जेन ज़ी,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नारी सशक्तिकरण पर गोष्ठी,मां जैसा कोई नहीं जीया : एक युग’ पुस्तक का विमोचन
हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा। नारी सृजक है और उसमें बहुत कुछ करने की क्षमता है। परिवार को नारी की सबसे पहले जरूरत है, इसलिए उसे प्राथमिकता और सम्मान मिलना चाहिए। बच्चे की पहली शिक्षक मां होती है और यदि मां संस्कारवान नागरिक तैयार करेगी तो इसका लाभ पूरे समाज और राष्ट्र को मिलेगा। यह विचार शिक्षाविद डॉ. महेश शर्मा ने सेठ पदम चंद जैन संस्थान के सभागार में आयोजित ‘जेन ज़ी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नारी सशक्तिकरण’ विषयक गोष्ठी में अध्यक्षीय संबोधन में व्यक्त किए।
कार्यक्रम में कवयित्री डॉ. शशि तिवारी और शिवरंजिनी तिवारी द्वारा संपादित पुस्तक ‘मां जैसा कोई नहीं जीया : एक युग’ का विमोचन किया गया। डॉ. महेश शर्मा ने कहा कि महिला सशक्तिकरण के नाम पर केवल खानापूर्ति नहीं होनी चाहिए, बल्कि महिलाओं को अपनी जिम्मेदारियों के साथ अधिकारों और चुनौतियों को भी समझना होगा। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताते हुए कहा कि जिस प्रकार कैलकुलेटर ने गणितीय क्षमताओं को प्रभावित किया, उसी प्रकार एआई का जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने पुस्तक की केंद्रीय पात्र जीया का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जन्म भी 30 जून को हुआ था और 95 वर्ष की आयु में उन्होंने 30 जून को ही दुनिया को अलविदा कहा। यह संयोग अपने आप में विशेष है।
मुख्य अतिथि डॉ. गिरधर शर्मा ने कहा कि भारत में नारी सदैव सशक्त रही है और उसे देवी का स्वरूप माना गया है। समय के साथ मान्यताएं बदली हैं, इसलिए आज की नारी को वर्तमान युग की चुनौतियों को स्वीकार करते हुए आगे बढ़ना होगा। उन्होंने डॉ. शशि तिवारी द्वारा अपनी मां को शब्दों में जीवंत करने के प्रयास की सराहना की।
मुख्य वक्ता प्रो. कमलेश नागर ने जेन ज़ी का उल्लेख करते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर उच्छृंखल व्यवहार को नारी सशक्तिकरण नहीं कहा जा सकता। नारी सशक्तिकरण का अर्थ शिक्षा, आत्मनिर्भरता, सम्मान और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ना है।
संचालक दिलीप रघुवंशी ने कहा कि हर पीढ़ी के विचार अलग होते हैं। पुरानी पीढ़ी नई पीढ़ी में कमियां तलाशती रही है, लेकिन आज की जेन ज़ी पीढ़ी कई मामलों में हमसे आगे सोच रही है और उससे भी बहुत कुछ सीखा जा सकता है।
साहित्यकार डॉ. कुसुम चतुर्वेदी ने कहा कि आज की आभासी दुनिया सामाजिक व्यवहार को प्रभावित कर रही है। उन्होंने जीया को स्मरण करते हुए कहा, “कुछ शख्सियतें ऐसी होती हैं, जिनको यादों में ठहर जाने का हुनर आता है।” उन्होंने कविता भी प्रस्तुत की।
डॉ. ज्योत्सना रघुवंशी ने कहा कि एआई जीवन में बड़ा बदलाव ला रहा है और महिला सुरक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी इसका उपयोग हो रहा है। नई तकनीक के साथ कदमताल करना जरूरी है, लेकिन सोशल मीडिया और साइबर अपराधों के दुष्प्रभावों के प्रति भी जागरूक रहना होगा। उन्होंने समावेशी और सशक्त समाज के निर्माण पर जोर दिया।
वरिष्ठ साहित्यकार राज बहादुर राज ने कहा कि शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी हैं। उन्होंने वैदिक युग में भारतीय नारी की सशक्त स्थिति का उल्लेख करते हुए मैथिलीशरण गुप्त की ‘यशोधरा’ की प्रसिद्ध पंक्तियां “अबला जीवन हाय, तुम्हारी यही कहानी, आँचल में है दूध और आँखों में पानी” उद्धृत कीं और बदलते समय में नारी की भूमिका पर विचार रखे।
डॉ. शशि तिवारी ने अपनी मां जीया के व्यक्तित्व और कृतित्व को स्मरण करते हुए कहा कि यह पुस्तक केवल उनकी व्यक्तिगत अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि दुनिया भर की माताओं को समर्पित है।
गायिका-कवयित्री शिवरंजिनी तिवारी ने मां को समर्पित कविता और डॉ. शशि तिवारी द्वारा रचित गीत प्रस्तुत कर भावपूर्ण वातावरण बना दिया। उन्होंने अपनी कविता में मां को परिवार की धड़कन, मान-सम्मान और रिश्तों की डोर बताया।
गायक परमानंद ने हिंडोला गायकी में मल्हार प्रस्तुत की, जबकि भगवान स्वरूप ने ढपली पर संगत की। इस दौरान दो लघु फिल्में भी प्रदर्शित की गईं, जिनका लेखन, निर्देशन और निर्माण शिवरंजिनी तिवारी और मेजर शेखर ने किया।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि प्रो. ब्रजेश रावत रहे। वक्ताओं में संजय तिवारी, पं. योगेश शर्मा योगी, अनिल जैन और डॉ. महेश धाकड़ सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
इस अवसर पर ब्रिगेडियर सौरभ तिवारी, कर्नल राजीव तिवारी, रजनी पांडेय, रश्मि शांडिल्य, शिप्रा तिवारी, रूपम, भावना, डॉ. विशाल, ममता, कुमकुम रघुवंशी, संजय शर्मा, विनोद दीक्षित, सुधांशु पांडेय, डॉ. नीलम भटनागर, संजय गुप्त, शरद गुप्त, राजकुमार दीक्षित, राजेंद्र शर्मा, डॉ. रुचिरा प्रसाद, स्वाति माथुर, श्वेता, जितेंद्र दीक्षित, आचार्य उमाशंकर और अनिल अरोड़ा संघर्ष सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। अंत में तिवारी परिवार के सदस्यों ने सभी का आभार व्यक्त किया।
रिपोर्ट : असलम सलीमी


