76 वें गुरुजन सम्मान समारोह में विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियां सम्मानित

                                      

                                         

                                        



                                        





संगीत,नृत्य और सरोद वादन की प्रस्तुतियों ने बांधा समां,गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर दिया जोर

हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा, 9 अगस्त। पं.रघुनाथ तलेगाँवकर फाउंडेशन ट्रस्ट एवं संगीत कला केन्द्र, आगरा के संयुक्त तत्वावधान में गुरु पूर्णिमा महोत्सव एवं 76वें गुरुजन सम्मान समारोह का आयोजन रविवार को ग्रांड होटल आगरा के मुख्य सभागार में किया गया। समारोह में संगीत, समाज, जनसंचार, शिक्षा, साहित्य एवं वाद्य संगीत सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली शहर की प्रतिष्ठित हस्तियों को मानद सम्मान प्रदान किए गए।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रथम पूज्य श्री गणपति एवं मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। इसके बाद पं. विष्णु दिगम्बर पलुस्कर, पं.विष्णु नारायण भातखण्डे, पं.रघुनाथ तलेगाँवकर, श्रीमती सुलभा जी, रानी सरोज गौरीहार, उस्ताद लल्लू सिंह एवं संगीत नक्षत्र पं. केशव जी के चित्रों पर सर्वश्री अरुण डंग, अरविंद कपूर, आर.के. तिवारी, विनोद माहेश्वरी एवं संस्था सदस्यों ने माल्यार्पण किया।

संगीत कला केन्द्र के नन्हे साधकों निहि सिंह, वर्तिका, निष्ठा एवं हिमांशु देव सिंह ने गुरु वंदना ‘गुरु तेरी महिमा अपरम्पार’ एवं ‘गुरु तोरे चरण शरण में आए’ प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। इसके बाद सावन के रंग के अंतर्गत राग देस पर आधारित ‘सावन आयो घिर घिर’ तथा कजरी ‘रिमझिम रिमझिम सावन बरसे’ की प्रस्तुति आन्या जादौन, महक जादौन, शुभांगी वर्मा, आर्या भाटी, दृष्टि उपाध्याय, अभिलाषा शुक्ला, ईशा सेठ, सीमा सिंह एवं हेमा शर्मा ने दी। इन प्रस्तुतियों का निर्देशन गुरु मां श्रीमती प्रतिभा जी ने किया। तबले पर डॉ. लोकेन्द्र तलेगाँवकर, संवादिनी पर पं. रविन्द्र तलेगाँवकर तथा ढोलक पर वरिष्ठ कलाकार उस्ताद सलीम खान ने संगत की।

इसके बाद आमद एकेडमी, आगरा की नृत्य साधिकाओं ओजश्वी बघेल, विश्विका जैन, छवि यादव, बानी चौधरी, समृद्धि माहेश्वरी, नायशा जिंदल एवं सौम्या शर्मा ने पं. बिरजू महाराज द्वारा रचित कृष्ण वंदना ‘कस्तूरी तिलकम’ एवं गुरु वंदनाओं की मनोहारी प्रस्तुति दी। इसका निर्देशन संस्था की निदेशिका सुश्री तरूछाया सक्सेना ने किया। प्रस्तुतियों के बाद छात्रों को प्रमाणपत्र एवं मेडल संस्था सदस्य अरविन्द कपूर, अरुण डंग, डॉ. मंगला मठकर एवं अध्यक्ष विजयपाल सिंह चौहान ने प्रदान किए।

समारोह की विशिष्ट प्रस्तुति बनस्थली विद्यापीठ से पधारे मैहर घराने के सिद्धहस्त कलाकार श्री प्रसेनजित सेनगुप्ता का सरोद वादन रही। उन्होंने राग बिलासखानी तोड़ी में विलंबित गत तीनताल प्रस्तुत करते हुए मैहर घराने की परंपरा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। पारंपरिक रचनाओं के सधे हुए प्रस्तुतिकरण ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। तबले पर युवा प्रतिभा श्री स्वप्निल रावल ने कुशल संगत की।

विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियों को मिला मानद सम्मान :

समारोह के मुख्य चरण में विभिन्न क्षेत्रों में विशेष योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया। वरिष्ठ आर.के. तिवारी को ‘समाज शिल्पी’, श्री अनिल कुमार शर्मा को ‘जनसंचार शिल्पी’, श्री मनीष प्रभाकर को ‘संगीत शिल्पी’, प्रो. (डॉ.) मनीषा को ‘शिक्षा शिल्पी’, श्रीमती निशिराज जैन को ‘साहित्य शिल्पी’, श्री रघुवीर प्रसाद शर्मा ‘रग्घो’ को ‘वाद्य शिल्पी’, प्रो. सुजीत देवघोरिया को ‘आदर्श गुरु’, श्री प्रसेनजित सेनगुप्ता को ‘नाद तन्त्री विलास’ तथा श्री स्वप्निल रावल को ‘संगीत सहोदर’ के मानद सम्मान से अलंकृत किया गया।

सम्मानित अतिथियों को संस्था संरक्षक परम श्रद्धेय अरुण डंग, डॉ. लोकेन्द्र तलेगाँवकर, श्री नीरज जैन, श्री विनोद माहेश्वरी, अध्यक्ष श्री विजय पाल सिंह चौहान, उपाध्यक्ष श्री अनिल वर्मा, सदस्य डॉ. मंगला मठकर, श्री रविन्द्र तलेगाँवकर एवं श्रीमती प्रतिभा तलेगाँवकर ने उपवस्त्र एवं सम्मान-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। सभी सम्मानित अतिथियों का जीवन परिचय डॉ. महेश चंद्र धाकड़ एवं श्री कृष्ण जी ने प्रस्तुत किया।

समारोह में नगर के अनेक विद्वान एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे। इनमें अनिल डंग, डॉ. अरुण चतुर्वेदी, सुधीर नारायण, डॉ. मधु भारद्वाज, सन्दीप अरोड़ा, आचार्य उमाशंकर पाराशर, सन्तोष कुलश्रेष्ठ, नीरज जैन, डॉ. राजीव शर्मा, विलास पालखे, आनंद हरिदास, विक्रम शुक्ला, डॉ. वंदना अग्रवाल, डॉ. मनीषा, डॉ. महेश चंद्र धाकड़, अजय बहादुर, सलोनी पांडेय, उस्ताद सलीम खान, पार्थो सेन एवं मीनू गिरी सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम का संचालन श्री श्रीकृष्ण जी ने संस्था के इतिहास, गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व एवं प्रभावशाली शब्द संयोजन के साथ किया। संस्था अध्यक्ष श्री विजय पाल सिंह चौहान ने सभी सहयोगियों, श्रोताओं एवं छात्रों का आभार व्यक्त किया।

रिपोर्ट : असलम सलीमी