आगरा में दूसरे वर्ष मनाया गया भारतीय कविता दिवस

 


चंद्रवरदाई और श्रद्धाराम फिल्लौरी को किया गया समर्पित, विद्यार्थियों को हिंदी की साहित्यिक विरासत से कराया परिचित

हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा। आरबीएस कॉलेज के हिंदी विभाग एवं साहित्य संगीत संगम के संयुक्त तत्वावधान में द्वितीय भारतीय कविता दिवस का आयोजन आरबीएस कॉलेज के हिंदी विभाग सभागार में किया गया। आयोजन प्रथम महाकवि चंद्रवरदाई तथा ‘ओम जय जगदीश हरे’ के रचयिता श्रद्धाराम फिल्लौरी को समर्पित रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. शशी गोयल, अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र मिलन, मुख्य वक्ता प्रो. वीना शर्मा, हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. युवराज सिंह एवं साहित्यकार सुशील सरित ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। प्रो. आंशवना सक्सेना ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। अतिथियों का स्वागत सुधीर शर्मा, डॉ. रमेश आनंद, चंद्रशेखर शर्मा एवं डॉ. असीम आनंद ने किया।

कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए साहित्य संगीत संगम के हरीश भदौरिया ने कहा कि विश्व के अनेक देशों में कविता दिवस मनाया जाता है, लेकिन भारत में भारतीय कविता दिवस मनाने की परंपरा नहीं थी। इसी उद्देश्य से संस्था ने पिछले वर्ष इसकी शुरुआत की है। उन्होंने कहा कि संस्था का लक्ष्य इस आयोजन को देशभर में विस्तार देना है।

मुख्य वक्ता एवं केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा की पूर्व निदेशक प्रो. वीना शर्मा ने कहा कि प्रथम महाकवि चंद्रवरदाई और उनके प्रथम महाकाव्य ‘पृथ्वीराज रासो’ राजा और साहित्यकार की मित्रता का अनुपम उदाहरण हैं। उन्होंने चंद्रवरदाई के प्रसिद्ध दोहे की अर्धाली ‘मत चूको चौहान’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संदेश देती है कि अवसर मिलने पर हमें चूकना नहीं चाहिए।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. युवराज सिंह ने कहा कि जो रचनाकार अपनी रचना के साथ राष्ट्रप्रेम और मित्रता का अर्थ समझता है, वही सच्चा रचनाकार है और चंद्रवरदाई एवं पृथ्वीराज चौहान इस कसौटी पर खरे उतरते हैं।

मुख्य अतिथि डॉ. शशी गोयल ने कहा कि जो व्यक्ति समाज के लिए लिखता है, वही वास्तव में महान है। उन्होंने श्रद्धाराम फिल्लौरी द्वारा रचित ‘ओम जय जगदीश हरे’ आरती का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आरती देशभर के मंदिरों में गूंजती है और पीढ़ियों को संस्कार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

आगरा कॉलेज के संगीत विभाग की प्रो. आंशवना सक्सेना ने विद्यार्थियों को हिंदी कविता की समृद्ध परंपरा और साहित्यिक विरासत से परिचित कराया। इस अवसर पर भारतेंदु हरिश्चंद्र और रामधारी सिंह दिनकर की रचनाओं के साथ साहित्यकार सुशील सरित ने पूर्व प्रधानमंत्री एवं कवि अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं का सस्वर पाठ किया। अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र मिलन ने महाप्राण निराला का स्मरण करते हुए अपनी कविता प्रस्तुत की।

कार्यक्रम के अंत में हरीश भदौरिया ने सभी अतिथियों एवं उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर रिसर्च स्कॉलर नेहा बागड़ी, अर्जुन सिंह, साहित्यकार विजया तिवारी एवं संस्कृति कर्मी जगमोहन गुप्ता सहित अन्य साहित्यप्रेमियों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

रिपोर्ट : असलम सलीमी