प्रकृति संरक्षण और रेडिएशन नियंत्रण पर पंत जयंती संगोष्ठी



पंत जी प्रकृति के कवि थे,उनकी रचनाओं में बोलती है प्रकृति

हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा। भारतीय बैंकर्स क्लब के तत्वावधान में छायावाद के प्रमुख स्तंभ सुमित्रानंदन पंत की जयंती के अवसर पर ग्रीनहाउस, भोगीपुरा में “प्राकृतिक तत्वों का क्षरण एवं उसके नियंत्रण” विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, रेडियोधर्मिता के दुष्प्रभाव और प्रकृति के महत्व पर विस्तृत चर्चा की गई।

कार्यक्रम का शुभारंभ कु. पूजा तोमर द्वारा सरस्वती वंदना से किया गया। अतिथियों का स्वागत करते हुए चंद्रशेखर शर्मा ने कहा कि पंत जी प्रकृति धर्मा कवि थे और आज मानव विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन कर रहा है, जिससे अनेक समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रकृति संरक्षण के लिए समाज को गंभीरता से विचार करना होगा।

मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार राजीव सक्सेना ने कहा कि रेडियोधर्मिता के कारण निकलने वाली हानिकारक किरणें कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को जन्म दे रही हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे 18 प्रकार के पौधे हैं जिन्हें घरों और आसपास लगाने से रेडिएशन के प्रभाव को कम किया जा सकता है। कार्यक्रम में ब्रायोफायलम और कैक्टस की विभिन्न प्रजातियों सहित रेडिएशन नियंत्रित करने वाले पौधों का प्रदर्शन भी किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता आन्शवना सक्सेना ने की। उन्होंने कहा कि कौसानी में जन्मे पंत जी की रचनाओं में प्रकृति सजीव रूप में दिखाई देती है। इस अवसर पर सुशील सरित ने “ये गीत विहग उड़-उड़ जाते”, आन्शवना सक्सेना ने “बंद तुम्हारे द्वार मुस्काती प्राची में उषा ले किरणों का हार” तथा कु. पूजा ने “ज्योति भूमि जय भारत देश” की संगीतमय प्रस्तुतियां दीं।

हरीश भदौरिया ने पंत जी की रचना प्रक्रिया पर विचार व्यक्त किए, जबकि डॉ. नीरज स्वरूप ने उनके जीवन और साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डाला। हैदराबाद से आईं विशिष्ट अतिथि सुश्री मृगांकी ने कहा कि पंत जी की रचनाओं में झरनों की कल-कल और फूलों की सुगंध का एहसास होता है तथा उनकी कविताएं सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती हैं।

कार्यक्रम में हरीश अग्रवाल ‘ढ़पोर शंख’, सुभाष सक्सेना, सुधीर शर्मा, निमिषा स्वरूप, विजय गोयल और जगमोहन गुप्ता सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. असीम आनंद ने किया तथा संचालन सुशील सरित ने किया।

रिपोर्ट : असलम सलीमी