संस्कृति संगम 2026 में गूंजे भारतीय संस्कृति के स्वर,'कलयुग के श्रवण कुमार' ने नम कीं आंखें

लोक संस्कृति, शास्त्रीय नृत्य, राष्ट्रभक्ति और बस्तियों की प्रतिभाओं के दमदार प्रदर्शन से सजा सूरसदन, हनुमान चालीसा के साथ हुआ भव्य समापन

हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा। सूरसदन प्रेक्षागृह में डेल्फिक एसोसिएशन द्वारा आयोजित 'संस्कृति संगम 2026' भारतीय संस्कृति, लोक परंपराओं और युवा प्रतिभाओं का भव्य उत्सव बन गया। कार्यक्रम में बस्तियों की छिपी प्रतिभाओं ने नृत्य, संगीत और नाट्य प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लिया। समारोह का शुभारंभ एडीजी उत्तर प्रदेश एवं संस्था के अध्यक्ष डॉ. आरके स्वर्णकार, पीएसी कमांडेंट नरेंद्र कुमार सिंह, आईएएस अधिकारी अभिषेक मिश्रा, आयोजक अनीता सिसोदिया सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

कार्यक्रम में 'देश रंगीला', श्रीकृष्ण रासलीला, कश्मीरी, कालबेलिया, पंजाबी, मराठी, भरतनाट्यम और कुचिपुड़ी जैसे लोक एवं शास्त्रीय नृत्यों ने भारत की सांस्कृतिक विविधता का आकर्षक चित्र प्रस्तुत किया। सावन गीतों, राजपूताना तलवारबाजी और कथक युगल नृत्य ने भी खूब तालियां बटोरीं। आईएएस अधिकारी अभिषेक मिश्रा एवं डॉ. सरला शर्मा के युगल गायन ने संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण योगेश परमार एवं उनकी टीम द्वारा प्रस्तुत 'कलयुग का श्रवण कुमार' नाटक रहा, जिसने माता-पिता के प्रति बदलते सामाजिक व्यवहार को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत कर दर्शकों की आंखें नम कर दीं। अंत में 'वंदे मातरम्' और सामूहिक हनुमान चालीसा के साथ पूरा सभागार राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना के रंग में रंग गया। संस्था की ओर से कहा गया कि बस्तियों में छिपी प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का अभियान आगे भी जारी रहेगा।