधिकारी अनिल दिवाकर, विजय शंकर तिवारी, राजेश द्विवेदी, एस.के. सिन्हा, संजय शुक्ला, सहायक निदेशक कारखाना टीना भाटिया के साथ बैठक आयोजित की गयी, जिसमें श्रम कल्याण प्रकोष्ठ के चेयरमैन श्रीकिशन गोयल द्वारा 12 सूत्रीय प्रतिवेदन दिया गया।
चैम्बर अध्यक्ष संजय गोयल द्वारा अवगत कराया गया कि किसी भी उद्योग में बाल श्रमिक होने की सूचना प्राप्त होने पर उस बालश्रमिक का जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल प्रमाणपत्र से आयु सत्यापन होने तक कारखाने स्वामी के प्रति कोई उत्पीड़नात्मक कार्यवाही नहीं होनी चाहिए। कुछ ट्रेड यूनियन द्वारा मात्र मिथ्या शिकायत करने भर से ही बाल श्रम उन्मूलन अधिनियम के अंतर्गत कार्यवाही किया जाना उचित नहीं है। यह भी जानकारी में आया है कि कारखाने में बाल श्रमिक होने की जांच हेतु एनजीओ कारखानों में जाते हैं। जबकि एनजीओ को कारखानों में जाने का कोई औचित्य नहीं है। उपश्रमायुक्त ने बताया कि विभाग द्वारा सत्यापन करने पर आपके द्वारा बच्चे के आयु संबन्धित दस्तावेज प्रस्तुत करने पर विभाग द्वारा कोई भी कार्यवाही नहीं की जाती है।
उपश्रमायुक्त द्वारा बताया गया कि श्रम विभाग उ0प्र0 के तत्वाधान में उ0प्र0 भवन एवं अन्य सन्ननिर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को मात्त्व शिशु एवं बालिका मदद योजना, संत रविदास शिक्षा प्रोत्साहन योजना, अटल आवासीय विद्यालय योजना, कौशल विकास तकनीकी उन्नयन एवं प्रमाणन योजना, कन्या विवाह सहायता योजना, आपदा राहत साहयता योजना, महात्मा गांधी पेशन योजना, गंभीर बीमारी सहायता योजना व निर्माण कामगार मृत्यु व दिव्यंगता सहायता योजना की विस्तृत जानकारी दी।
उपश्रमायुक्त द्वारा नये श्रम काननों के परिवर्तन के संबंध में बताया कि सरकार द्वारा 4 कोड प्रथम मजदूरी संहिता-2019, दूसरा औद्योगिक संबंध संहिता-2020, तीसरा सामाजिक सुरक्षा सहिता-2020, चतुर्थ उपजीविका सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशा संहिता-2020 बनाये गये हैं जिस पर अभी कार्य किया जा रहा है के बारे में जानकारी दी गयी।
श्रम कल्यान प्रकोष्ठ के चेयरमैन श्रीकिशन गोयल ने कहा कि तथाकथित श्रमिक संगठनों द्वारा निजी स्वार्थ के लिए अधिकांशतः फर्जी शिकायत की जाती हैं। इस संबंध में हमारा निवेदन यह है कि जब तक कोई ठोस साक्ष्य न हो तब तक इस प्रकार की फर्जी शिकायतों पर कोई संज्ञान न लिया जाए। क्योंकि इस प्रकार की फर्जी शिकायतों का संज्ञान लेने पर उस षिकायत की आड़ में निरीक्षक द्वारा शिकायत से हटकर भी विभिन्न प्रकार की जांचों की मांग की जाती है, जिससे नियोक्ताओं को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है और उनका अनावष्यक रूप से उत्पीड़न होता है। समस्त यूनियनों की पंजीकरण की जांच हो कि यूनियन पंजीकृत है अथवा अपंजीकृत। अपंजीकृत यूनियनों के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही की जाये