हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा। पशुपालन विभाग में 25 लाख रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता और गबन के मामले में “दीवा” संघ के अध्यक्ष डॉ. सतीश चन्द शर्मा ने जांच समिति के अध्यक्ष एवं अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) को विस्तृत शिकायत पत्र सौंपते हुए कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर संगठित वित्तीय अपराध के गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में तत्कालीन एवं वर्तमान मुख्य पशुचिकित्साधिकारी समेत कई अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।
डॉ. शर्मा ने आरोप लगाया कि तत्कालीन मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ. जयन्त यादव ने 17 सितंबर 2024 को कार्यभार छोड़ने के बाद भी अपनी डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) का उपयोग करते हुए 18 सितंबर 2024 को 25 लाख रुपये के बिलों पर हस्ताक्षर कर भुगतान कराया, जबकि उस समय उनके पास वित्तीय अधिकार नहीं थे। शिकायतकर्ता के अनुसार इस तथ्य की पुष्टि अपर निदेशक (पशुपालन) एवं वर्तमान मुख्य पशुचिकित्साधिकारी द्वारा जारी पत्रों में भी की गई है।
शिकायत में वर्तमान मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. डी.के. पाण्डे पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि उन्होंने पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद बिलों को सत्यापित किया, कैशबुक और रिकन्सीलेशन शीट पर हस्ताक्षर किए तथा शासन-प्रशासन को अनियमितताओं की सूचना नहीं दी। शिकायतकर्ता ने इसे दोनों अधिकारियों के बीच “दुरभि-संधि” करार दिया है।
मामले में दिवंगत सहायक लेखाकार स्व. ज्ञानेन्द्र भारद्वाज के मृत्यु पूर्व दिए गए लिखित बयान को भी महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया गया है। शिकायत के अनुसार उन्होंने अपने बयान में स्वीकार किया था कि डॉ. डी.के.पाण्डे की सहमति से ही डॉ.जयन्त यादव द्वारा बिलों पर हस्ताक्षर किए गए।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि बिना जिला क्रय समिति गठित किए 25 लाख रुपये की खरीद दर्शाई गई, जबकि शासनादेश के अनुसार जिलाधिकारी द्वारा नामित अधिकारी से भौतिक सत्यापन अनिवार्य था। आरोप है कि न तो सामान का सत्यापन हुआ और न ही वितरण के रिकॉर्ड उपलब्ध हैं।
डॉ. शर्मा ने केंद्रीय भंडार से जुड़े अधिकारियों, कैशियर, वरिष्ठ एवं प्रधान सहायकों तथा अपर निदेशक (पशुपालन) पर भी मिलीभगत और संरक्षण देने के आरोप लगाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि पूरे मामले में शासनादेशों का उल्लंघन किया गया तथा फर्जी तरीके से खरीद और भुगतान दर्शाया गया।
शिकायतकर्ता ने जांच समिति से 10 प्रमुख बिंदुओं पर निष्पक्ष एवं बिंदुवार जांच कराने की मांग की है। साथ ही यह भी अनुरोध किया है कि मण्डलायुक्त के आदेश पर गठित जांच समिति द्वारा स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए तथा अन्य मामलों को इसमें जोड़कर जांच प्रभावित न की जाए।
डॉ. सतीश चन्द शर्मा ने कहा कि दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों की संलिप्तता उजागर कर सरकारी धन एवं निराश्रित गौवंश के अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए।

