अराजक तत्व : समाज का माहौल बिगाड़ने के स्वयंभू ठेकेदार : डा० मधु भारद्वाज

हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

समाज में कुछ लोग ऐसे होते हैं,अधिक उत्साही होने के लिए वे किसी भी परम्परा, त्योहार और माहौल की फिजा खराब करने में अग्रणी रहते हैं। वे किसी भी धर्म या जाति विशेष से नहीं जुड़े होते। उनका कार्य बस फिजा खराब करने का होता है। इन ठेकेदारों की कार्यशैली अत्यन्त व्यवस्थित होती है, पहले समस्या तैयार करते हैं, फिर उसे बढ़ाते हैं और फिर खड़े होकर तमाशा देखते हैं। यदि कोई भी कार्यक्रम शांतिपूर्ण हो, तो उन्हें बेचैनी होने लगती है।

इन अराजक तत्वों की सबसे बड़ी पूँजी होती है,लोगों की भावनाएँ। ये धर्म, जाति, भाषा और क्षेत्र जैसे संवेदनशील मुद्दों को अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करते हैं। भावनाओं को भड़काना इनके लिए एक कला है और आपस में बाँटना इनका व्यवसाय है। डा०भीमराव अम्बेडकर की जयन्ती पर निकाली गई बाइक रैली में शामिल अराजक तत्व आवास विकास कॉलोनी क्षेत्र में भगवान परशुराम चौक पर जूते-चप्पल पहनकर चढ़े, भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान महर्षि परशुराम के झंडों को उतार फेंका, नारेबाजी की और नीले झंडे लगाए, फोटो एवं वीडियो शूट करवाया। अराजक तत्वों ने न केवल भगवान महर्षि परशुराम के उपासकों की आस्था को ठेस पहुँचाई, बल्कि संविधान निर्माता डा० भीमराव अम्बेडकर के आदर्शों को भी तार-तार कर दिया।

शहर की फिजा खराब करने के लिए इतनी ही चिंगारी चाहिए। बड़े-बड़े विवादों के पीछे यही छोटी-छोटी चिंगारियाँ होती हैं, जो बाद में आग का रूप लेकर पूरे शहर को अपनी चपेट में ले लेती हैं।ऐसे अराजक तत्वों से प्रशासन को सख्ती से निपटना चाहिए,जिससे कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।