बीती यादें : पर्ची पर लिखे शब्दों से पिघल गई थीं आशा भोसले



हिन्दुस्तान वार्ता। ✍️ आदर्श नंदन गुप्ता

आगरा : 23 जनवरी 2005 की बात है। हमें एक मित्र से पता चला कि सुर साम्राज्ञी आशा भोसले जी किसी कार्यक्रम से लौटते हुए होटल ताजव्यू में रुकी हुई हैं। कुछ समय ही उनका प्रवास रहेगा। मैं होटल पहुंचा। मैं और कुमार ललित होटल पहुंचे और किसी तरह मैंने जुगाड़ बनाई तो उनका रूम नंबर पता  चला गया। फोन मिलाया तो आशाजी के पीए ने उठाया। वह होटल की लाबी में आया और कह दिया कि आईजी,डीआईजी, कमिश्नर साहब के भी फोन आ रहे हैं, लेकिन आशाजी किसी से नहीं मिल रहीं। वे रियाज कर रही हैं।

 इतनी बड़ी शख्सियत से बिना मिले और बिना इंटरव्यू लिए लौटने पर मैं निराश हो रहा था। तभी मैंने उनके पीए से कहा कि तुम बस मेरी एक पर्ची उन्हें दे देना। मना करती हैं तो लौट जाएंगे। मैंने बहुत ही विनम्रता के साथ लिखा कि मुझे 15 साल अनवरत सांस्कृतिक पत्रकारिता करते हुए हो गए। मेरे सामने पहली बार प्रेम की इस नगरी में आपका पदार्पण हुआ है। अब फिर न जाने कब आना होगा। आज आपके दर्शन न हुए तो मेरी 15 साल की पत्रकारिता की साधना अधूरी रह जाएगी। बस पांच मिनट का समय दे दी दीजिए।

पीए ने पर्ची उन्हें दी,कुछ ही मिनट बाद बुलावा आ गया। पीए ने सख्त हिदायत दी कि पांच मिनट से ज्यादा समय मत लेना। हमने स्वीकरोक्ति में हां कह दी और पहुंच गए उनके कक्ष में। हम दोनों ने उनके चरण स्पर्श किए। बातचीत शुरू की। फिल्मों से संबंधित बहुत सारी बातें हुई। वर्ष 1957 में रिलीज हुआ “आगरा रोड” फिल्म की चर्चा की। उसमें उन्होंने गीत गाया है- “सुनो सुनाएं तो तुम्हें एक छोटी सी कहानी”। हमारे व्यवहार से तो वे अपनी जैसी ही हो गईं। पांच मिनट से जब 20 मिनट हो गए तो पीए आंख से इशारा करे, लेकिन वे तो अपने घर, परिवार की बातें भी करने लगीं थीं। मुझे आश्चर्य हुआ कि इतनी बड़ी शख्सियत और हमें इतना स्नेह दे रही हैं। हम दोनों ने आधा घंटे से अधिक बातें कीं, फिर भी न उनका मन भरा, न हमारा, लेकिन हम उनकी व्यस्तता और एक-एक पल की कीमत जानते थे। उन्हें फिर से चरण स्पर्श कर वापस आ गए। 

मुझे गर्व हो रहा था उस पर्ची पर लिखे शब्दों पर जिसने इतने गौरवाशाली पलों को उपलब्ध कराया। मुलाकात हुए एक लंबा समय बीत गया। आज जब उनके निधन के समाचार से मन आहत हुआ। उन्होंने अपने जीवन में जो किया, वैसा शायद ही कोई कर पाए। मैं उन्हें अपनी भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

लेखक - वरिष्ठ पत्रकार हैं।