हर चौथा अग्निकाण्ड शॉर्ट सर्किट से,48 हजार मौतों के बाद भी अनिवार्य विद्युत सुरक्षा ऑडिट नहीं : के.सी.जैन,वरिष्ठ अधिवक्ता



एडवोकेट के.सी. जैन ने प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर बहुमंजिला भवनों,अस्पतालों, स्कूलों और होटलों में अनिवार्य विद्युत सुरक्षा जाँच लागू करने की उठाई माँग

हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा/दिल्ली 10 मई। देश में बढ़ते अग्निकाण्डों और शॉर्ट सर्किट से हो रही मौतों को लेकर आगरा के अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता के.सी. जैन ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री  को पत्र भेजकर देशभर में भवनों की अनिवार्य विद्युत सुरक्षा ऑडिट व्यवस्था लागू करने की माँग की है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली के विवेक विहार, इन्दौर और ग्वालियर जैसी दर्दनाक घटनाओं में पूरे परिवार आग में खत्म हो गए,जिनका प्रमुख कारण बिजली का शॉर्ट सर्किट और जर्जर विद्युत व्यवस्था रही।

के.सी. जैन ने बताया कि राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो के आँकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 से 2024 के बीच देश में अग्निकाण्डों में 48,588 लोगों की मृत्यु हुई। वर्ष 2023 में देश में हुए कुल अग्निकाण्डों में लगभग 25 प्रतिशत घटनाएँ शॉर्ट सर्किट के कारण हुईं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1996 में यह अनुपात मात्र 3 प्रतिशत था, जो अब गंभीर सार्वजनिक सुरक्षा संकट बन चुका है।

उन्होंने कहा कि देश में करोड़ों लोग ऐसे भवनों में रह रहे हैं, जहाँ वर्षों से विद्युत सुरक्षा जाँच नहीं हुई। अधिकांश लोगों को यह तक जानकारी नहीं होती कि उनके भवन की विद्युत वायरिंग कितनी पुरानी है और उस पर कितना अतिरिक्त भार डाला जा चुका है।

उन्होंने बताया कि संसद में 10 फरवरी 2026 को केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने स्वीकार किया था कि वर्ष 2023 में देश में 7,054 अग्निकाण्ड हुए जिनमें 6,891 लोगों की मृत्यु हुई। वहीं राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि “पूर्व अग्निकाण्डों से कोई सबक नहीं लिया गया।”

के.सी. जैन ने माँग की,कि तीन मंजिल या उससे ऊँचे सभी भवनों में प्रत्येक तीन वर्ष पर अनिवार्य विद्युत सुरक्षा ऑडिट कराया जाए। अस्पतालों, होटलों, विद्यालयों और सार्वजनिक भवनों में प्रतिवर्ष विद्युत सुरक्षा जाँच अनिवार्य हो। उन्होंने यह भी माँग की कि विद्युत सुरक्षा ऑडिट के बिना अग्नि अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी न किया जाए तथा मान्यता प्राप्त विद्युत सुरक्षा परीक्षकों की राष्ट्रीय सूची तैयार की जाए।

उन्होंने कहा कि यह केवल आँकड़ों की लड़ाई नहीं बल्कि लोगों की जान बचाने का विषय है। “आग लगने के बाद शोक व्यक्त करना आसान है,सच्ची जिम्मेदारी आग लगने से पहले उसे रोकने में है।”

रिपोर्ट : असलम सलीमी