हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
पटना, 3 अगस्त। बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव ने बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भारतीय जनता पार्टी के परंपरागत गढ़ माने जाने वाले बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में जीत दर्ज कर नया राजनीतिक इतिहास रच दिया। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार को 18953 मतों के अंतर से पराजित किया।
बांकीपुर सीट भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई थी। पिछले करीब तीन दशकों से यह सीट भाजपा के कब्जे में रही थी, ऐसे में प्रशांत किशोर की जीत को बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
प्रशांत किशोर ने उपचुनाव की घोषणा के साथ ही स्वयं मैदान में उतरने का फैसला किया था। उस समय कई राजनीतिक विश्लेषकों ने उनके निर्णय पर सवाल उठाए थे और इसे जोखिम भरा कदम बताया था। हालांकि चुनाव परिणाम ने सभी राजनीतिक आकलनों को पीछे छोड़ दिया और प्रशांत किशोर ने निर्णायक जीत हासिल कर आलोचकों को करारा जवाब दिया।
समृद्ध रहा है बांकीपुर का राजनीतिक इतिहास :
वर्ष 2008 के परिसीमन से पहले बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र पटना पश्चिम के नाम से जाना जाता था। इस सीट पर 1957 में पहला विधानसभा चुनाव हुआ था। समय-समय पर कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) और जनता पार्टी जैसी विभिन्न राजनीतिक दलों के उम्मीदवार यहां से विजयी होते रहे। बाद के वर्षों में यह सीट भाजपा का मजबूत गढ़ बन गई, जिसे अब प्रशांत किशोर ने अपने पक्ष में कर लिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांकीपुर की यह जीत आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में नए समीकरणों का संकेत दे सकती है।

