हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग और प्रचार-प्रसार पर दिया जोर
हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा। श्रीमती भगवती देवी जैन कन्या महाविद्यालय में हिंदी विभाग की ओर से हिंदी दिवस का आयोजन उत्साहपूर्वक किया गया। कार्यक्रम में हिंदी भाषा एवं साहित्य की महत्ता, समृद्ध परंपरा तथा वैश्विक स्तर पर बढ़ते प्रभाव पर वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए।
हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. शिखा श्रीधर ने कहा कि हिंदी दिवस और हिंदी साहित्य का अन्योन्याश्रित संबंध है। हिंदी की लोकप्रियता का प्रमुख कारण उसकी सहजता, सरलता और मिठास है। भारत के साथ ही विश्व के अनेक देशों में हिंदी के प्रति रुचि निरंतर बढ़ रही है। मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम, नेपाल, अमेरिका और ब्रिटेन सहित विभिन्न देशों में हिंदी के अध्ययन-अध्यापन और प्रयोग का विस्तार हुआ है।
उन्होंने बताया कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। इसी ऐतिहासिक निर्णय की स्मृति में प्रतिवर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ और अनुच्छेद 343 में संघ की राजभाषा हिंदी तथा उसकी लिपि देवनागरी निर्धारित की गई। भारत सरकार के निर्णय के बाद 1953 से 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाने की परंपरा शुरू हुई।
प्रो. श्रीधर ने कहा कि हिंदी का अपना विशिष्ट शब्दानुशासन और विशाल शब्द-भंडार है। हिंदी साहित्यकारों ने विपुल साहित्य की रचना कर भाषा को समृद्ध किया है। हिंदी फिल्मों के गीतों, सिनेमा और जनसंचार माध्यमों ने भी हिंदी के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रो. वंदना अग्रवाल रहीं, जबकि अध्यक्षता प्रो. मीरा अग्रवाल ने की। हिंदी विभाग की सहायक आचार्य डॉ. नेहा विश्वकर्मा एवं डॉ. अंकिता तिवारी तथा शोधार्थी कल्पना सिंह, संगीता शर्मा एवं यतेश गौतम ने हिंदी दिवस की सार्थकता पर विचार प्रस्तुत किए। इस दौरान काव्य-पाठ भी किया गया।
समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. नसीम अख्तर, डॉ. सगीता कुमार, डॉ. आभा मिश्रा, डॉ. नीलम कांत सहित अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे। हिंदी विषय के शोधार्थी कल्पना सिंह, संगीता शर्मा एवं यतेश गौतम तथा छात्राओं खुशी, सरस्वती, काजल और अनीता ने सक्रिय सहभागिता की। छात्राओं ने विचार एवं काव्य-पाठ प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम का संचालन डॉ.अर्चना निगम ने किया। कार्यक्रम में हिंदी भाषा के प्रति सम्मान, उसके अधिकाधिक प्रयोग तथा प्रचार-प्रसार के महत्व पर विशेष बल दिया गया।

