हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा : शहर के 26 गुरुद्वारों और समृद्ध सिख विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से निर्मित फिल्म ‘धर्म दे रक्षक साडेगुरुद्वारे’ का प्रीमियर शो रविवार को फतेहाबाद रोड स्थित होटल अमर में आयोजित किया गया। आरए मूवीज के बैनर तले बनी इस 1 घंटा 5 मिनट की फिल्म का शुभारंभ प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने गुरुनानक देव की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं फिल्म का स्विच ऑन कर किया।
इस अवसर पर मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि यह फिल्म केवल सिख धर्म के इतिहास को ही नहीं, बल्कि भाईचारे, सेवा और मानवता के संदेश को भी जन-जन तक पहुंचाएगी। उन्होंने कहा कि आगरा की ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहर को संरक्षित करने में यह फिल्म महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
फिल्म निर्माता रंजीत सामा एवं विजय सामा ने बताया कि फिल्म में आगरा के सभी 26 गुरुद्वारों का परिचय और इतिहास दर्शाया गया है। विशेष रूप से गुरुद्वारा लोहामंडी, गुरुद्वारा माईथान, गुरुद्वारा गुरु का ताल, गुरुद्वारा हाथीघाट तथा कैलाशपुरी स्थित गुरुद्वारा दमदमा साहिब के ऐतिहासिक महत्व को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। फिल्म में सिख गुरुओं की यात्राओं, लंगर सेवा, गुरुवाणी कीर्तन तथा समाज सेवा की परंपरा को भी प्रभावशाली ढंग से दिखाया गया है।
बाबा प्रीतम सिंह ने कहा कि यह फिल्म देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आगरा के गुरुद्वारों के इतिहास एवं महत्व की सही जानकारी देने का सशक्त माध्यम बनेगी। फिल्म के लेखक एवं निर्देशक राष्ट्रपति पदक विजेता हेमन्त वर्मा हैं।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से प्र.समाजसेवी/ उद्यमी पूरन डाबर, रूबी सहगल, वीर महेन्द्रपाल सिंह, रानी सिंह, रिंकी धूपर, अमरदेव साहनी, प्रमोद वर्मा, विजय किशन सेठी, नरेन्द्र पुरसनानी, अजय महाजन, संजय अरोरा, दीपक साहनी, संजय जटाना, राकेश अरोरा, राजेन्द्र जैन, जय गुप्ता, रेनू गुप्ता पार्षद सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
पांच प्रमुख गुरुद्वारे जिनसे जुड़ा है गुरुओं का इतिहास
लोहामंडी गुरुद्वारा – जहां गुरुनानक देव जी पीलू के पेड़ के नीचे तीन दिन तक ठहरे थे।
गुरु का ताल – जहां नौवें सिख गुरु गुरु तेग बहादुर ने मुगल शासन के समक्ष स्वयं को गिरफ्तार कराया था।
माईथान गुरुद्वारा – जहां गुरु तेग बहादुर ने अपने चरण कमल रखे थे।
हाथीघाट गुरुद्वारा – जहां गुरु गोविन्द सिंह जी ठहरे थे।
दमदमा साहिब गुरुद्वारा – कैलाशपुरी स्थित यह स्थल गुरु हरगोविन्द साहिब के आगमन से जुड़ा है।



