गंगा दशहरा पर श्री यमुना जी की गोद में विराजे ठाकुरजी,श्रद्धाभाव से मनाया गया नौका विहार उत्सव



नाई की मंडी स्थित श्री प्रेमनिधि जी मंदिर में भक्ति, सेवा और शीतलता के भाव से हुआ मनोरथ


हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा। गंगा दशहरा के पावन अवसर पर नाई की मंडी स्थित श्री प्रेमनिधि जी मंदिर में पुष्टिमार्गीय परंपरा के अनुसार नौका विहार उत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर ठाकुरजी को सुसज्जित नौका में विराजमान कर जलकुंड में विहार कराया गया। मंदिर परिसर भजन-कीर्तन और मंगलगान से गुंजायमान रहा तथा मनोरथ के दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

मुख्य सेवायत हरिमोहन गोस्वामी एवं सुनीत गोस्वामी ने उत्सव के दौरान उपस्थित वैष्णवों को नौका विहार के आध्यात्मिक महत्व से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि पुष्टिमार्ग में नौका विहार उत्सव का प्रमुख भाव ग्रीष्म ऋतु में ठाकुरजी को शीतलता प्रदान करना तथा जीव को प्रभु कृपा के माध्यम से संसार रूपी भवसागर से पार लगाने की प्रेरणा देना है। उष्णकाल में ठाकुरजी के सुकोमल स्वरूप को सुख पहुंचाने के लिए जल से भरे कुंड में सुंदर नौका सजाकर यह मनोरथ संपन्न किया जाता है।

पुष्टिमार्गीय मान्यता के अनुसार इस जल को साक्षात कालिंदी स्वरूपा श्री यमुना जी माना जाता है। नौका में विराजमान होकर विहार करते हुए ठाकुरजी मानो श्री यमुना जी की गोद में क्रीड़ा करते हैं। यह मनोरथ भक्त और भगवान के मधुर संबंध, सेवा, प्रेम तथा समर्पण का प्रतीक माना जाता है। साथ ही नौका विहार का संदेश यह भी है कि प्रभु की कृपा रूपी नौका के सहारे ही जीव भवसागर से पार होकर परम आनंद की प्राप्ति कर सकता है।

उत्सव में सत्यव्रत खंडेलवाल, राजकुमार खंडेलवाल, आशीष पचौरी, रानू पचौरी, अमित शर्मा, सरदार सिंह धाकड़, मोहित अग्रवाल, वंशिका गोस्वामी एवं भक्ति गोस्वामी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में ठाकुरजी की आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ उत्सव का समापन हुआ।