विश्व क्लबफुट दिवस : क्लबफुट का समय पर इलाज बच्चे को दे सकता है सामान्य जीवन



विश्व क्लबफुट दिवस पर आगरा ऑर्थोपेडिक सोसायटी ने चलाया जागरूकता अभियान

हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा। विश्व क्लबफुट दिवस के अवसर पर आगरा ऑर्थोपेडिक सोसायटी द्वारा यूसी रेनबो हॉस्पिटल/उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल में क्लबफुट (जन्मजात टेढ़े पैर) के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का विषय था-"क्लबफुट : गर्भावस्था में पहचान, सही परामर्श, शीघ्र रेफरल एवं उचित उपचार"।

कार्यक्रम में स्त्री रोग, रेडियोलॉजी, बाल रोग, ऑर्थोपेडिक्स तथा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से जुड़े विशेषज्ञ चिकित्सकों ने भाग लिया। आगरा ऑर्थोपेडिक सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. अतुल कुलश्रेष्ठ ने स्वागत किया, जबकि सचिव डॉ. संजय चतुर्वेदी ने कहा कि क्लबफुट पूरी तरह इलाज योग्य जन्मजात विकृति है। समय पर पहचान और उपचार से अधिकांश बच्चे सामान्य जीवन जी सकते हैं।

फीटल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. चित्रा जानू ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान अल्ट्रासाउंड में क्लबफुट की आशंका होने पर परिवार को सही जानकारी और सकारात्मक परामर्श देना जरूरी है। यूसी रेनबो हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ.नरेंद्र मल्होत्रा ने विभिन्न विशेषज्ञों के बीच समन्वय को समय पर उपचार के लिए महत्वपूर्ण बताया।

ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ.आर.के.अरोड़ा ने क्लबफुट के उपचार में प्रभावी पोंसेटी पद्धति की जानकारी देते हुए कहा कि प्लास्टर कास्टिंग,आवश्यकतानुसार छोटी प्रक्रिया तथा ब्रेस के नियमित उपयोग से उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त होते हैं।

विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि क्लबफुट माता-पिता की किसी गलती का परिणाम नहीं है और न ही यह कोई अंधविश्वास या सामाजिक कलंक है। यह एक चिकित्सकीय समस्या है, जिसका सफल उपचार संभव है। उन्होंने अपील की कि जन्म के बाद यदि किसी बच्चे का पैर अंदर या नीचे की ओर मुड़ा हुआ दिखाई दे तो उसे तुरंत ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ को दिखाया जाए।

कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि जागरूकता,शीघ्र पहचान और समय पर उपचार से क्लबफुट से होने वाली अनावश्यक विकलांगता को रोका जा सकता है।