जिससे उद्यमियों का उत्पीड़न व उद्योगों में कार्य प्रभावित न हो। पोर्टल पर प्राप्त शिकायत के निवारण हेतु निरीक्षकों को कड़े निर्देश दिए जाएं कि जांच केवल प्राप्त शिकायत तक ही सीमित रखी जाए। उस शिकायत की आड़ में अन्य जांचों की मांग न की जाए। इससे सेवायोजकों के ऊपर उत्पीड़नात्मक दवाव बनता है जिससे श्रमिकों में नकारात्मक संदेश के कारण सेवायोजको के प्रति अनुशासनहीनता की संभावना बढ़ जाती है। परिणाम स्वरूप कारखानों में कार्य प्रभावित होता है। इस पर उपश्रमायुक्त सियाराम जी ने बताया कि इस तरह की शिकायतों का निस्तारण वार्ता के दारा हल करने का प्रयास किया जाता है। प्रत्येक वर्ग में न्यूनतम वेतन पुनरीक्षित होने से 15 दिन पूर्व चैम्बर को सूचना मिलनी चाहिए जिससे कि चैम्बर उस पुनरीक्षित न्यूनतम वेतन के संबंध में अपने सदस्यों को सूचित कर सकें। इस सम्बन्ध में सकारात्मक कार्यवाही करने का आश्वासन दिया गया। श्रम प्रवर्तन अधिकारियों के नामों की क्षेत्रवार सूची चेंबर को उपलब्ध कराई जाए ताकि चैम्बर अपने सदस्यों को सूचना दे सके और सदस्य अपनी समस्याओं के संबंध में उनसे संपर्क कर सके। क्षेत्रवार सूची में कोई परिवर्तन होने की सूचना भी चैम्बर को समय समय पर उपलब्ध कराई जाए। इस संबंध में अवगत कराया कि 8 श्रम प्रर्वतन अधिकारी है जिसकी सूची उपलब्ध करा दी जायेगी। कर्मचारियों के हित लाभ से संबंधित योजनाओं के बारे में बताया कि केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा श्रमिकों के लिये विभिन्न योजनाएं चलायी जा रही हैं जिसका प्रचार-प्रसार जागरूकता कार्यक्रमाके के माध्यमों से किया जा रहा है।
भवन एवं अन्य सनिर्माण कर्मकार अधिनियम के अन्तगर्त देय उपकर के सम्बन्ध में श्रम प्रवर्तन अधिकारियों द्वारा निर्माण स्थल पर जाँच की जाती है और भवन स्वामी की अनुपस्थिति में अन्य अधिनियमों की भी जाँच कर, न्यूनतम वेतन अधिनियम व अन्य अधिनियमों के अन्तर्गत उनके विरुद्ध वाद दायर किये जाते हैं जिससे उनका उत्पीड़न होता है, अतः ऐसी स्थिति में जाँच केवल देय उपकर तक ही सीमित की जायें और यदि अन्य अधिनियमों में भी जाँच आवष्यक हो तो उस भवन स्वामी की उपस्थिति में किया जाये जिसमें अनावष्यक विवाद उत्पन्न न हो और भवन स्वामियों का उत्पीड़न न हो। इस संबंध में उपश्रमायुक्त महोदय द्वारा सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन दिया गया।
बैठक में चैम्बर अध्यक्ष संजय गोयल, पूर्व अध्यक्ष एंव श्रम कल्यान प्रकोष्ठ के चेयरमैन श्रीकिशन गोयल, पूर्व अध्यक्ष सीताराम अग्रवाल, अमर मित्तल, अशोक कुमार गोयल, मुकेश अग्रवाल, राजीव अग्रवाल, सदस्य राजेन्द्र कुमार अग्रवाल, मनोज कुमार गुप्ता, गिरीश चंद गोयल, सुशील, मयंक मित्तल, सचिन सारास्वत, सुधीर गुप्ता, अम्बा प्रसाद गर्ग, रविशंकर अग्रवाल, विजय कुमार गुप्ता, अखिल कुमार गर्ग, अनिल कुमार गोयल, मनोज कुमार रस्तोगी आदि उपस्थित थे।

