हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा। वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता के.सी. जैन ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर लीज डीड (किरायेदारी अनुबंध) पर स्टाम्प शुल्क में दी गई छूट की अवधि बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा 19 नवम्बर 2025 को जारी अधिसूचना के तहत छह माह के लिए दी गई यह छूट 18 मई 2026 को समाप्त हो रही है, जबकि यह योजना आम जनता, व्यापारियों, उद्योगों एवं किरायेदारों के लिए बेहद लाभकारी साबित हुई है।
अधिवक्ता जैन ने कहा कि स्टाम्प शुल्क में राहत मिलने के बाद बड़ी संख्या में लोग अपनी लीज डीड्स का पंजीकरण कराने के लिए आगे आए हैं। पहले अधिक स्टाम्प शुल्क के कारण कई लोग लिखित एवं पंजीकृत अनुबंध नहीं करा पाते थे, जिससे मकान मालिक और किरायेदार के बीच विवाद तथा मुकदमेबाजी की स्थिति उत्पन्न होती थी। अब पंजीकृत लीज डीड होने से दोनों पक्षों की शर्तें स्पष्ट रूप से दर्ज हो रही हैं, जिससे भविष्य में विवाद कम होने की संभावना बढ़ी है।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश शहरी परिसरों की किरायेदारी विनियमन अधिनियम, 2021 के तहत किरायेदारी समझौते का विवरण किराया प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करना आवश्यक है। वहीं, एक वर्ष से अधिक अवधि की किरायेदारी के मामलों में पंजीकरण अधिनियम, 1908 के अनुसार लीज डीड का पंजीकरण अनिवार्य है। ऐसे में सरकार द्वारा दी गई स्टाम्प शुल्क छूट लोगों को कानून का पालन करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
के.सी. जैन ने सुझाव दिया कि वर्तमान योजना का दायरा बढ़ाकर ₹10 लाख से अधिक वार्षिक किराये वाली लीज डीड्स को भी इसमें शामिल किया जाए, ताकि बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान, उद्योग एवं कार्यालय भी इसका लाभ लेकर अपने अनुबंधों का विधिवत पंजीकरण करा सकें।
उन्होंने कहा कि यदि यह योजना आगे भी जारी रहती है तो पारदर्शिता बढ़ेगी, अवैध एवं मौखिक किरायेदारी व्यवस्था कम होगी, न्यायालयों में विवाद घटेंगे तथा सरकार को दीर्घकाल में अधिक राजस्व प्राप्त होगा। उन्होंने इसे “Ease of Living” और “Ease of Doing Business” को मजबूत करने वाला कदम बताया।
अधिवक्ता जैन ने आशा व्यक्त की कि राज्य सरकार जनहित में इस महत्वपूर्ण विषय पर सकारात्मक निर्णय लेते हुए स्टाम्प शुल्क छूट योजना को आगे भी जारी रखेगी।
रिपोर्ट : असलम सलीमी

