युद्ध विराम ! बड़ी राहत की ख़बर



हिन्दुस्तान वार्ता। ✍️ पूरन डावर 'चिंतक एवं विश्लेषक'

युद्ध विराम बड़ी राहत की ख़बर है। यद्यपि युद्ध समाप्त नहीं हुआ है।दो सप्ताह के लिये युद्ध विराम किया गया,ताकि त़ीनो देश वास्तविक समस्याओं को समझकर किसी समझौते पर इस युद्ध के मूल कारण का कोई हल निकाल सकें। आमतौर पर अमेरिका प्रेसिडेंट ट्रम्प की कार्य शैली विशेष तौर और बढ़बोलेपन के कारण भारत सहित विश्व अमेरिका का समर्थन नहीं कर पा रहा है। उनके दोस्त भ़ी दूरी बनाये हुए है और चुप्पी साधे हुए हैं। यद्यपि अमेरिका और इजराइल ने ईरान की सामरिक शक्ति की कमर तोड़ दी है।

अमेरिका और इजराइल पर जो जेहादी खतरा था,उसे काफी कुछ कम कर दिया है और 10-20 साल तक ईरान इनके लिए ख़तरा नहीं बन सकता। जेहादी इस्लामिक सरकार के सारे आकाओ को पहले दिन ही मार गिराया। अब अमेरिका का पूरा मिशन रहेगा, ईरान की अगली सरकार अमेरिका समर्थक हो और जेहादी मानसिकता से बाहर निकले । 

मैं अमेरिका के इस आक्रमण को युद्ध नहीं ऑपरेशन मानता हूूँ। जैसे भारत का 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को समाप्त करना मात्र था,यह युद्ध नहीं था। पाकिस्तान ने जितना इस ऑपरेशन का विरोध किया था,शक्ति प्रदर्शन किया,उसका उतना ही जवाब दिया गया। पाकिस्तान ने विरोध रोक दिया तो ऑपरेशन पूरा हो गया। यही लक्ष्य अमेरिका का था। अमेरिका विरोधी इस्लामिक सरकार को हटाकर,चुनी हुई राजनैतिक सरकार स्थापित करना और तेल को केवल डॉलर में बेचना,युवान को रोकना और चीन पर चोट।

इजराइल का उद्देश्य ईरान की सामरिक शक्ति को रोकना। हिज्बुल्ला,हूती और हमास जैसे आतंकी संगठनों की पूरी तरह कमर तोड़ना था। जिसमें काफी कुछ वह सफल रहा। बाकी समय बताया कि ईरान का जवाब कितना कारगर था,या नूरा कुश्ती, क्योंकि ईरान  द्वारा 40 दिनों तक चलाई जा रही हजारों मिसाइलें मात्र 15-20 दिन जाने इजराइल में और और 15- 20 दिन ही कुल मिलाकर सारे खाड़ी देशों सऊदी,कतर,यूएई,ओमान में और कोई बड़ी हानि नहीं दिखाई देती।

समस्या यह है कि मूल मुद्दे अभी बाकी हैं। इसराइल के अस्तित्व को ईरान द्वारा नकारना, उसे नष्ट करने की मानसिकता से ईरान को पीछे हटना ही होगा। इसराइल अभी भी आशंकित है और उसने लेबनान में हिजबुल्ला, हूती के ठिकानों पर लगातार हमले को युद्ध विराम से दूर रखा है, और इजरायल के यह हमले जारी रहेंगे।

मुख्य मुद्दे इजराइल को अपनी सुरक्षा हेतु ईरान को परमाणु रहित रखना है। इस पर इजरायल कोई समझौता नहीं कर सकता। अमेरिका तेल बिना डॉलर के कोई समझौता नहीं कर सकता। ये आने वाले दो हफ्ते बताएंगे।अमेरिका और इजराइल को इस ऑपरेशन से क्या मिला। ईरान बहुत कुछ खो चुका है उसे उबरना आसान नहीं, उसके पास एक ही रास्ता है कि अमेरिका के साथ मिलकर ईरान का पुनरूत्थान करे,ये वॉयस संकेत ट्रम्प ने दिए हैं।

बाकी इस युद्ध में जीत हार के दावे बेमानी हैं। अमेरिका एग्जिट रुट देख रहा है,अमेरिका की मजबूरी थी। यह हास्यास्पद है कि उसके लिए यह ऑपरेशन मात्र था,जो कई मायनों में पूरा हो चुका है। ट्रंप की कार्यशैली अमेरिका को हारा हुआ दिखाती है क्योंकि उनके बड़बोलेपन ने विश्व के अनेक देशों को दूर किया है,ऐसा प्रतीत होता है।