हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा। हाल ही में हुए " लखनऊ अग्निकांड " को लेकर वरिष्ठ ऑर्थो सर्जन, सामाजिक चिंतक एवं विश्लेषक डॉ.संजय चतुर्वेदी ने कहा है कि यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है। उन्होंने कहा कि हर बड़ी दुर्घटना के बाद नए नियम बनाने और शर्तें कठोर करने की मांग उठती है,जबकि वास्तविक समस्या नियमों की कमी नहीं, बल्कि उनके प्रभावी अनुपालन की है।
डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि पिछले चार-पांच दशकों में शहरों का स्वरूप तेजी से बदला है। अनेक आवासीय भवनों में आज क्लीनिक, कार्यालय, कोचिंग सेंटर, छोटे अस्पताल, डायग्नोस्टिक सेंटर और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। इसके पीछे बढ़ती व्यावसायिक संपत्तियों की कीमतें, ऊंचे किराए और छोटे उद्यमियों की आर्थिक मजबूरियां प्रमुख कारण हैं।
उन्होंने कहा कि यदि छोटे प्रतिष्ठानों पर बड़े मॉल या बहुमंजिला व्यावसायिक भवनों जैसी कठोर शर्तें लागू कर दी जाएं तो अनेक छोटे व्यवसाय बंद होने की स्थिति में पहुंच सकते हैं। इसलिए सुरक्षा मानकों में व्यावहारिकता और संतुलन आवश्यक है।
डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि अक्सर कागजों में फायर एनओसी, अग्निशमन उपकरण और आपातकालीन निकास मार्ग मौजूद दिखते हैं, लेकिन वास्तविकता में उपकरण निष्क्रिय होते हैं, निकास मार्ग अवरुद्ध रहते हैं और फायर ड्रिल का आयोजन नहीं किया जाता। यही स्थिति कई अस्पतालों, होटलों, विद्यालयों और व्यावसायिक भवनों में भी देखने को मिलती है।
उन्होंने सरकार, व्यवसायियों और नागरिकों की साझा जिम्मेदारी पर बल देते हुए कहा कि सरकार को नियमों को सरल, पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त बनाना चाहिए। वहीं व्यवसायियों को सुरक्षा को खर्च नहीं बल्कि आवश्यक निवेश मानते हुए अग्निशमन उपकरणों को कार्यशील रखना चाहिए तथा कर्मचारियों को आपातकालीन परिस्थितियों के लिए प्रशिक्षित करना चाहिए। नागरिकों को भी अग्नि सुरक्षा के प्रति जागरूक रहना होगा।
डॉ. चतुर्वेदी ने समाधान के रूप में जोखिम आधारित वर्गीकरण, छोटे प्रतिष्ठानों के लिए किफायती सुरक्षा मानक, वार्षिक अग्नि सुरक्षा समीक्षा, नियमित फायर ड्रिल, डिजिटल एवं पारदर्शी निरीक्षण प्रणाली तथा पुराने भवनों के लिए चरणबद्ध सुधार योजना लागू करने का सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि लखनऊ अग्निकांड की सबसे बड़ी सीख यही है कि दुर्घटनाएं नियमों की कमी से नहीं, बल्कि उनके पालन में लापरवाही से होती हैं। इसलिए आवश्यकता नए नियम बनाने से अधिक मौजूदा नियमों का ईमानदारी, पारदर्शिता और व्यावहारिकता के साथ अनुपालन सुनिश्चित करने की है,ताकि विकास और सुरक्षा दोनों साथ-साथ आगे बढ़ सकें।

