हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा : 7 जनवरी,नागरी प्रचारिणी सभागार में हिंदी साहित्य सभा द्वारा पं.प्रताप दीक्षित जी की जयंती का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार स्व.पं.प्रताप दीक्षित जी के चित्र का अनावरण प्रमुख उद्यमी चिंतक विश्लेषक पूरन डावर के कर कमलों द्वारा किया गया। मुख्य अतिथि पूरन डावर,विशिष्ट अतिथि महेन्द्र सिंह गोयल,सुभाष ढल,यादराम कवि किंकर डॉ.अशोक शिरोमणि ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।
साहित्य सभा के अध्यक्ष अरुण रावत,महासचिव डॉ.राजकुमार रंजन,उपाध्यक्ष राजेश दीक्षित, सचिव अरविंद समीर एवं मीडिया प्रभारी डॉ.कृष्ण कुमार सिंह ने सभी अतिथियों का शॉल उड़ाकर,प्रतीक चिन्ह तथा माल्यार्पण कर स्वागत किया।
मुख्य अतिथि पूरन डाबर ने अपने सम्बोधन में कहा कि मेरा सौभाग्य है कि मेरे हाथों देश के मूर्ध्य साहित्यकार पं.प्रताप दीक्षित जी के चित्र का अनावरण हुआ। आगे आने वाली पीढ़ी उनके चित्र को देखकर साहित्य के प्रति आकर्षित होगी। वहीं वरिष्ठ एडवोकेट एवं समाजसेवी महेंद्र सिंह गोयल ने उन्हें व्यंग्य का सर्वाधिक लोकप्रिय कवि बताया। सुभाष ढल से कहा कि वे जन जन के कवि थे जिनको सुनने का हमें सौभाग्य प्राप्त हुआ। डॉ.अशोक शिरोमणि ने उन्हें याद करते हुए कहा कि उनकी सादगी कविता के प्रति अनवरत लगाव सबको प्रेरणा देता है। वहीं यादराम कवि किंकर ने उन्हें महान कवि बताया।
द्वितीय सत्र में कवि सम्मेलन हुआ,जिसमें वरिष्ठ कवि रामेंद्र त्रिपाठी जिन्होंने पढ़ा - ये कथा अनंत है फसंत ही फसंत है ,शीलेन्द्र वशिष्ठ ने सरस्वती वंदना की,शिव सागर शर्मा ने गीत सुनाया- दो बाहें शाहजहाँ की है दो बहिया है मुमताज की , रमेश पंडित, दिनेश संन्यासी,अरविन्द समीर ने पढ़ा - रात गहराई अगर है तो पता चलता है जान जब तक है हरेक लम्हा नया चलता है। डॉ ब्रज बिहारी लाल बिरजू, डॉ राघवेन्द्र शर्मा ,रजिया बेगम जिया धौलपुर ने गीत ने समाँ बाँधा- मनवा लागा जुड़ता धागा तम है भागा ओ मितवा ! डॉ सुषमा सिंह, रमा वर्मा श्याम डॉ त्रिमोहन तरल, डॉ यशोयश, अलकाअग्रवाल, कुमार ललित, दिनेश अगरिया आदि ने अपनी धारदार कविताओं से उपस्थित श्रोताओं का मन मोह लिया, इस अवसर पर शंकर देव तिवारी, ओम ठाकुर,हिन्दुस्तान वार्ता के स्टेट हैड धर्मेन्द्र कुमार चौधरी,वीरेन्द्र गोस्वामी,फ़ोटो जर्नलिस्ट यतीश लवानिया आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।




