इप्टा की दमदार नाट्य प्रस्तुति ‘रामी’ ने झकझोरा, प्रकृति बचाने का दिया संदेश
हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा। भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) आगरा द्वारा माथुर वैश्य सभा भवन में पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित बेहद प्रभावशाली नाट्य प्रस्तुति ‘रामी’ का मंचन किया गया। नाटक ने औद्योगीकरण और शहरीकरण की अंधी दौड़ में नष्ट हो रही प्रकृति तथा पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया।
‘रामी’ राजस्थान के जोधपुर निवासी प्रसिद्ध कहानीकार श्री सत्यनारायण की कहानी है, जिसका नाट्य रूपांतरण दिलीप रघुवंशी ने किया है। नाटक का निर्देशन भी दिलीप रघुवंशी ने किया।
नाटक की कहानी एक बंजारन बच्ची रामी के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे प्रकृति से अगाध प्रेम है। बरगद जैसे विशाल वृक्ष, कैर की झाड़ियां, कुएं और प्राकृतिक दृश्यों को वह आत्मीयता से निहारती रहती है। इसी दौरान सत्या नामक बच्चे का परिवार उस क्षेत्र में आकर बसता है और दोनों बच्चों के बीच गहरी मित्रता हो जाती है। रामी अपने मित्र सत्या को प्रकृति के अद्भुत रूपों और उसके सौंदर्य से परिचित कराती है।
कुछ समय बाद सत्या के पिता का स्थानांतरण हो जाता है और दोनों मित्र बिछड़ जाते हैं। करीब बीस वर्ष बाद सत्या पुनः उस स्थान पर लौटता है और रामी को खोजता है। तब उसे पता चलता है कि जिस प्राकृतिक सौंदर्य से रामी प्रेम करती थी, वह औद्योगीकरण और शहरीकरण की भेंट चढ़ चुका है। प्रकृति को बचाने के संघर्ष में रामी अपने प्राणों की आहुति दे देती है। नाटक ने दर्शकों के समक्ष पर्यावरण संरक्षण का अत्यंत सारगर्भित और भावनात्मक संदेश प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर कहानीकार श्री सत्यनारायण स्वयं जोधपुर से कार्यक्रम में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के आरंभ में प्रो. ज्योत्सना रघुवंशी ने इप्टा के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष 1942 में बंगाल के अकाल के दौरान राजेंद्र रघुवंशी ने बिशन खन्ना के साथ मिलकर एक कल्चरल स्क्वायड की स्थापना की थी। गीतों और नाटकों के माध्यम से लोगों में जागरूकता पैदा करने का कार्य किया गया। वर्ष 1943 में विधिवत इप्टा की स्थापना हुई और इसका कारवां आगे बढ़ता गया। उन्होंने कहा कि बीच में कुछ रुकावटें आईं, लेकिन वर्ष 1985 में राजेंद्र रघुवंशी ने इप्टा का राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित कर संगठन में पुनः नवप्राण का संचार किया। रंगमंच जनता से सीधे संवाद करने का एक सशक्त माध्यम है।
कार्यक्रम में संयोजक नीरज मिश्रा ने कहानीकार श्री सत्यनारायण का माल्यार्पण कर स्वागत किया, जबकि आगरा इप्टा के अध्यक्ष सुबोध गोयल ने उन्हें शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। छत्तीसगढ़ से पधारे साहित्यकार जय प्रकाश का शकील चौहान ने माल्यार्पण कर स्वागत किया।
नाट्य प्रस्तुति में निवेदिता ने रामी की भूमिका को प्रभावशाली ढंग से जीवंत किया, जबकि रविंदर ने सत्या की भूमिका में सराहनीय अभिनय किया। असलम खान सूत्रधार की भूमिका में रहे। जय कुमार ने लेखक, पार्थो घोष ने ग्रामीण तथा पूजा पाराशर ने सत्या की मां की भूमिका को प्रभावशाली बनाया। पार्श्व स्वर कुमकुम रघुवंशी का रहा।
नाटक का संगीत संयोजन सिद्धार्थ रघुवंशी ने किया, जबकि संगीत संचालन परमानंद शर्मा ने संभाला। नृत्य संयोजन पूजा शर्मा का रहा तथा प्रकाश व्यवस्था बब्बू ने संभाली। शकील चौहान और शैलेन्द्र शर्मा ने प्रबंधन की जिम्मेदारी निभाई। मुख्य सहयोग कुमकुम रघुवंशी और मुक्ति किंकर का रहा। रिकॉर्डिंग का दायित्व इमामुद्दीन ने संभाला, जबकि रूपसज्जा आनंद बंसल ने की।
अंत में क्रांतिकारी रोशन लाल सुतेल स्मृति समिति द्वारा सभी प्रतिभागी कलाकारों को पुरस्कार प्रदान किए गए। कार्यक्रम के समापन पर सुबोध गोयल ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से डॉ. शशि तिवारी, अनिल शुक्ला, प्रियंका मिश्रा, अनिल जैन, धर्मजीत सिंह सहित शहर के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
रिपोर्ट : असलम सलीमी



