हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा। 10 अप्रेल,होम्योपैथी के जनक डॉ.सैमुअल हैनीमैन के 271वें जन्मदिवस को विश्व होम्योपैथी दिवस के रूप में उत्साह पूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर प्रो.( डॉ.) सारस्वत होम्योपैथिक क्लीनिक एंड रिसर्च सेंटर पर एक विशेष कार्यक्रम एवं चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में प्रोफेसर (डॉ.) कैलाश चंद्र सारस्वत ने बताया कि होम्योपैथिक दवाइयों से ऑटोइम्यून डिसऑर्डर, पथरी, अस्थमा, एलर्जी, जोड़ों का दर्द एवं नपुंसकता जैसे रोगों में सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह चिकित्सा पद्धति धीरे-धीरे लोगों के बीच विश्वास मजबूत कर रही है।
युवा चिकित्सक डॉ.श्रेय सारस्वत ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि कोरोना काल में होम्योपैथी चिकित्सा एक वरदान साबित हुई। महामारी के बाद इस पद्धति की वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि होम्योपैथिक दवाएं जटिल एवं गंभीर रोगों में भी प्रभावी सिद्ध हो रही हैं,यह चिकित्सा पद्धति नैनो टेक्नोलॉजी पर आधारित आधुनिक प्रणाली है,जो इसे और अधिक उपयोगी बनाती है।
इस अवसर पर आयोजित चिकित्सा शिविर में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और निःशुल्क परामर्श एवं दवाइयों का लाभ उठाया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने डॉ. हैनीमैन को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम में प्रो. (डॉ.) कैलाश चंद्र सारस्वत, डॉ. श्रेय सारस्वत, डॉ. रूचि सारस्वत, गीता सारस्वत, डॉ. अजीत शर्मा, डॉ. अमित शर्मा एवं मुकेश शर्मा आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।


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