आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर लगातार हादसे :“गति का गलियारा” या “मौत का मार्ग” बना एक्सप्रेसवे

उन्नाव के पास भीषण सड़क हादसे में 7 की मौत,करीब 20 घायल,सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

हिन्दुस्तान वार्ता।ब्यूरो

आगरा। आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे पर मंगलवार तड़के एक और भीषण सड़क हादसे ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्नाव जनपद के निकट सुबह लगभग 5 बजे दिल्ली से बिहार जा रही एक डबल डेकर एसी बस अनियंत्रित होकर पलट गई, जिसमें 7 लोगों की मौत हो गई जबकि लगभग 20 यात्री घायल हो गए। मृतकों में एक सब-इंस्पेक्टर एवं एक बंदी भी शामिल बताए गए हैं। प्रारंभिक जांच में चालक को झपकी आना, थकान और अत्यधिक गति हादसे का प्रमुख कारण माना जा रहा है।

वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सड़क सुरक्षा कार्यकर्ता के.सी. जैन ने इस घटना को आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे पर लगातार बढ़ते हादसों की गंभीर कड़ी बताते हुए कहा कि यह एक्सप्रेसवे अब “स्पीड कॉरिडोर” नहीं बल्कि “सेफ्टी कॉरिडोर” बनाए जाने की मांग कर रहा है।

उन्होंने बताया कि 10 नवंबर 2025 को लखनऊ स्थित यूपीड़ा मुख्यालय में आयोजित बैठक में एक्सप्रेसवे सुरक्षा को लेकर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया था। उस दौरान यूपीड़ा ने स्वयं स्वीकार किया था कि रात्रि 12 बजे से सुबह 8 बजे के बीच लगभग 70 प्रतिशत दुर्घटनाएँ होती हैं। बैठक में सर्दियों के दौरान रात्रिकालीन गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा से घटाकर 75 किलोमीटर प्रति घंटा करने, ड्रोन आधारित दुर्घटना रिकॉर्डिंग, नया रोड सेफ्टी ऑडिट, एआई आधारित ई-निगरानी, ड्राइवर वेलनेस जोन, क्रैश बैरियर और विश्राम क्षेत्रों जैसी व्यवस्थाओं पर सहमति बनी थी।

के.सी. जैन ने प्रश्न उठाया कि यदि वर्ष 2021 से 2025 के बीच हुई 7,024 दुर्घटनाओं में 54.7 प्रतिशत हादसों का कारण चालक की थकान और झपकी था, तो फिर रात में 120 किलोमीटर प्रति घंटा की गति सीमा क्यों जारी रखी गई। उन्होंने कहा कि “गति को जीवन से अधिक महत्व देना घातक सोच है।”

उन्होंने कहा कि देश में सड़क सुरक्षा की चर्चा अक्सर केवल ओवरस्पीडिंग तक सीमित रह जाती है, जबकि वास्तविकता यह है कि लंबी दूरी तय करने वाले बस और ट्रक चालक अत्यधिक थकान, मानसिक दबाव और लगातार ड्राइविंग के कारण वाहन चलाते समय सो जाते हैं।

प्रस्तुतीकरण में सुझाव दिया गया था कि प्रत्येक 40 से 50 किलोमीटर पर विश्राम क्षेत्र विकसित किए जाएँ, रात्रि में मुफ्त डॉरमिटरी की सुविधा उपलब्ध हो, कम दरों पर भोजन और चाय मिले तथा ड्राइवर वेलनेस जोन बनाए जाएँ ताकि चालक सुरक्षित विश्राम कर सकें।

उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान ई-निगरानी व्यवस्था केवल ओवरस्पीडिंग तक सीमित है, जबकि लेन उल्लंघन, मोबाइल फोन का उपयोग, सीट बेल्ट, ओवरलोडिंग और वाहन फिटनेस जैसे नियमों की निगरानी भी आवश्यक है।

के.सी. जैन ने मांग की कि आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे का नया स्वतंत्र रोड सेफ्टी ऑडिट आईआईटी दिल्ली, सीआरआरआई अथवा किसी विशेषज्ञ संस्था से कराया जाए, क्योंकि वर्ष 2019 के बाद कोई स्वतंत्र ऑडिट नहीं हुआ है जबकि वाहन संख्या लगातार बढ़ी है।

उन्होंने कहा,“गति रुक सकती है,जीवन नहीं। यदि आंकड़े स्वयं बता रहे हैं कि चालक की झपकी सबसे बड़ा कारण है, तो केवल तेज गति को विकास कहना घातक भूल होगी। हर नई दुर्घटना यह प्रश्न पूछ रही है कि जिन सुरक्षा उपायों पर सहमति बनी थी, वे धरातल पर कब उतरेंगे?”

रिपोर्ट : असलम सलीमी