हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा। पशुपालन विभाग में करोड़ों रुपये के सरकारी बजट के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। पशुपालन विभाग से जुड़े पदाधिकारियों पर बिना जिला क्रय समिति की अनुमति के खरीददारी करने तथा शासनादेशों की अनदेखी करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस संबंध में डॉ. सतीश चन्द्र शर्मा ने जिलाधिकारी आगरा को शिकायती पत्र सौंपकर बिंदुवार समयबद्ध जांच की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मुख्य पशुचिकित्साधिकारी (सीवीओ) डॉ. डी.के. पाण्डे ने वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के दौरान करोड़ों रुपये की खरीददारी बिना जिला क्रय समिति की स्वीकृति के कराई। शिकायतकर्ता का कहना है कि शासनादेशों के अनुसार जिला क्रय समिति की अनुमति के बिना एक सुई तक की खरीद संभव नहीं है, लेकिन नियमों को दरकिनार कर बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितता की गई।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि औषधियों एवं उपकरणों की खरीद में गुणवत्ता परीक्षण, रैण्डम सैम्पलिंग, विशेषज्ञ समिति के निर्देशों तथा मण्डलीय अपर निदेशक को सूचना भेजने जैसी अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। आरोप है कि दवाओं की खरीद ऐसी कंपनियों से की गई जिनके खुले बाजार में निर्धारित मानकों के अनुरूप कारोबार की पुष्टि नहीं हुई।
डॉ. सतीश चन्द्र शर्मा ने आरोप लगाया कि सरकारी बजट के उपयोग में पारदर्शिता नहीं बरती गई तथा जिला स्तरीय क्रय समिति और गुणवत्ता सत्यापन संबंधी प्रावधानों की अनदेखी कर शासनादेशों का उल्लंघन किया गया। उन्होंने जिलाधिकारी से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
इस मामले की प्रतिलिपि प्रमुख सचिव (पशुधन), उत्तर प्रदेश शासन तथा मुख्यमंत्री को आईजीआरएस के माध्यम से भी भेजी गई है।

