यूएन में भारत की मांग- नए स्थायी सदस्यों के पास हों मौजूदा देशों जैसे अधिकार



हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी० हरीश ने जी4 देशों (भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान) की ओर से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधारों पर आयोजित अंतर-सरकारी वार्ता (आईजीएन) से जुड़ी बैठक में एक महत्वपूर्ण और व्यावहारिक प्रस्ताव पेश किया है। हरीश ने बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए स्पष्ट किया कि स्थायी सदस्यों की श्रेणी में कोई ' उप-श्रेणी' (सब-कैटेगरी) नहीं हो सकती और नए स्थायी सदस्यों के पास सैद्धांतिक रूप से वर्तमान सदस्यों जैसी ही जिम्मेदारियां और अधिकार होने चाहिए।

हालांकि भारत ने यह भी साफ किया कि जी4 प्रस्ताव करता है कि नए स्थायी सदस्य 15 वर्षों की समीक्षा अवधि तक वीटो शक्ति का उपयोग नहीं करेंगे।

न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारत के स्थायी मिशन ने 19 मई को राजदूत हरीश के हवाले से एक आधिकारिक बयान जारी किया। इसमें कहा गया है जी4 विनम्रतापूर्वक अनुरोध करता है कि इस सत्र के लिए तैयार किए जाने वाले 'एलिमेंट्स पेपर' में, अधिकांश सदस्य देशों के विचारों और भावनाओं को निष्पक्ष तरीके से सटीक रूप से शामिल किया जाए। जी4 इस बात को दोहराता है कि अधिकांश सदस्य देश, दोनों ही श्रेणियों में विस्तार का समर्थन करते हैं। इसके अलावा, इस समर्थन को केवल ‘महत्वपूर्ण’ बताकर सीमित करना, अधिकांश सदस्यों के विचारों को सही ढंग से नहीं दर्शाता है। हम एक बार फिर आशा करते हैं कि इस सत्र के 'एलिमेंट्स पेपर' में इस विषय को उचित रूप से संबोधित किया जाएगा।

बयान में कहा गया है एकीकृत मॉडल का परिणाम 'पाठ-आधारित वार्ताओं' के रूप में ही निकलना चाहिए। ऐसा मॉडल पूरी तरह से निष्पक्ष तरीके से और केवल आईजीएन चर्चाओं के दौरान विभिन्न समूहों तथा सदस्य देशों द्वारा व्यक्त किए गए विचारों के अनुरूप ही तैयार किया जाना चाहिए। दुनिया ने यूएनएससी में वास्तविक सुधार के लिए बहुत लंबा इंतज़ार किया है और हम इसके परिणामों को देख रहे हैं।

भारत और समस्त जी4 सदस्य देश पहले से ही दोहराते रहे हैं कि परिषद की कुल सदस्य संख्या को वर्तमान 15 से बढ़ाकर 25 या 26 किया जाए। जी4 यूएनएससी में कुल 6 नई स्थायी सीटें बढ़ाने के पक्ष में है, जिनमें 2 अफ्रीका से, 2 एशिया-प्रशांत क्षेत्र से, 1 लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियन क्षेत्र से तथा 1 पश्चिमी यूरोप व अन्य देशों से शामिल करने की मांग है। अब वीटो पावर के मुद्दे पर, भारत और जी-4 देशों ने लचीला रुख अपनाते हुए यह प्रस्ताव दिया है कि भले ही नए स्थायी सदस्यों को 15 वर्षों तक वीटो शक्ति का उपयोग न करने दिया जाए और इस समयावधि के बाद ही इसकी समीक्षा की जाए।

(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)