हिन्दुस्तान वार्ता। ✍️ धर्मेन्द्र कुमार चौधरी
पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। इसका मूल उद्देश्य समाज को सही,निष्पक्ष और तथ्यपरक जानकारी उपलब्ध कराना, सत्ता से सवाल पूछना तथा जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाना है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में पत्रकारिता के स्तर को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं। अक्सर यह सवाल उठता है कि पत्रकारिता का गिरता स्तर आखिर किसकी जिम्मेदारी है ?
सबसे पहले मीडिया संस्थानों की भूमिका पर विचार करना आवश्यक है। बढ़ती व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा और टीआरपी की होड़ में कई संस्थान समाचारों की गुणवत्ता से अधिक सनसनीखेज प्रस्तुति को महत्व देने लगे हैं। परिणामस्वरूप जनहित के मुद्दे पीछे छूट जाते हैं और मनोरंजन या विवाद आधारित खबरें प्रमुखता पा जाती हैं।
दूसरा कारण सोशल मीडिया का तेजी से बढ़ता प्रभाव है। आज सूचना का प्रवाह इतना तेज हो गया है कि कई बार बिना पर्याप्त सत्यापन के खबरें प्रसारित कर दी जाती हैं। "पहले दिखाने" की दौड़ में "सही दिखाने" का सिद्धांत कमजोर पड़ता जा रहा है। इससे फेक न्यूज और भ्रामक सूचनाओं को भी बढ़ावा मिलता है।
पत्रकारों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी कम नहीं है। पत्रकारिता एक मिशन और सामाजिक उत्तरदायित्व का क्षेत्र है। यदि पत्रकार निष्पक्षता, तथ्यों की जांच और नैतिक मूल्यों से समझौता करते हैं, तो पत्रकारिता की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। हालांकि यह भी सच है कि अनेक पत्रकार आज भी विपरीत परिस्थितियों में जनहित के लिए ईमानदारी से कार्य कर रहे हैं।
राजनीतिक हस्तक्षेप और आर्थिक दबाव भी पत्रकारिता की स्वतंत्रता को प्रभावित करते हैं। जब मीडिया संस्थान किसी राजनीतिक या व्यावसायिक हित से प्रभावित होने लगते हैं, तो निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।
लेकिन केवल मीडिया या पत्रकारों को दोष देना उचित नहीं होगा। समाज और पाठकों की भी जिम्मेदारी है। जब दर्शक गंभीर और तथ्यपरक समाचारों की अपेक्षा सनसनीखेज सामग्री को अधिक महत्व देते हैं, तो बाजार उसी दिशा में बढ़ता है। इसलिए जागरूक पाठक और दर्शक स्वस्थ पत्रकारिता के लिए उतने ही आवश्यक हैं जितने पत्रकार।
पत्रकारिता का स्तर सुधारने के लिए मीडिया संस्थानों को नैतिक मानकों का पालन करना होगा, पत्रकारों को अपने पेशेवर दायित्वों के प्रति सजग रहना होगा, सरकार को प्रेस की स्वतंत्रता सुनिश्चित करनी होगी और समाज को जिम्मेदार समाचार उपभोग की आदत विकसित करनी होगी।
अंततः पत्रकारिता का गिरता स्तर किसी एक व्यक्ति, संस्था या वर्ग की विफलता नहीं है। इसके लिए मीडिया संस्थान, पत्रकार, राजनीतिक व्यवस्था, सोशल मीडिया और समाज,सभी कम या अधिक रूप से जिम्मेदार हैं। यदि लोकतंत्र को मजबूत बनाना है तो पत्रकारिता की विश्वसनीयता और गरिमा को पुनः स्थापित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
जय हिन्द..👍
सभी को 'हिंदी पत्रकारिता दिवस' की हार्दिक शुभकामनाएं।💐
(लेखक - उ.प्र.जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के प्रदेश सचिव हैं।)

