हिन्दुस्तान वार्ता। ✍️ आदर्श नंदन गुप्ता,वरिष्ठ पत्रकार
आगरा : ब्रज साहित्य के परम आऱाधक, हिंदी सेवी, हास्य कवि और वरिष्ठ पत्रकार पं.गोपाल प्रसाद व्यास का आगरा से जुड़ाव रहा। उन्होंने अपनी हिंदी पत्रकारिता की शुरूआत आगरा से की। उसके बाद उनकी ख्याति निरंतर ऊंचाइयों तक पहुंचती गई और फिर उन्हें पद्मश्री सहित अनेक सम्मान प्राप्त हुए थे।
पंडित गोपाल प्रसाद व्यास ब्रजभाषा के कवि, साहित्य-शास्त्र के मर्मज्ञ थे। हिन्दी में वे व्यंग्य-विनोद की नई धारा के जनक माने जाते हैं। वे सामाजिक, साहित्यिक, राजनीतिक व्यंग्य-विनोद के प्रतिष्ठा प्राप्त कवि एवं लेखक थे और 'हास्यरसावतार' के नाम से प्रसिद्ध थे। उन्होंने अपनी विद्वत्ता से हिन्दी को समृद्ध किया था।
गोवर्धन के पारासौली गांव में जन्मे पं.गोपाल प्रसाद व्यास ने कुछ समय तक मथुरा में सेवा कार्य किया,लेकिन वहां मन नहीं लगा। वे आगरा आ गए। यहां साहित्यकार बाबू गुलाबराय जी और महेंद्र जी द्वारा संपादित ‘साहित्य संदेश’ मासिक पत्रिका का संपादन किया। उसके कुछ साल बाद वे दिल्ली में दैनिक हिंदुस्तान में सेवा देने लगे। उसमें वे ‘नारद जी खबर लाए हैं’ शीर्षक से कालम लिखने लगे। जिससे उनकी ख्याति पूरे देश में फैल गई। वे किसी भी समाचार पत्र में रहे हों, लेकिन ‘नारद जी खबर लाए हैं’ कालम सभी जगह लिखते रहे। व्यास जी ने 'राजस्थान पत्रिका' जयपुर, 'सन्मार्ग', कोलकाता में संपादन किया।
सन् 1983 में व्यास जी को आगरा से प्रकाशित सांध्य दैनिक 'विकासशील भारत' का प्रधान संपादक भी बनाया गया। लेकिन वे डेढ़ साल के करीब ही यहां सक्रिय रह पाए थे।
विभव जी के सम्मान में ‘ब्रज विभव’ :
कहा तो ये जाता है कि विभव जी ने उनसे अपना अभिनंदन ग्रंथ प्रकाशित व संपादित करने के लिए कहा था, तब उन्होंने कह दिया था कि तुम्हें, अभिनंदन ग्रंथ से नहीं जानेंगे। ऐसा ग्रंथ लिखूंगा कि पूरा विश्व जानेगा। यही हुआ। 774 पेज के एक ऐसा ग्रंथ ‘ब्रज विभव’ लिखा, जिसमें ब्रज का आध्यात्म, संस्कृति, परंपरा यानि सब कुछ है। लिखा सभी विद्वान और विशेषज्ञ लेखकों ने।
इस ग्रंथ के बारे में ‘ग्रंथ कथा’ शीर्षक से स्वयं व्यास जी ने ब्रज विभव के पृष्ठ पांच पर लिखा है कि- इस ग्रंथ के प्रकाशन की योजना सन् 1972 में बनी। हम उन दिनों चांदनी चौक, दिल्ली में रहते थे। वहां श्री देवकी नंदन विभव जी से भेंट हुई। विभव जी उस समय प्रदेश सरकार में एक वरिष्ठ मंत्री थे। उनसे हमारा परिचय सन् 1936-37 से था।
तब हम आगरा के मासिक ‘साहित्य संदेश में बाबू गुलाबराय और महेंद्रजी के साथ इस पत्र का संपादन करते थे। पं.श्रीकृष्ण दत्त पालीवाल और और महेंद्र जी के बाद विभव जी ही हमारे निकटतम मित्र थे। तभी ‘ब्रज विभव’ के प्रकाशन की योजना बनी। 774 पृष्ठ के इस ग्रंथ में विभव जी के बारे में भी अंत में 10 पृष्ठ प्रकाशित किये गये। ये चार आलेख विभव जी, स्वामी सत्यभक्त जी, श्री शिव प्रकाश पचौरी और डा.गणपति चंद्र गुप्त ने लिखे हैं। यह ग्रंथ 15 साल में तैयार हो सका था।
‘ब्रज विभव’ पूरे विश्व की प्रमुख लाइब्रेरियों में उपलब्ध है। जिसके आधार पर हजारों विद्यार्थियों ने शोध किया। आगरा में तो यह ग्रंथ दुर्लभ जैसा है।
व्यास जी ने मुझे भेंट किया ‘ब्रज विभव’ :
‘ब्रज विभव’ में पूज्य पिताजी स्व.रोशनलाल गुप्त करुणेश जी का भी आलेख है। इसका विमोचन तो वृहद स्तर पर दिल्ली में हो चुका था,लेकिन जिनके आलेख थे उन्हें तो वितरित करना ही था। अतः व्यास जी का पिता जी के पास पत्र आया कि वृंदावन में एक समारोह कर रहे हैं, वहां आकर ग्रंथ ग्रहण कर लें,लेकिन किन्हीं कारणवश पिताजी नहीं जा सके। मैं ही वहां गया। मेरा सौभाग्य था और वह दुर्लभ पल थे, जब पूज्य व्यास जी ने समारोह के मंच पर मुझे यह ग्रंथ भेंट किया था।
महामूर्ख सम्मेलनों के जन्मदाता :
ब्रज साहित्य मंडल, मथुरा के संस्थापक और मंत्री से लेकर अध्यक्ष तक का पद आपने सुशोभित किया था। 'दिल्ली हिन्दी साहित्य सम्मेलन' के संस्थापक और 35 वर्षों तक महामंत्री और अंत तक संरक्षक रहे। श्री पुरुषोत्तम हिन्दी भवन न्यास समिति के संस्थापक महामंत्री के पद पर अंत तक कार्य करते रहे। लाल क़िले के 'राष्ट्रीय कवि-सम्मेलन' और देश भर में होली के अवसर पर 'मूर्ख महासम्मेलनों' के जन्मदाता और संचालक का कार्य बखूबी समाप्त किया।
पंडित गोपाल प्रसाद व्यास का निधन शनिवार, 28 मई,उनके निवास बी-52, गुलमोहर पार्क,नई दिल्ली पर हुआ।
संपर्क : ए-3, सीताराम कालोनी,फेस-1,बल्केश्वर,आगरा।
मो. नंबर 9837069255



