जयंती पर स्मरण : अंगिरा ऋषि के नाम पर है आगरा



मंदिर में महर्षि अंगिरा की प्रतिमा


अंगिरा ऋषि सत्संग भवन

खातीपाड़ा और शाहदरा में प्रतिष्ठित हैं प्रतिमा    
हिन्दुस्तान वार्ता।  ✍️ आदर्श नंदन गुप्ता,वरिष्ठ पत्रकार
आगरा : अंगिरा ऋषि के नाम पर है आगरा, लेकिन यह ऋषि केवल पुस्तकों तक ही सीमित रह गये। करीब 15 वर्ष पूर्व मंदिर और स्कूल में प्रतिमा प्रतिष्ठापित की गई थीं,लेकिन उससे भी शहरवासी अनजान हैं। ऋषि पंचमी को देश के विभिन्न नगरों में अंगिरा ऋषि की जयंती मनाई गई।
पौराणिक कथाओं के अनुसार महर्षि अंगिरा ब्रह्मा जी के मानस पुत्र हैं। यह भी लिखा है कि उन्होंने ही अथर्ववेद को साकार रूप दिया था। साहित्यकार सतीशचंद चतुर्वेदी की पुस्तक ‘आगरा नामा’ और ‘अंगिरा से आगरा’ में लिखा है कि श्रीमद् भावगत कथा में महर्षि अंगिरा, शूरसैन जनपद और यमुना तट का प्रसंग आता है। इससे पता लगता है कि यह यमुना तट आगरा जनपद का चित्राहाट है, जो बटेश्वर के समीप है। उन्हीं के नाम पर आगरा का पूर्व नाम अंगिरा था, जो बाद में अपभ्रंश होकर आगरा हो गया। इसका उल्लेख वरिष्ठ इतिहासकार राज किशोर राजे की पुस्तक ‘तवारीख-ए-आगरा’ में भी है। ‘मैं आगरा हूं’, ‘संस्कृति, साहित्य और परंपराओं का शहर: आगरा’ में भी इसका उल्लेख है।
खातीपाड़ा में स्मृतियां :
लोहामंडी,खातीपाड़ा स्थित ‘प्राचीन मंदिर श्री मुरली मनोहर जी महाराज’ में करीब 12 वर्ष पूर्व विश्वदेव रावत के प्रयास से महर्षि अंगिरा की प्रतिमा प्रतिष्ठापित कराई गई। उसके बाद वहीं एक कक्ष में ‘महर्षि अंगिरा सत्संग भवन’ की स्थापना की। शिव परिवार के मंदिर को भी ‘अंगिरेश्वर महादेव’ नाम दिया गया। उसके बाद एक प्रतिमा ‘चुन्नीलाल इंटर कालेज’, शाहदरा में स्थापित कराई थी।

वर्जन :

                                         

जांगिड़ ब्राह्मण समाज है वंशज :
महर्षि अंगिरा के वंशज जांगिड़ ब्राह्मण समाज के लोग हैं। इस समाज के आगरा में करीब 70 परिवार हैं। इस समाज के द्वारा ही मुरली मनोहर मंदिर की स्थापना की गई।

कन्हैया लाल शर्मा, अध्यक्ष- मुरली मनोहर मंदिर समिति

समाज की एक धर्मशाला और होस्टल भी है। राम बारात में वे महर्षि अंगिरा की झांकी भी निकालेंगे। ऋषि पंचमी पर महर्षि की जयंती पर हवन भी किया गया।
रामबाबू शर्मा, कोषाध्यक्ष