सम्मान समारोह में सजी काव्य संध्या,कवियों ने बहाई रसधार

 


वरिष्ठ पत्रकार वीरेन्द्र गोस्वामी और कवि-समाजसेवी मुन्नालाल मिश्रा का हुआ सम्मान

हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा। नागरी प्रचारिणी सभा के सभागार में हिंदी साहित्य सभा के बैनर तले आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह में देशभर से आए कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। हास्य, व्यंग्य, गीत, गजल, श्रृंगार, आध्यात्मिक और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी कविताओं ने कार्यक्रम को विविध रंगों से भर दिया। कवियों की प्रभावशाली प्रस्तुतियों पर सभागार बार-बार तालियों और वाहवाही से गूंजता रहा।

कार्यक्रम में आगरा के वरिष्ठ पत्रकार वीरेन्द्र गोस्वामी तथा कवि, समाजसेवी एवं पर्यावरणविद् मुन्नालाल मिश्रा ‘धुआंधार’ को मुख्य अतिथि एवं अतिथियों द्वारा शॉल, माला, पटका एवं अभिनंदन पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया। समारोह की अध्यक्षता अंतरराष्ट्रीय गीतकार रामेंद्र मोहन त्रिपाठी ने की।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। मुख्य अतिथि महेन्द्र कुमार गोयल, विशिष्ट अतिथि ओम ठाकुर एवं डॉ. महेश धाकड़ सहित उपस्थित कवियों ने दीप प्रज्ज्वलित किया। कवयित्री रजिया बेगम ‘जिया’ ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

कवि सम्मेलन में शिकोहाबाद के व्यंग्यकार अरविंद तिवारी ने अपनी व्यंग्य रचनाओं के माध्यम से समाज की विद्रूपताओं पर तीखा प्रहार किया। आगरा के वरिष्ठ साहित्यकार शीलेन्द्र वशिष्ठ ने अपने भावपूर्ण गीतों से श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। उनकी पंक्तिया-

“शांत... निश्चल...

क्षितिज पट निस्तब्ध है,

बहता मधुर मलयज,

दिशाएं मौन...

सूरज ढल रहा है,

संक्रमण का द्वंद्व

भीतर पल रहा है...”

ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

इंदौर से आए हास्य-व्यंग्य कवि सत्येन वर्मा ने अपनी चुटीली और व्यंग्यपूर्ण रचनाओं से खूब गुदगुदाया। उन्होंने शहर, समाज और बदलते मानवीय व्यवहार पर व्यंग्य करते हुए कहा-

“शहर की गलियां, शहर की राहें, चौराहे सब जाने हैं,

हम आवारा अपने शहर के, सारा शहर हमें जाने है...”

उनकी हास्य-व्यंग्य रचनाओं पर श्रोताओं ने जमकर ठहाके लगाए।

धौलपुर से पधारीं कवयित्री रजिया बेगम ‘जिया’ ने श्रृंगार रस की रचनाओं से काव्य संध्या में प्रेम और संवेदना के रंग भर दिए। उनकी पंक्तियां-

“सुंदर सा इक चित्र हृदय के द्वार टंगा रहता है,

रंग भरो खाली-खाली है, बात यही कहता है...”

पर श्रोताओं ने खूब तालियां बजाईं।

फिरोजाबाद के राष्ट्रीय हास्य-व्यंग्य कवि कीड़े लाल ने अपनी डेढ़ लाख वाली व्यंग्य क्षणिकाओं से श्रोताओं को खूब हंसाया। बाह के कवि शिवराम यादव ‘शांति’ ने सामाजिक विसंगतियों पर आधारित सवैया प्रस्तुत किया-

“पूत कपूत हुए कुछ हैं, सहयोग नहीं करते घर में।

पास-पड़ोस करें झगड़ा, हथियार लिए फिरते कर में।।

लोग भली कुछ बात कहें, वह भूल रहे पल ही भर में।

कौन यहां अब न्याय करे, खुद मात-पिता रहते डर में।। ”

इस रचना को श्रोताओं ने खूब सराहा।

रजनीकांत लवानिया ने स्वरचित अनुष्टुप छंद का पाठ कर वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। वहीं अजय शर्मा ने वर्तमान समय और युग परिवर्तन पर अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए कहा-

“जिस मनुष्य काल को हम बैठे हैं, वे सपने तो टूट गए,

सतयुग, त्रेता, द्वापर मिलकर, सब कलयुग में डूब गए।”

प्रसिद्ध गीतकार डॉ. राजकुमार रंजन ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। उनकी लोकभाषा में प्रस्तुत पंक्तियां-

“जिअ तन माटी को कन भैया, फिर काहे इतरावै,

पांच तत्व का बनै पिंजरा, जस का तस ह्वै जावै...”

ने श्रोताओं को विशेष रूप से प्रभावित किया।

अरविंद समीर ने अपनी गजलों से काव्य संध्या को नई ऊंचाई दी। उन्होंने कहा-

“मैं जमीं पर हूं मगर तुम तो फलक बनती हो,

दोस्ती में भी अदावत की झलक बनती हो।”

वहीं उनकी दूसरी रचना-

“लफ्ज गले में अटके, बात होंठों तक न आई,

खामोशी में भी कोई फरियाद सुने, तरीके खोजिए।

समीर मंजिल बहुत दूर, पांव लहूलुहान,

छालों के साथ भी सफर करे, तरीके खोजिए।”

पर श्रोताओं ने जमकर दाद दी।

कवि एवं पर्यावरणविद् मुन्नालाल मिश्रा ‘धुआंधार’ ने हिंदी भाषा की श्रेष्ठता और गौरव पर प्रभावशाली काव्यपाठ किया। उन्होंने कहा-

“हिंदी भाषा सम्मान बढ़े, गौरव बढ़ जाए हमारा,

हिंद देश की हिंदी भाषा है, उद्घोष हमारा।

हिंदी सीखो, हिंदी बोलो, हो पावन कंठ हमारा,

हिंदी भाषा सम्मान कराना है, कर्तव्य हमारा।”

उनकी प्रस्तुति पर सभागार तालियों से गूंज उठा।

कवि सम्मेलन में यादराम कविकिंकर, शिवशंकर ‘सहज’, शाहिद ‘महक’, आचार्य उमाशंकर, अतुल दुबे, राजेंद्र दवे सहित अनेक कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम में साहित्य, पत्रकारिता और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य लोग तथा बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि वरिष्ठ अधिवक्ता एवं समाजसेवी महेन्द्र कुमार गोयल, विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार ओम ठाकुर, आदर्श नंदन गुप्त एवं डॉ. महेश धाकड़ मौजूद रहे। हिंदी साहित्य सभा के अध्यक्ष अरुण रावत, महासचिव डॉ. राजकुमार रंजन, उपाध्यक्ष राजेश दीक्षित, सचिव अरविंद समीर, मीडिया प्रभारी कृष्ण कुमार सिंह, राहुल राज, ठाकुर बलवीर सिंह, अमित दीक्षित तथा श्रीरामदास सनातन गोमती ट्रस्ट के हर्ष मिश्रा ने अतिथियों एवं कवियों का स्वागत शॉल, माला और अभिनंदन पत्र भेंट कर किया।

अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, कवियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया। साहित्य, सम्मान और काव्य की त्रिवेणी से सजी यह शाम उपस्थित लोगों के लिए लंबे समय तक यादगार बनी रही।

रिपोर्ट : अरविंद दोहरे 'समीर'