हिन्दू पंचांग का आधार विक्रम संवत्,जिसकी शुरुआत सम्राट विक्रमादित्य ने की


हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

छतरपुर। महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के भूगर्भ शास्त्र अध्ययन शाला में 15 अप्रैल को ‘सम्राट विक्रमादित्य ज्ञान प्रतियोगिता’ का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विभागाध्यक्ष प्रो.पी.के.जैन के निर्देशन में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को भारत के महान सम्राट विक्रमादित्य के जीवन, व्यक्तित्व एवं उनके ऐतिहासिक योगदानों से अवगत कराना था।

इस अवसर पर अतिथि विद्वान आशी जैन एवं मुमताज मंसूरी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए बताया कि विक्रमादित्य प्राचीन भारत के एक महान,न्यायप्रिय और पराक्रमी शासक माने जाते हैं। उनका शासन उज्जैन (वर्तमान मध्य प्रदेश) से जुड़ा हुआ माना जाता है।

उन्होंने बताया कि सम्राट विक्रमादित्य का सबसे महत्वपूर्ण योगदान विक्रम संवत् की स्थापना है, जिसकी शुरुआत 57 ईसा पूर्व से मानी जाती है। यह संवत आज भी भारत और नेपाल में धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यों में प्रचलित है।

हिन्दू पंचांग का निर्माण भी विक्रम संवत् के आधार पर किया जाता है, जिसमें चंद्रमा और सूर्य की गति के अनुसार समय की गणना की जाती है। तिथि, मास, पक्ष और ऋतु की गणना इसी प्रणाली के अनुसार निर्धारित होती है।

वक्ताओं ने कहा कि विक्रमादित्य ने न केवल एक आदर्श शासन व्यवस्था स्थापित की, बल्कि भारतीय समय गणना प्रणाली को भी स्थिरता प्रदान की। आज भी विक्रम संवत् उनकी महान विरासत का प्रमुख प्रतीक है।

कार्यक्रम में आशी जैन, मुमताज मंसूरी, आशिया बानो, गुट्टी लाल कुशवाहा सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।